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'स्टार्ट-अप थीम' से शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का समापन

इस बार के व्यापार मेले में झारखंड सहयोगी राज्य और वियतनाम सहयोगी देश था, जबकि पाकिस्तान इस बार के व्यापार मेले में शामिल नहीं हुआ

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Nov 27, 2017 09:30 PM IST

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'स्टार्ट-अप थीम' से शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का समापन

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का आज आखिरी दिन था. मेले का समापन समारोह हंस ध्वनि थिएटर में संपन्न हुआ. केंद्रीय राज्य मंत्री सी आर चौधरी ने समापन समारोह में उम्दा प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया. मेले की शुरुआत इसी महीने की 14 तारीख को हुई थी.

इस साल के व्यापार मेले में लगभग 22 देशों और 3 हजार घरेलू और विदेशी कंपनियां शामिल हुईं. सोमवार को मेले का आखिरी दिन होने के कारण बड़ी संख्या में लोग मेला देखने आए थे.

मेले में भारत सरकार के पृथ्वी-विज्ञान मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय सहित कई विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे.

गौरतलब है कि इस बार प्रगति मैदान के आधे हिस्से में पुनर्विकास काम की वजह से मेला करीब 53 हजार वर्गमीटर क्षेत्र पर ही लग पाया. इन 53 हजार वर्गमीटर में हॉल नंबर 12, 15 और 18 ऐसा रहा जहां दर्शकों की सर्वाधिक भीड़ जुटी.

हॉल नंबर 12 में टैक्स जमा करने से संबंधित जानकारी, पैन कार्ड का आवेदन और आधार से लिंक करने की सुविधा थी. हॉल नंबर 15 विभिन्न राज्यों का पवेलियन था.

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गौरतलब है कि इस बार जगह कम होने की वजह से एक साथ ही बहुत सारे राज्यों को जोड़कर पवेलियन बनाया गया था.

हॉल नंबर 18 का आकर्षण विदेशी स्टॉल था. मेले में एक जीएसटी पवेलियन भी बनाया गया था, जिसमें जीएसटी के विषय में जानकारी और जागरुकता दी जा रही थी.

लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार लोगों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध थी. इस स्वास्थ्य कैंप का आयोजन स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किया गया था.

मेले में व्यापारियों और दर्शकों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही. पहली बार मेले में शामिल हुए दर्शक काफी खुश थे, लेकिन नियमित रूप से हर साल व्यापार मेले में शामिल होने वाले दर्शक नाराज नजर आ रहे थे.

यूपी शामली से मेला देखने आए विक्की मित्तल फर्स्टपोस्ट हिंदी को बताया, 'मैं साल 1991 से हर साल यहां आता हूं, लेकिन इस बार मजा नहीं आया. उत्तर प्रदेश मंडप में न ही कानपुर के जूते हैं, न ही फिरोजाबाद की चूड़ी और न ही मुरादाबाद का पीतल. इस बार जगह कम होने की वजह से सारे स्टेट को एक साथ रख दिया गया है.'

थाइलैंड के व्यापारी होकिप फर्स्टपोस्ट हिंदी के बताया, 'भीड़ बहुत अच्छी आती है, लेकिन लोगों में उत्साह बहुत कम देखने को मिल रहा है. मेरे समझ से इस बार दर्शक ज्यादा हैं और खरीददार कम.'

दिल्ली कैंट की रहने वाली रेखा ने बताया, 'यहां पर खरीददारी करना बहुत ही महंगा सौदा है. खासकर विदेशी स्टॉल पर तो बिल्कुल ही रिजनेबल रेट नहीं है.'

अफगानिस्तान के ड्राई फ्रूट्स के व्यापारी शेर खान ने बताया , 'माशाअल्लाह सब बहुत अच्छा चल रहा है. पिछले साल से अच्छा है. हां, जीएसटी की वजह से थोड़ा महंगा हुआ है.'

दिल्ली पटेल नगर से आई 4-5 महिलाओं के समूह ने बताया, 'हम पहली बार आए हैं और बहुत अच्छा लग रहा है. यहां सामान महंगा तो मिलता है लेकिन वैरायटी मिल जाती है.'

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कुल मिलाकर लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है. सीमित संसाधन के बावजूद भी लोगों का उत्साह कम नहीं दिखा. जगह कम होने की वजह से मेला परिसर में भीड़ ज्यादा नजर आई लेकिन एक परिसर में देश-विदेश का संगम व्यापार मेला को अनूठा बनाता है.

इस बार के व्यापार मेले में झारखंड सहयोगी राज्य और वियतनाम सहयोगी देश था, जबकि पाकिस्तान इस बार के व्यापार मेले में शामिल नहीं हुआ. इस बार मेले की थीम स्टार्ट-अप था.

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