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लोकल बॉडीज के बगैर स्मार्ट सिटी का सपना मुश्किल

फंडिंग से भी ज्यादा बड़ी जरूरत देश में स्मार्ट सिटी मुहिम को लागू करते वक्त शहरी स्थानीय संस्थाओं के सुधार की है.

Vanita Akhaury Updated On: Jan 14, 2017 10:17 AM IST

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लोकल बॉडीज के बगैर स्मार्ट सिटी का सपना मुश्किल

अगले 20 साल में 30 करोड़ से ज्यादा भारतीयों के शहरी इलाकों में बसने की संभावना है. इससे स्मार्ट सिटी का कॉन्सेप्ट का और उभार होगा.

शहरी इलाकों में आबादी की बढ़ोतरी से चिंताएं पैदा होंगी. इन्हें दूर करने के लिए स्मार्ट सिटीज मिशन को प्रभावी तरीके से लागू करना एक टेस्ट होगा.

हर शहर के हिसाब से बने रणनीति

यह काम आसान नहीं है क्योंकि हर शहर की अपनी समस्याएं हैं. हमें अलग-अलग शहरों के हिसाब से अलग-अलग एप्रोच अपनानी होगी.

नगरीय निकायों और प्रशासन को अपने शहरों को गहनता से समझना होगा. निर्णायक फैसले लेने के लिए नेतृत्व की काबिलियत और विजन की जरूरत होगी. पैसे की कमी, तकनीकी मुश्किलों और टैलेंटेड लोगों के अभाव के चलते इन परियोजनाओं को लागू करते वक्त समस्याएं आ सकती हैं.

स्थानीय स्तर पर लिए जाएं फैसले

एसपीए नई दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ हाउसिंग के प्रोफेसर और हेड डॉ. पी. एस. एन. राव ने कहा, ‘राज्य और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर काफी कुछ किया जाना है, जो कि केंद्रीय बजट के दायरे से बाहर है. पर्याप्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट कवरेज, साफ-सफाई, तेजी से बिल्डिंग प्लान को मिलने वाली मंजूरी जैसी चीजों को स्थानीय स्तर पर किया जाना जरूरी है.’

राव ने कहा, ‘अर्बन सेक्टर में स्थानीय प्रशासन की भूमिका सबसे अहम है. इसमें सुधार के बगैर केंद्र की शुरू की जाने वाली कोई भी मुहिम बेमतलब हो जाती है.’

साथ ही, स्मार्ट सिटी मिशन के इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए कई कोर तत्वों का एकसाथ आना जरूरी है. पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप इनमें से एक है.

लोकल और सेंट्रल लेवल पर हो बेहतर समन्वय

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सरकार को एक मजबूत लीगल फ्रेमवर्क तैयार करना चाहिए जिसमें अलग-अलग स्टैक होल्डर एक समयबद्ध प्रणाली में काम करें. एक अन्य खास बात शहरी प्रशासकों और पॉलिसी बनाने वालों के बीच बेहतर समन्वय का होना है.

सोमैया एंड कलप्पा कंसल्टेंट्स की प्रिंसिपल आर्किटेक्ट, बृंदा सोमैया के मुताबिक, ‘शहरी विकास के संबंध में बड़ी दिक्कतें हैं. हर मोर्चे पर विकेंद्रीकरण की जरूरत है. लेकिन, साथ ही इन सबको एकसाथ रखना भी अहम है.’

प्रतिभा को मिले मौका

उन्होंने कहा, ‘युवाओं की भूमिका अहम है. आर्किटेक्चर और प्लानिंग स्कूलों में बेहतरीन युवाओं को मैंने देखा है. ये सभी देश के विकास में मदद करना चाहते हैं. लेकिन, नौकरशाही के चलते कोई आइडिया लागू नहीं हो पाता है.’

उन्होंने कहा कि केपटाउन को देखिए, जिस तरह से यह विकसित किया गया है, उससे आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे.

