विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

मौसम के आपातकाल में बदल सकता है दिल्ली का स्मॉग

हैरत की बात है कि कॉमर्स मिनिस्ट्री इतने प्रदूषण के बाद भी भारत में विदेशों से कचरा डंप करवा रही है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Nov 07, 2017 07:30 PM IST

0
मौसम के आपातकाल में बदल सकता है दिल्ली का स्मॉग

नवंबर महीने के पहले सप्ताह में भी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में कोई कमी नहीं आई है. मंगलवार सुबह से ही धुंध ने पूरे दिल्ली-एनसीआर को अपनी चपेट में ले रखा है. स्मॉग के कारण लोगों का बुरा हाल हो गया है.

मौसम वैज्ञानिक और प्रदूषण पर काम करने वाली सरकारी और गैरसरकारी एजेंसियां दिल्ली-एनसीआर को स्मॉग चैंबर बनने को लेकर अपना अलग-अलग नजरिया पेश कर रहे हैं.

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसम में आए अचानक बदलाव की मुख्य वजह वायुमंडल में हवा की रफ्तार में कमी है. वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को लगता है कि इसकी सबसे बड़ी वजह हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने के बाद जो हवा दिल्ली की तरफ आई है, वही हवा इसके लिए जिम्मेदार है. यानी कहा जा सकता है कि इस मुद्दे को लेकर भी अब देश में राजनीति शुरू हो जाएगी.

दिल्ली-एनसीआर में इस वक्त हवा की रफ्तार दो से तीन किलोमीटर प्रति घंटा है. हवा की धीमी रफ्तार का कारण वायुमंडल से प्रदूषित कणों का नहीं हटना बताया जा रहा है. प्रदूषित कणों के कारण ही नमी पैदा हो रही है जो कि बाद में स्मॉग का रूप ले रही है.

हो सकता है बड़ा दुष्परिणाम

पर्यावरण पर काम करने वाले कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह संकेत आने वाली बड़ी घटना के तरफ इशारा कर रहा है. हमलोग इसे मौसमी आपातकाल भी कह सकते हैं.

गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा हालात में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों को करना पड़ रहा है. प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने पर गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पलने वाले बच्चों पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ रहा है.

इस मौसम में डाक्टर्स लोगों को सलाह देते हैं कि घर से बाहर कम ही निकलना चाहिए. बच्चों में एलर्जी और चर्म रोग होने की संभावना ज्यादा होती है, बूढ़ लोगों को सांस और दिल की बीमारी होने का सबसे ज्यादा खतरा होता है. स्वस्थ और जवान लोगों को भी प्रदूषण की वजह से कई समस्याएं हो सकती हैं.

मनीष सिसोदिया से अपील की कई है कि वे दिल्‍ली के सभी स्‍कूलों में होने वाले आउटडोर गेम्‍स, बाहरी एक्टिविटीज पर तत्‍काल प्रभाव से बैन लगा दें.

मनीष सिसोदिया से अपील की गई है कि वे दिल्‍ली के सभी स्‍कूलों में होने वाले आउटडोर गेम्‍स, बाहरी एक्टिविटीज पर तत्‍काल प्रभाव से बैन लगा दें.

गौरतलब है कि दिवाली से पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को लेकर बड़ा फैसला लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए ही पटाखा बेचने पर रोक लगा दिया था.

इसके बावजूद प्रदूषण के स्तर में कोई कमी नहीं आई. हालात ऐसे हो गए हैं कि इस स्मॉग चैंबर के कारण पंजाब, हरियाणा सहित पूरे दिल्ली-एनसीआर में त्राहिमाम मचा हुआ है.

स्मॉग की वजह से दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में विजिविलिटी मंगलवार सुबह से ही काफी कम हो गई है. विजिविलिटी कम होने की वजह से हवाई, सड़क और रेल समय से पीछे होने लगी हैं.

मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम इलाके से चलने वाली हवा अभी कुछ दिन और धीमी रफ्तार से चलेगी, जिसके कारण अगले कुछ दिनों में प्रदूषण के स्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है.

दिल्ली-एनसीआर का एअर इंडेक्स पावर 400 के पार पहुंच गया है. दिल्ली में सबसे खतरनाक स्थिति आनंद विहार इलाके की है. आनंद विहार में एअर इंडेक्स पावर 450 को पार कर गया है. दूसरी तरफ दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में लगातार बढ़ोतरी के बाद स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों को बंद करने की भी मांग उठने लगी है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार से स्कूल-कॉलेजों को बंद करने की मांग की है.

