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झारखंडः मदर टेरेसा की संस्था पर लगा बच्चों को बेचने का दाग

‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की ओर से संचालित संस्था ‘निर्मल हृदय’ की संचालिका, एक सिस्टर और एक कर्मचारी को बच्चा बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है

Anand Dutta Updated On: Jul 06, 2018 11:13 AM IST

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झारखंडः मदर टेरेसा की संस्था पर लगा बच्चों को बेचने का दाग

बीमार, असहाय, गरीबों को सहारा देने के लिए दुनियाभर में जानी जानेवाली मदर टेरेसा की संस्था पर बड़ा दाग लग चुका है. कभी सेवा के लिए उन्हें भारत रत्न, नोबेल पुरस्कार, संत का दर्जा दिया गया, आज उनकी संस्था पर बच्चा बेचने का आरोप लगा है.

झारखंड की राजधानी रांची स्थिति ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की ओर से संचालित संस्था ‘निर्मल हृदय’ की संचालिका, एक सिस्टर और एक कर्मचारी को बच्चा बेचने के आरोप में बुधवार चार जुलाई को गिरफ्तार किया गया है. संस्था की संचालिका सिस्टर कोंसिलिया बाखला, सिस्टर मेरिडियन और कर्मचारी अनिमा को गिरफ्तार कर लिया गया है. बिन ब्याही मां, रेप की शिकार वैसी लड़कियां-महिलाएं जो बच्चा जनने वाली होती हैं, उन्हें ‘निर्मल हृदय’ में रखा जाता है. वैसे बच्चों को तय सरकारी प्रक्रियाओं को तहत लोग अडॉप्ट करते रहे हैं. इन्हीं में छह बच्चों को अब तक अवैध तरीके से बेचा जा चुका है.

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

पुलिस को दिए बयान के मुताबिक सिस्टर कोंसिलिया ने स्वीकारा है कि उसने अब तक छह बच्चों को अवैध तरीके से बेचा है. यह मामला तब खुला जब यूपी के सोनभद्र जिले के ओबरा निवासी सौरभ अग्रवाल और प्रीति अग्रवाल ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडबल्यूसी) के पास शिकायत लेकर पहुंचे कि उन्हें उनका बच्चा वापस नहीं दिया जा रहा है. इस बच्चे को उन्होंने पांच मई को 1.20 लाख में खरीदा था.

एफआईआर में दर्ज जानकारी के मुताबिक गुमला की रहनेवाली एक रेप पीड़िता अविवाहित गर्भवती लड़की यहां रह रही थी. उसने बीते एक मई को रांची सदर अस्पताल में बच्चा को जन्म दिया. इस नवजात को कर्मचारी अनिमा इंदवार ने सिस्टर कोंसिलिया के मिलीभगत से अग्रवाल दंपती को बेच दिया. उस वक्त नवजात चार दिन का ही था. इधर 30 जून को सीडबल्यूसी के सदस्यों ने संस्था का दौरा किया था. इससे डरकर अनिमा ने उसी दिन अग्रवाल दंपति को फोन कर कहा कि बच्चे को अदालत में पेश करना है, उसे लेकर रांची आ जाइए. इसके बाद बच्चे को दो जुलाई अनिमा को दे दिया. तीन जुलाई को बच्चे की जानकारी लेने वह संस्था पहुंचे, जहां उन्हें बच्चे से नहीं मिलने दिया गया. इसके बाद उसी दिन उन्होंने इसकी शिकायत सीडबल्यूसी से की. सूचना मिलते ही चेयरमैन रूपा कुमारी निर्मल हृदय पहुंची. पूरी छानबीन के बाद जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो अनिमा ने स्वीकारा कि उन तीनों ने मिलकर बच्चे को बेच दिया है.