उन्होंने कहा, ‘इसका हल अलग-अलग एजेंसियों, सरकार, ब्यूरोक्रेसी और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर काम करने में छिपा है. तभी हम ऐसे शहर तैयार कर पाएंगे जो कि सभी भारतीयों की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे.’

बजट में इनसेंटिव्स देने और ड्यूटी घटाने के उपाय हों

प्रोफेसर राव ने कहा, ‘2017 के आम बजट में रियल एस्टेट सेक्टर को इनसेंटिव्स देने होंगे. इसमें स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत और ह्दय को ध्यान में रखना होगा. इसे आगे ले जाने के लिए बजट में सीमेंट और स्टील पर ड्यूटी घटानी होंगी ताकि कंस्ट्रक्शन की लागत घटाई जा सके.'

उन्होंने यह भी कहा, 'साथ ही कंस्ट्रक्शन की रफ्तार बढ़ाने के लिए प्री-फेब्रिकेटेड टेक्नोलॉजीज को और अधिक इनसेंटिव्स मिलने चाहिए. ग्रीन बिल्डिंग्स को भी टैक्स से छूट मिलनी चाहिए. इन उपायों से सबको घर मुहैया कराने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.’

कॉलियर्स इंटरनेशनल इंडिया के साउथ एशिया डायरेक्टर (वैल्यूएशंस एंड एडवाइजरी), अरविंद नंदन ने कहा कि इंडिया को दो चीजों की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘इंडिया को बड़े स्केल पर इनवेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी आधारित रियल-एस्टेट सर्विसेज में तेज इजाफा चाहिए.’

टेक्नोलॉजी पर हो फोकस

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नंदन कहते हैं कि नए शहरी केंद्रों के निर्माण में सबसे ज्यादा अहमियत टेक्नोलॉजी की है. सरकार को कंसल्टिंग, फंड जुटाने, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और इंप्लीमेंटेशन, ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन, प्लानिंग सेवाओं जैसी टेक आधारित सेवाओं के लिए बजट में इनसेंटिव्स का एलान करना चाहिए.

आज देश में मौजूद दिमागी ताकत का भरपूर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. सरकार के डिजिटल इंडिया पर जोर दिए जाने के साथ ही स्मार्ट शहरों के लिए देश की प्रतिभा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

फंडिंग के नए तरीके ईजाद हों 

फंडिंग मैकेनिज्म का फिर से आकलन किया जाना चाहिए. अमित एंटरप्राइजेज हाउसिंग लिमिटेड के सीएमडी, किशोर पाटे ने कहा, ‘स्मार्ट शहरों के लिए बड़े पैमाने पर पैसे की जरूरत होगी. सरकार को इसे इनवेस्टमेंट के मौकों के तौर पर तैयार करना होगा.’

उन्होंने कहा, ‘सरकार को बजट में म्यूनिसिपल बॉन्ड्स की तर्ज पर कुछ उपाय करने होंगे.’

स्थानीय निकायों में रिफॉर्म जरूरी

फंडिंग से भी ज्यादा बड़ी जरूरत देश में स्मार्ट सिटी मुहिम को लागू करते वक्त शहरी स्थानीय संस्थाओं के सुधार की है. इन्हें इस काबिल बनाना होगा ताकि अपने लिए पैसे का इंतजाम ये खुद कर सकें.

जेएलएल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग), शुभ्रांशु पाणि ने कहा, ‘बजट में वित्त मंत्री को शहरी निकायों के डिजिटाइजेशन का रोडमैप देना चाहिए. राज्यों को निजी कंपनियों के किए जाने वाले निवेश के लिए गारंटर के तौर पर काम करना चाहिए.’

स्मार्ट सिटी मिशन की सफलता गुड गवर्नेंस और शहरी सुविधाओं की आपूर्ति और प्रबंधन की सर्विस डिलीवरी में छिपी हुई है.

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