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लिट्टे के खिलाफ जंग ‘जातीय युद्ध’ नहीं, तमिल निशाने पर नहीं थे: महिंदा राजपक्षे

सेना और लिट्टे के बीच 2009 में खत्म हुए तीन दशक लंबे गृहयुद्ध के दौरान राजपक्षे ही राष्ट्रपति थे

Updated On: Sep 13, 2018 10:01 AM IST

FP Staff

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लिट्टे के खिलाफ जंग ‘जातीय युद्ध’ नहीं, तमिल निशाने पर नहीं थे: महिंदा राजपक्षे

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा है कि श्रीलंकाई सेना की लिट्टे के खिलाफ जंग को जातीय युद्ध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. लिट्टे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में तमिलों को निशाना नहीं बनाया गया था.

राजपक्षे बुधवार को दिल्ली में एक आयोजन में शामिल होने आए थे. यहां उन्होंने ये बात कही. भारतीय जनता पार्टी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के नेतृत्व वाले विराट हिन्दुस्तान संगम की ओर से ‘इंडो-श्रीलंका रिलेशंस: द वे फारवर्ड’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में महिंदा राजपक्षे शामिल हुए थे.

यहां महिंदा राजपक्षे ने कहा कि साल 2009 में लिट्टे के खिलाफ खत्म हुई जंग को ‘जातीय युद्ध’ नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई में तमिल समुदाय को निशाना नहीं बनाया गया. उनका कहना था कि ये कार्रवाई नस्लीय नहीं थी क्योंकि लिट्टे का आतंक बस श्रीलंका तक ही नहीं भारत तक फैल चुका था, जहां उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की हत्या की थी.

सेना और लिट्टे के बीच 2009 में खत्म हुए तीन दशक लंबे गृहयुद्ध के दौरान राजपक्षे ही राष्ट्रपति थे.

इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि श्रीलंका की जरूरत के समय भारत की तेज प्रतिक्रिया भारत की ‘सच्ची दोस्ती’ को दिखाती है.

उन्होंने ये भी कहा कि श्रीलंका जितनी तेजी से आतंक को खत्म करने में सफल हुआ है, उतना विश्व में कोई विकसित और सक्षम देश भी नहीं हो सका है.

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