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जेएनयू में जल्द शुरू होगी 'इस्लामिक टेररिज्म' की पढ़ाई

जेएनयू छात्रसंघ ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है और इसे एक 'कम्युनल' कदम बताया है, छात्रसंघ का कहना है कि यह एक कोर्स के नामपर 'इस्लामोफोबिया' को फैलाने का प्रोपगेंडा है

Updated On: May 19, 2018 03:54 PM IST

FP Staff

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जेएनयू में जल्द शुरू होगी 'इस्लामिक टेररिज्म' की पढ़ाई

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में जल्द ही 'इस्लामिक टेररिज्म' और 'नक्सलवाद' पर अलग से पढ़ाई शुरू होगी. इसकी पढ़ाई के लिए जल्द ही नेशनल सिक्यूरिटी पर एक नया सेंटर खोला जाएगा. यह प्रस्ताव शुक्रवार को जेएनयू के एकेडमिक काउंसिल के बैठक में पास हुआ. पिछले कई एकेडमिक काउंसिल से कई सदस्य यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें बैठक में बोलने नहीं दिया जा रहा है.

खबरों के अनुसार सेंटर फॉर नेशनल सिक्यूरिटिज स्टडीज (सीएनएसएस) के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है, साथ ही यह भी कहा गया है कि इस सेंटर में 'इस्लामिक टेररिज्म' की पढ़ाई होगी और नक्सलवाद पर भी शोध होगा. एकेडमिक काउंसिल के बैठक के एजेंडे में इस विषय का जिक्र है लेकिन यह नहीं पता चल पाया है कि यह एक अलग विषय के तौर पर पढ़ाया जाएगा या किसी और विषय के साथ. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार इस सेंटर को बनाने तौर-तरीके को अंतिम रूप देने के लिए प्रोफेसर अजय दुबे की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई है. प्रोफेसर अजय दुबे ने कहा कि इस प्रस्तावित विषय के लिए कोई कोर्स नहीं है.

छात्रसंघ ने किया विरोध

जेएनयू छात्रसंघ ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है और इसे एक 'कम्युनल' कदम बताया है. छात्रसंघ का कहना है कि यह एक कोर्स के नामपर 'इस्लामोफोबिया' को फैलाने का प्रोपगेंडा है. छात्रसंघ ने कहा कि किसी खास धर्म को आतंक से जोड़कर देखना एक गलत नजरिया है.

इस कोर्स का समर्थन करने वाले प्रोफेसर और एकेडमिक काउंसिल के सदस्य अश्विनी महापात्रा का कहना है कि यह कोर्स जरूरी है लेकिन इसका नाम 'इस्लामिक टेररिज्म' से बदलकर 'इस्लामिस्ट टेररिज्म' करना चाहिए. उन्होंने कहा कि 'इस्लामिस्ट टेररिज्म' टर्म को व्यापक स्वीकृति मिली हुई है और इसे एक वैश्विक घटना के रूप स्वीकृत है. यह उनके लिए इस्तेमाल होता है जो इस्लाम का इस्तेमाल खास उद्देश्य के लिए करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं जिसे हिंदुत्व आतंकवाद कहा जाए, इसका आविष्कार कांग्रेस ने अल्पसंख्यक वोटबैंक के लिए किया था. इसी तरह क्रिश्चियन टेररिज्म जैसा भी कुछ नहीं है. भारत में यह 'इस्लामिस्ट टेररिज्म' है चाहे वो जम्मू-कश्मीर हो या केरल.

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