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एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को रोकने के लिए जोरदार पहल, नर्सों के लिए नया ट्रेनिंग मॉड्यूल

संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण (Infection,prevention and control) के लिए 5 दिनों का एक विशेष कोर्स तैयार किया गया है जिसके तहत नर्सिंग स्टाफ को ट्रेंड करने की योजना है

Updated On: Oct 30, 2018 09:40 PM IST

Pankaj Kumar Pankaj Kumar

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एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को रोकने के लिए जोरदार पहल, नर्सों के लिए नया ट्रेनिंग मॉड्यूल
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संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण (Infection,prevention and control) के लिए 5 दिनों का एक विशेष कोर्स तैयार किया गया है जिसके तहत नर्सिंग स्टाफ को ट्रेंड करने की योजना है. ये प्रोग्राम 29 अक्टूबर को नई दिल्ली के टीबी सेंटर में शुरू हुआ जो कि 2 नवंबर तक चलेगा. इसमें अस्पतालों में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए नर्सिंग स्टाफ को विशेष तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है. जिससे संक्रमित मरीजों से दूसरे मरीज, नर्सेस, डॉक्टर्स और अन्य लोगों को संक्रमण से बचाया जा सके.

संक्रमण (infection) अब एक गंभीर समस्या बन चुका है ओर बैक्टीरियल इंफेक्शन से निपटना तो पूरे विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है. दरअसल बैक्टीरियल इंफेक्शन से निपटने के लिए एंटीबायोटिक ईजाद की गई लेकिन एंटीबायोटिक के जादुई असर की वजह से इसका अतिप्रयोग और दुरूपयोग होने लगा. इतना ही नहीं साधारण वायरल इंफेक्शन में भी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल होने से मामला बद से बदतर हो चुका है. एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस डेवलप करने की वजह से बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इंफेक्शन की रोकथाम और नियंत्रण एक गंभीर समस्या बन चुका है. जिसे अस्पताल सहित बाहर भी रोके जाने के लिए सरकार कई मोर्चे पर काम कर रही है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली में चल रही इस ट्रेनिंग में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ को इन तमाम चीजों से अवगत कराना और इससे निपटने के लिए ट्रेंड करना विशेष जरूरी है ताकी अस्पतालों में संक्रमण (इंफेक्शन) कम से कम फैले और अटेंडेट सहित डॉक्टर्स भी संक्रमण से बचाए जा सकें.

ट्रेनिंग के कोर्स का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि स्वास्थ्य से जुड़े संक्रमण ( HEALTH ASSOCIATED INFECTIONS ) हेल्थकेयर की अनावश्यक जटिलताएं हैं और इस समस्या का रोकथाम बड़े पैमाने पर संभव है. मॉडर्न मेडिसीन में एंटीबायोटिक एक बड़ी खोज है और इसकी वजह से अंग प्रत्यारोपण से लेकर कीमोथेरेपी और गंभीर शल्य चिकित्सा में खतरनाक संक्रमण (Infection ) को नियंत्रित किया जाता है. लेकिन अतिप्रयोग और दुरुपयोग की वजह से जैसे साधारण खांसी और डायरिया में एंटीबायोटिक के प्रयोग की वजह से ये कम असरदार होने लगा है.

इसलिए संक्रमण (infection) महमारी का रूप ने ले ले इसका खतरा बना रहता है. और उसकी रोकथाम (prevention) और नियंत्रण (control) जरूरी हो गया है क्योंकि नए (न्यू वर्जन) एंटीबायोटिक बाजार में आ नहीं रहे हैं. और पुराने एंटीबायोटिक का प्रभाव कम कारगर होने लगा है. दिल्ली सोसायटी फॉर प्रोमोशन ऑफ रैशनल यूज ऑफ मेडीसिन की प्रेसिंडेट और इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज की प्रोफेसर डॉ. संगीता शर्मा कहती हैं,' एंटीबायोटिक रजिस्टेंस के अलावा नए वायरस और नए तरह के संक्रमण वाले रोगों का प्रकोप बढ़ने लगा है. निपाह वायरस और सार्स इसके दो उदाहरण हैं. हमें इस बात पर विचार करना होगा कि नई तरह की परिस्थितियों का सामना करने के लिए क्या हम तैयार हैं? खासकर उन परिस्थितियों में जब प्रभावी कदम उठाने की हमारी क्षमता सीमित है. इसलिए इस कोर्स का डिजाइन इन बातों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. जिससे परिस्थितियों से निपटने में हमें मदद मिलेगी.'