बेचा गया बच्चा किसको दिया जाएगा, यह सीडबल्यूसी तय करेगा

सीडबल्यूसी की चेयरमैन रूपा कुमारी ने बताया कि किसी भी चैरिटी होम में अगर गर्भवती महिला को रखा जाता है तो इसकी जानकारी सीडबल्यूसी को देना जरूरी होता है. लेकिन जिस लड़की की बच्ची को बेचा गया है, न तो उसकी जानकारी संस्था की ओर से दी गई थी, ना ही बच्चा जनने के बाद किसी तरह की जानकारी दी गई. उन्होंने यह भी बताया कि अब यह बच्चा किसे दिया जाएगा, यह सीडबल्यूसी ही तय करेगा. नियम के मुताबिक अब अगर अग्रवाल दंपती को भी बच्चा लेना होगा तो उन्हें भी ऑनलाइन आवेदन करना होगा. उन्होंने यह भी बताया कि निर्मल हृदय संस्था में रह रही 11 लड़कियों को रांची के एक महिला हॉस्टल में शिफ्ट किया गया है. इसमें एक लड़की ने बच्चे को जन्म दे दिया है, दो सदर अस्पताल में भर्ती है. अब इस संस्था को ब्लैक लिस्टेड कर सील कर दिया जाएगा.

बेची जाती रही हैं झारखंड की लड़कियां

कभी मदर टेरेसा ने ही कहा था हर बच्चा प्रभु की सुंदर तस्वीर है. कृपया बच्चों को न मारें, मुझे दे दें. मैं हर उस बच्चे को स्वीकार करूंगी जिसे कोई भी जन्म लेने से पहले मारना चाहता हो. लेकिन झारखंड में अनवरत बच्चों, लड़कियों को बेचने का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है. साल 2017 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड से खरीदी गई लड़कियों को दिल्ली, हरियाणा जैसे जगहों पर बेचा जाता है. कुछ को घर के काम में लगा दिया जाता है तो कुछ को देह धंधे में धकेल दिया जाता है. एक लड़की को पहले झारखंड में बेचा गया, इसके बाद दिल्ली में बेचा गया. वह नौकरानी बनाई गई, जहां उसके साथ लगातार बलात्कार हुआ. जब उसने बच्चा पैदा किया, तो फिर उसके बच्चे को किसी और को बेच दिया गया. साल 2012 से सितंबर 2017 तक झारखंड के आठ जिलों में 506 मामले मानव तस्करी के दर्ज हुए. जबकि कुल 475 लोगों को दलालों के चंगुल से मुक्त करया जा सका है. वहीं पांच सालों में 285 मानव तस्करों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.

इस महीने तीसरी बार निशाने पर मिशनरी संस्था

हाल के दिनों में यह तीसरी मिशनरी संस्था है जिसके ऊपर दाग लगा है. इससे पहले खूंटी जिले के कोचांग गांव में पांच महिलाओं के साथ गैंगरेप की वारदार हुई थी. इस मामले में भी कोचांग चर्च के पादरी को पुलिस ने साक्ष्य छुपाने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है. उसके बाद गोड्डा में पादरी पर एक महिला के यौन शोषण का आरोप लग चुका है. इधर बीजेपी के राज्यसभा सांसद समीर उरांव और विधायक रामकुमार पाहन ने कहा है कि सेवा के नाम पर मिशनरीज संस्थाओं की पोल अब खुलने लगी है. सरकार को ऐसे संस्थाओं पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए, साथ ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. वहीं राज्य पुलिस मुख्यालय ने इसकी जांच हाईकोर्ट के जज के जज से करवाने की सिफारिश सरकार से की है.

कैलाश सत्यार्थी के फाउंडेशन ने दर्ज कराई है आपत्ति

इस मामले पर नोबेल पुरस्कार प्राप्त कैलाश सत्यार्थी की संस्था कैलाश फाउंडेशन के प्रवक्ता अजय सेतिया ने बताया कि साल 2015 में संसद में जिस वक्त जुवेनाइल जस्टिस एक्ट पास हो रहा था, उस समय मिशनरी संस्थाओं ने इस एक्ट का विरोध किया था. मिशनरी की तरफ से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पक्ष रखा था. इसके बाद संस्थाओं ने कहा था कि अब वह अडॉप्शन नहीं करेंगे. उसके बाद यह अवैध तरीके से हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस भी सही तरीके से जांच नहीं कर रही है. जो भी इस मामले में दोषी हैं, उनके खिलाफ जेजे एक्ट की धारा-80 के तहत केस दर्ज होना चाहिए.

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