दिल्ली सरकार की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि अगर दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में गिरावट नहीं आती है तो स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए जाएंगे. यही नहीं जरूरत पड़ी तो दिल्ली में एक बार फिर से ऑड-इवेन फॉर्मूला भी लागू कर सकते हैं.

सीपीसीबी के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों से प्रदूषण के स्तर में थोड़ा-बहुत सुधार देखने को मिल रहा था, लेकिन पिछले एक-दो दिनों से हवा एक बार फिर से खराब हो गई है. मौजूदा हालात के बाद कहा जा सकता है कि अगले तीन-चार दिनों में इसमें सुधार की गुंजाइश कम ही है.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स में गिरावट पर चिंता व्यक्त की है. दिल्ली के आनंद विहार, गाजियाबाद और नोएडा में हवा में प्रदूषण का लेवल चिंता का विषय है. इन जगहों पर हवा में पीएम-2.5 और पीएम-10 का स्तर सामान्य से पांच से सात गुना ज्यादा हो गया है.

आईएमए के मुताबिक मौजूदा हालात में सभी दिल्ली-एनसीआर के लोगों को मॉर्निंग वॉक, कंस्ट्रक्शन साइट्स, धुआं पैदा करने वाली गाड़ियों, उद्योग धंधों और कल कारखानों से निकलने वाले धुएं से दूर ही रहना चाहिए.

मंगलवार को दिल्ली में हर तरफ प्रदूषण भरे धुंध (स्मॉग) का साया देखा जा रहा है.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, दिल्ली ने मांग की है कि जब तक दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में सुधार न हो जाए तबतक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), दिल्ली सरकार और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को इस महीने होने वाली हाफ-मैराथन पर रोक लगा देनी चाहिए. यह रोक तब तक जारी रहनी चाहिए जब तक दिल्ली-एनसीआर की हवा में सुधार न हो जाए.

दिल्ली में हवा की स्थिति जानने के लिए यहां क्लिक करें.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ अचल श्रीवास्तव फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए दिल्ली में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. इससे सांस संबंधी बीमारियां सबसे ज्यादा फैलती हैं. सबसे ज्यादा असर दमे और सांस के मरीजों पर पड़ता है. स्मॉग से फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली सांस नली में रुकावट, सूजन, रूखेपन की समस्या शुरू होने लगती है.’

डॉ श्रीवास्तव आगे कहते हैं, ‘वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर पड़ता है. फेफड़ा खराब होने लगता है, जो कि काफी खतरनाक है. आप कार में देखते हैं कि एक एअर क्लीनर होता है जिसे 15-20 हजार किलोमीटर चलाने के बाद बदलना पड़ता है, लेकिन यह फैसिलिटी हमलोगों के फेफड़ों में उपलब्ध नहीं है. फेंफड़े के अंदर एक बार जो चला जाता है वह बाहर नहीं निकलता. इसके साथ ही स्किन की बीमारी भी वायु प्रदूषण के कारण होती है. साथ ही चिड़चिड़ापन और कुछ मामलों में तो चक्कर भी आने शुरू हो जाते हैं. कुछ मामलों में लोगों को ज्यादा नींद आने लगती है.’

कॉमर्स मिनिस्ट्री भी है जिम्मेदार

देश के जाने-माने पर्यावरणविद और प्रदूषण को लेकर ही काम करे रहे गोपाल कृष्ण फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘वायु प्रदूषण नुकसानदायक है, पर इससे कई गुना नुकसानदायक वह जहरीला कचरा है जो विदेशों से हमारे यहां आकर डंप होता है. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि देश की कॉमर्स मिनिस्ट्री इसको प्रमोट कर रही है. हमलोग अपने कचरे को मैनेज नहीं कर पाते हैं तो बाहर के देशों का कचरा भारत में डंप करवाने का क्या तुक है?

गोपाल कृष्ण आगे कहते हैं, देखिए मैं इसलिए कॉमर्स मिनिस्ट्री का नाम ले रहा हूं, जो नए नियम हैं या जो पुराने नियम भी हैं उनमें यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि फोरेन ट्रेड हमारे देश में प्रदूषण फैलाता है.’

NGT

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण(ईपीसीए) और खुद सुप्रीम कोर्ट की सख्ती भी प्रदूषण कम करने में बेअसर साबित हुई है. वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्र में आने वाले सभी राज्यों की हालत यह है कि अभी तक एक भी राज्य ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अपना एक्शन प्लान तैयार नहीं किया है. ऐसे में मौजूदा हालात के लिए सरकारी तंत्र और उनकी नेक नियति पर सवाल उठना तो लाजमी है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi