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1984 Riot: इंदिरा गांधी की हत्या, सिख दंगा और इंसाफ...जानिए इन 34 साल में क्या हुआ?

भले ही सज्जन कुमार को दंगों के बाद 34 साल का वक्त गुजरने के बाद सजा सुना दी गई हो लेकिन 186 मामलों के आरोपी या पीड़ितों की मौत हो चुकी है

Updated On: Dec 17, 2018 04:07 PM IST

FP Staff

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1984 Riot: इंदिरा गांधी की हत्या, सिख दंगा और इंसाफ...जानिए इन 34 साल में क्या हुआ?

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगों के मामले में लोअर कोर्ट का फैसला पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को आज उम्रकैद की सजा सुना दी है. साथ ही सज्जन पर 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. इसके अलावा हाईकोर्ट ने बलवान खोखर, कैप्टन भागमल और गिरधारी लाल की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है. जबकि पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा बढ़ाते हुए 10-10 साल कर दी. बता दें कि इस मामले में 650 से ज्यादा केस दर्ज किए गए थे जिनमें से 268 मामलों की फ़ाइल अब गुम हो चुकी हैं.

सिख संगठनों, जांच आयोग की रिपोर्ट्स और गैर अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली, कानपुर, राउरकेला और देश के अन्य शहरों में दिन दहाड़े 15,000 सिखों की हत्या कर दी गई थी. अकेले दिल्ली में ही दिन दहाड़े 6 से 7 हजार निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई थी. 3200 से अधिक दंगा पीड़ितों के परिजन आज भी इंसाफ की राह देख रहे हैं. इस दंगे से प्रभावित परिवारों की संख्या 8000 से भी ज्यादा है.

दिल्ली में क्या हुआ: रिपोर्ट के मुताबिक, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भीड़ सड़कों पर उतर आई और 'खून के बदले खून' का नारा लगा रहा थी. लाजपत नगर, जंगपुरा, डिफेंस कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी, महारानी बाग, पटेल नगर, सफदरजंग एंक्लेव और पंजाबी बाग जैसे मिड्ल और अपर मिड्ल क्लास वाले इलाकों में जमकर लूटपाट और हत्याएं की गईं. यहां दुकानों, घरों और गुरुद्वारों में लूटपाट करने के बाद उनमें आग लगा दी गई. पाकिस्तान से आए सिखों की बस्तियों, स्लम और गावों में हत्या और रेप के साथ लूटपाट और आगजनी की वारदातों को अंजाम दिया गया.

सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए बनाए गए थे 10 आयोग

त्रिलोकपुरी, कल्याणपुरी, मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, नंद नगरी, पालम गांव और शकूरपुर  इलाके में बड़ी संख्या में निर्दोषों को मौत के घाट उतारा गया. घरों में आग लगा दी गई और पुरुषों एवं जवान लड़कों की पीट-पीटकर, तलवार से हत्या कर दी गई. कुछ को जिंदा जलाकर मार दिया गया. बड़ी संख्या में महिलाओं का अपहरण और रेप किया गया.

जांच: सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए 10 आयोग (मारवाह आयोग, मिश्रा आयोग और नानावती आयोग ) और समितियां (जैन-बनर्जी समिति, कपूर-मित्तल समिति) बनाई गईं. दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया था, जिससे करीब 60 केस फिर से खोले गए थे. कांग्रेस के दो बड़े नेता सज्जन कुमार, कमलनाथ, एचकेएल भगत और जगदीश टाइटलर के अलावा पूर्व पार्षद बलवान खोखर, सेवानिवृत्त नौसैनिक अधिकारी कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल का नाम मुख्य आरोपियों के तौर पर सामने आया.

268 मामलों की फाइल गुम

भले ही सज्जन कुमार को दंगों के बाद 34 साल का वक्त गुजरने के बाद सजा सुना दी गई हो लेकिन 186 मामलों के आरोपी या पीड़ितों की मौत हो चुकी है. बिना किसी अदालती सुनवाई के एचकेएल भगत इस दुनिया से चले गए. कई चश्मदीद गवाह और पीड़ित परिवारों के सदस्य भी इस दुनिया में नहीं रहे. मामले की जांच के लिए अब तक गठित 3 आयोग, 7 कमीशन और 2 एसआईटी टीमें ऐसा भी नहीं कर सकीं कि किसी दोषी को सलाखों के पीछे कुछ दिन तक रखा जा सके. 2014 में मोदी सरकार ने पीपी माथुर के नेतृत्व में जांच को आगे बढ़ाया. माथुर के कहने पर 2015 में एसआईटी का गठन किया, जिसने अब तक इस मामले में चल रहे 650 में से 241 केसों को ही बंद कर दिया. अब तक एसआईटी केवल 12 केसों में ही चार्जशीट दाखिल कर सकी है.

सिख संगठनों के मुताबिक सिख विरोधी दंगों के मामले में 650 मामले दर्ज हुए थे. जांच एजेंसियों ने इनमें से कई मामलों को जांच के योग्य नहीं कहते हुए बंद कर दिया जबकि गृह मंत्रालय का कहना है कि 268 मामलों की फाइल गुम हो गई है. गृह मंत्रालय ने 2016 के नवंबर महीने में जानकारी दी कि गुरमुखी या उर्दू भाषा में एफआईआर होने के कारण जांच में विलंब हुआ. 34 सालों तक एफआईआर का अनुवाद नहीं कराया जा सका.

दिल्ली के अलावा हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, एमपी और यूपी में भी बड़े पैमाने पर सिखों की हत्या और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया गया था. लखनऊ, कानपुर, रांची और राउरकेला हिंसा में बुरी तरह झुलसने वाले शहरों में शामिल थे.

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