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शुजात बुखारी को धमकाने वाले ब्लॉग का दावा, इस हत्याकांड में लश्कर का हाथ नहीं

आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने बुखारी की हत्या को अंजाम दिया और हत्या से पहले उन्हें पाकिस्तान से चलाए जा रहे इसी ब्लॉग पर चेतावनी भी दी गई थी

Updated On: Jun 29, 2018 11:21 AM IST

Ishfaq Naseem

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शुजात बुखारी को धमकाने वाले ब्लॉग का दावा, इस हत्याकांड में लश्कर का हाथ नहीं
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पुलिस ने जम्मू-कश्मीर से निकलने वाले अखबार 'राइजिंग कश्मीर' के संस्थापक संपादक शुजात बुखारी की हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है, जिस पर पाकिस्तान से संचालित एक ब्लॉग पर अलग तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली है.

इस सिलसिले में पुलिस की तरफ से बीते गुरुवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने बुखारी की हत्या को अंजाम दिया और हत्या से पहले उन्हें पाकिस्तान से चलाए जा रहे इसी ब्लॉग पर चेतावनी भी दी गई थी. इस ब्लॉग की पहचान kashmirfight.wordpress.com के तौर पर की गई है और पुलिस का कहना है कि ब्लॉग के जरिये शुजात की हत्या से पहले उनके खिलाफ 'डराने-धमकाने से संबधित लेख' पेश किए गए. हत्या से पहले फेसबुक और ट्विटर से शुजात को दी गई धमकी पुलिस ने अपनी जांच में यह भी बताया कि शुजात पर फेसबुक एकाउंट- kadwa such Kashmir और ट्विटर हैंडल- 'Ahmad Khalid' ahmadkhalid@313 के जरिये निशाना साधा गया.

इस संबंध में पुलिस की तरह से जारी बयान में कहा गया, 'जांच और सर्विस प्रोवाइडर्स के सहयोग से इस बात के ठोस सबूत इकट्ठा किए जा चुके हैं कि इस हत्याकांड के पीछे जो लोग हैं, वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं और सोशल मीडिया पर शुजात बुखारी के खिलाफ कंटेंट पाकिस्तान से पोस्ट किए गए.' इसमें यह भी बताया गया कि लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों से जुड़ा आतंकवादी सज्जाद गुल उर्फ अहमद खालिद इस ब्लॉग को अपडेट कर रहा था और फिलहाल वह पाकिस्तान में है.

पुलिस के मुताबिक, इस हमले को लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर नवीद जट्ट ने अंजाम दिया और इस वारदात में उसकी मदद काजीगुंड निवासी मुजफ्फर अहमद उर्फ तल्हा ने की. मुजफ्फर अहमद जनवरी 2018 से आतंकवादी के रूप में सक्रिय है. इसके अलावा, आजाद अहमद मलिक उर्फ 'बिजबेहरा का दादा' के नाम से कुख्यात आतंकवादी की भी इसमें भूमिका रही, जो दिसंबर 2016 से आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय है.

सेंट्रल कश्मीर रेंज के डीआईजी ने बताया कि पाकिस्तान से संचालित होने वाले इस ब्लॉग के आईपी एड्रेस की जांच हुई है. उनका कहना था कि पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े उस शख्स की भी पहचान कर ली है, जो इस ब्लॉग को चला रहा है.

पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद ब्लॉग पर विस्तार से आई प्रतिक्रिया

हालांकि, लश्कर-ए-तैयबा पहले ही इस बात से इनकार कर चुका है कि उसने शुजात बुखारी की हत्या में उसका हाथ है. बुखारी की हत्या के बाद कुछ अलगाववादी नेता शोक-संवेदना व्यक्त करने के लिए उनके (शुजात बुखारी) घर भी गए थे और इस सीनियर पत्रकार की हत्या के विरोध में कश्मीर में बंद का भी आयोजन किया गया. पीडीपी समेत तमाम राजनीतिक पार्टियों ने भी इस हत्या की निंदा की थी. शुजात के भाई सैयद बशरत बुखारी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक और पूर्व मंत्री हैं.

हत्या से जुड़े जांच नतीजों के बारे में जानकारी देने के लिए पुलिस की तरफ से बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद ब्लॉग को अपडेट किया गया. इसमें शुजात बुखारी की हत्या के मामले में उलटे भारत पर जमकर निशाना साधा गया. इसमें कहा गया, 'भारत ने पहले ही इस बात को लेकर कैंपेन शुरू कर दिया है कि वह (भारत) किसी भी मोर्चे पर नियमों का उल्लंघन नहीं कर रहा है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट या मानवधिकार संगठनों की पिछली कुछ रिपोर्ट में बताया गया है. इसके जरिये भारत का मकसद मानवाधिकार उल्लंघनकर्ताओं की सूची से अपना नाम हटाने का है. शुजात बुखारी जैसी घटनाएं सिर्फ भारत के लिए ही अनुकूल हो सकती हैं और वह (भारत) किसी हद तक जा सकता है. साफ तौर पर यह हरकत दिल्ली में बैठी सरकार के इशारे पर भारतीय प्रशासन तंत्र द्वारा की गई है.' इससे पहले इस ब्लॉग पर टिप्पणी की गई थी कि शुजात ने दुबई में हुई एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस जैसी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के अलावा पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के अलगाववादी नेताओं ने भी हिस्सा लिया था.