दरअसल पांच दिनों तक चलने वाले इस कोर्स का उद्घाटन दिल्ली सरकार के डायरेक्टर जेनरल हेल्थ सर्विसेज डॉ. कीर्ति भूषण ने किया और इस दौरान राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. बी.एल. शेरवाल और सीईओ यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल डॉ. उपासना अरोड़ा सहित रजिस्ट्रार दिल्ली नर्सिंग काउंसिल डॉ. थॉमस और डायरेक्टर दिल्ली टीबी सेंटर डॉ. के.के. चोपड़ा भी मौजूद थे.

इसमें सरकारी और प्राइवेट अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ को ट्रेंड करने की योजना है. पांच दिनों के इस कोर्स में यशोदा हॉस्पिटल, श्रॉफ आई सेंटर, राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट, सफदरजंग हॉस्पिटल सहित एनटीपीसी उड़ीसा और व्यॉल इंडिया असम के नर्सिंग स्टाफ शामिल हुए हैं. जिन्हें नई चुनौतियों से निपटने के लिए ट्रेंड किया जा रहा है. इस प्रोग्राम को ऑर्गेनाइज दिल्ली सरकार की मदद से दिल्ली सोसाइटी फॉर प्रोमोशन ऑफ रैशनल यूज ऑफ मेडीसिन (डीएसपीआरयूडी ) नामक संस्था कर रही है.

डीएसपीआरयूडी की प्रेसिडेंट संगीता शर्मा कहती हैं कि संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण के लिए नर्सिंग स्टाफ को इस तरह की डिग्री दिया जाना जरूरी है और इस तरह का सर्टिफिकेट एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस (AMR) से लड़ने और संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण करने में कारगर साबित होगा.

वहीं डॉ. रेणु गुप्ता डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर कहती हैं, 'ये मल्टीडिसीप्लनरी कोर्स हेल्थ केयर से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए तैयार किए गए हैं. जिसके तहत संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के विशेष उपाय बताए जाएंगे. इसमें माइक्रोबायोलॉजी के 15-16 एक्सपर्ट्स जो कि एम्स, मेदांता, जीबीपंत और इभास जैसी संस्था से हैं वो ट्रेनिंग देंगे जिससे हेल्थ केयर की गुणवत्ता में सुधार हो और संक्रमण की रोकथाम में मदद मिल सके.'

भारत सरकार द्वारा उठाए गए कारगर कदम

भारत सरकार भी एंटीबायोटिक के अतिप्रयोग और दुरुपयोग को रोकने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया है. जिसके तहत पूरे देश में अब तक 40 सेंटर खोले गए हैं. इस सेंटर का मकसद एंटीबायोटिक के अतिप्रयोग और दुरुपयोग( OVERUSE AND MISUSE OF Antibiotics) पर लगाम कसने का है. कुल 40 में से बीस नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने खोला है वहीं बाकी के 20 सेंटर को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने खोला है. सरकार 7 सेंटर और खोलने जा रही है जिससे कि एंटीबायोटिक के दुरुपयोग और अतिप्रयोग की मात्रा को जाना जा सके और उसके रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाया जा सके.

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हाल में 14 सिंतबर को नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) और दिल्ली सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ रैशनल यूज ऑफ मेडीसिन (DSPRUD) के लोगों को एंटीबायोटिक के खपत की मात्रा को मापने की ट्रेनिंग दी गई. इस ट्रेनिंग का प्रायोजक विश्व स्वास्थ संगठन था ( WHO ). वैसे 12 नवंबर से 18 नवंबर तक विश्व स्वास्थ्य संगठन एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है, जिससे आम लोगों में जागरूकता लाई जा सके.

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