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32,000 पन्नों में आया किसान की RTI का जवाब, चुकाए 69,000 रुपए

32 हज़ार अंग्रेज़ी के पन्नों की बात अलग अनिल कास्वां तो विभाग द्वारा मुहैया कराई गई इस जानकारी पर ही सवाल उठा रहे हैं

Updated On: Aug 20, 2018 09:00 PM IST

FP Staff

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32,000 पन्नों में आया किसान की RTI का जवाब, चुकाए 69,000 रुपए

हरियाणा में सिरसा जिले के गांव दड़बा कलां के किसान अनिल कस्वां को आरटीआई के तहत जानकारी मांगना बेहद महंगा पड़ गया. उन्होंने आरटीआई के लिए करीब 69 हज़ार रुपयों की भारी-भरकम फीस तो चुकाई ही, इसके साथ बदले में उन्हें जो मिला वो भी भारी-भरकम ही था. अनिल कस्वां ने हैफेड से सरसों और गेंहू खरीद को लेकर जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में उन्हें डेढ़ सौ किलो वज़नी 32 हज़ार पन्नों की रिपोर्ट थमा दी गई और वो भी अंग्रेज़ी में.

एक सवाल का जवाब बोरी भर कागजों में

दरअसल तीन से चार किले ज़मीन के मालिक अनिल कस्वां ने हैफेड से सूचना मांगी थी कि सरसों और गेंहू की कितनी खरीद हुई है. उन्होंने पूछा था कि कितने किसानों ने फसल बेची और विभाग के पास किसानों को देने के लिए बजट कब पहुंचा. साथ ही ये जानकारी मांगी कि बैंक में किस खाते में कितने दिनों तक राशि रखी गई या अन्य खातों में रखी गई. इसके लिए अनिल कस्वां ने बाकायदा 68,834 रुपयों की फीस भी अदा की और जब उन्हें जानकारी मिली तो बोरियों में भरकर. इतना ही नहीं उन्होंने जानकारी हिंदी में मांगी थी, लेकिन विभाग ने अंग्रेज़ी में लिखे पन्ने थमा दिए.

32 हज़ार अंग्रेज़ी के पन्नों की बात अलग अनिल कास्वां तो विभाग द्वारा मुहैया कराई गई इस जानकारी पर ही सवाल उठा रहे हैं. वो कहते हैं, जो थोड़ा बहुत जोड़-तोड़कर समझ आया, उससे लगता है कि जानकारी गोलमोल करके दी गई है.

अनिल के मुताबिक, वो अपनी फसल बेचने मंडी गए थे, लेकिन उन्होंने वहां देखा कि फसल खरीद में अनियमितता बरती जात रही है. उन्होंने घोटाले को उजागर करने के लिए आरटीआई का सहारा लिया. अनिल बताते हैं कि अर्जी दायर करने के बाद अधिकारियों ने उन पर समझौता करने का दबाव भी बनाया.

(न्यूज18 के लिए नकुल जसूजा की रिपोर्ट)

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