यह कॉन्फ्रेंस जुलाई 2017 में हुई थी. इसके बाद यूनाइटेड जेहाद काउंसिल (यूजीसी) के मुखिया सैयद सलाहुद्दीन ने इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाली शख्सियतों के बारे में कहा था कि वे 'पेरोल पर काम करने वाले' लोग हैं. कांग्रेस के उपाध्यक्ष जी एन मोंगा ने भी दुबई में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में शिरकत की थी. उन्होंने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में शामिल प्रतिनिधियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के जरिये 'कश्मीर में शांति सुनिश्चित' करने पर जोर दिया था. उन्होंने बताया, 'इस कॉन्फ्रेंस में नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने भी हिस्सा लिया था.'

'कश्मीर को निजी फायदे के लिए सीढ़ी बनाया जाता है'

kashmirfight.wordpress.com के ब्लॉगर ने डराने-धमकाने वाले कंटेंट पेश करने के आरोपों पर भी विस्तार से प्रतिक्रिया जताई है. इसमें कहा गया है, 'कब्जे के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की शुरुआत के बाद हथियारों से लैस संगठनों से इतर भी लोगों और इकाइयों ने भारत के इस कब्जे से मुक्ति के लिए हरमुमकिन कोशिश की और इस मकसद के लिए अपने हाथ में बंदूक उठाने के बजाय अलग रास्ता अख्तियार किया. इस तरह की कोशिश करने वाले लोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्रों, हर प्रोफेशनल पृष्ठभूमि से थे. हालांकि, इनमें एक चीज कॉमन थी और अब भी है. वह यह कि वे कश्मीर पर इस तरह के कब्जे से मुक्ति चाहते हैं. हालांकि, इस पूरे विवाद ने ऐसे लोगों का समूह भी तैयार किया, जिन्होंने कश्मीर विवाद को अपने निजी लाभ और सफलता के लिए सीढ़ी की तरह माना. उन्होंने अपनी जिंदगी कुर्बान करने वालों के साथ विश्वासघात कर पाखंडपूर्ण तरीके से अपनी निजी सफलता की राह अपनाई.'

ब्लॉग में कहा गया कि कुछ लोग निजी फायदे के लिए कश्मीर को सीढ़ी बना रहे ब्लॉग के मुताबिक, 'भारत ने कभी भी किसी मध्यस्थ पर भरोसा नहीं किया, जबकि इनमें कई ऐसे थे, जिन्होंने भारत की बेहतरी के लिए अपना सारा वक्त दिया. इसके बावजूद उसके (भारत के) पास भरोसे का संकट था और अब भी है. अगर आप कश्मीर के इतिहास पर नजर डालेंगे, तो बिना कोशिश के इस बात को समझा जा सकता है कि भारतीय पक्ष के प्रतिनिधियों (भारतीय राजनेता और वहां की सरकारों) ने उनके साथ किस तरह का बर्ताव किया, जो उनके करीब थे. और विडंबना यह है कि भारतीय-कश्मीर समर्थक लोगों को इन सब कुछ के बारे में मालूम होने के बावजूद ऐसे लोगों की वफादारी उसी पक्ष (भारत) की तरफ है और इनमें से ज्यादातर लोगों की दिलचस्पी सिर्फ निजी लाभ में है और वे कश्मीर को अपनी निजी फायदे और अपने हिसाब से बेहतर भविष्य के मकसद की खातिर सीढ़ी बनाने की कोशिश करते हैं.

'ऐसा नहीं है कि सबकी दिलचस्पी सिर्फ निजी हितों में है, लेकिन वे जानबूझकर या अनजाने में कश्मीर मसले के बजाय भारतीय हितों के पक्ष में काम कर जाते हैं. शुजात बुखारी की हत्या जैसी घटना का कोई भी बेहद आसानी से विश्लेषण कर सकता है. जाहिर तौर पर उनकी मौत से किसी अन्य के मुकाबले भारत के हितों की ज्यादा पूर्ति होती है. भारत इस घटना का ठीकरा पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों पर फोड़ने को लेकर आमादा है और दिलचस्प बात यह है कि किसी ने भी उसकी जांच के इस रास्ते पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं की.'

'पुलिस ने मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?'

ब्लॉगर का कहना था, 'पहली नजर में ही उन्होंने (पुलिस ने) सीधा किसी खास संगठन को क्यों दोषी ठहराया? पुलिस को कैसे पता चला कि घटना के वक्त इसे अंजाम देने के लिए कौन-कौन मौजूद थे? जरा इस कैंपेन पर गौर किया जाए कि किस तरह से पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने इस तरह का माहौल तैयार कर दिया कि निश्चित तौर पर फलां-फलां लोग ही इसमें शामिल थे? अगर उन्हें लगा कि ब्लॉग या ब्लॉग का लेखक इस तरह की गतिविधि में शामिल है, तो ठीक उसी वक्त उन्होंने ब्लॉग के खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों नहीं की? अगर शुजात बुखारी को खतरा था, तो उनकी तरफ से (भारतीय तंत्र) इस शख्स को पर्याप्त सुरक्षा कवर क्यों नहीं मुहैया कराया गया?'

'जाहिर तौर पर ऐसे कई सवाल हैं, जो इस पक्षपातपूर्ण जांच के बारे में संदेह का माहौल पैदा करते हैं. दिल्ली की हुकूमत से साफ निर्देश है कि जांच के तहत किसी खास संगठन के खिलाफ आरोप तय किया जाना चाहिए. साथ ही इस बात को लेकर भी निर्देश है कि इसी आधार पर जनता के बीच राय बनाई जानी चाहिए.'

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