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शिलॉन्ग हिंसा: CM ने कहा- मामला सांप्रदायिक नहीं, मगर इस दावे में कितनी सच्चाई

मुख्यमंत्री हिंसा की घटनाओं को सांप्रदायिक नहीं मान रहे जबकि स्थानीय लोगों की बात खासी-पंजाबी मनमुटाव की ओर साफ इशारा है

FP Staff Updated On: Jun 04, 2018 10:24 AM IST

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शिलॉन्ग हिंसा: CM ने कहा- मामला सांप्रदायिक नहीं, मगर इस दावे में कितनी सच्चाई

शिलॉन्ग में रविवार को सात घंटे के लिए कर्फ्यू लगाया गया. शहर के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवा भी बंद रही. अभी हाल में एक महिला और बस कंडक्टर के बीच हुए झगड़े के बाद दो समूहों में टकराव हो गया. टकराव बाद में गुटीय संघर्ष में तब्दील हो गया जिसमें हिंसा की कुछ घटनाएं भी सामने आईं. इस बीच, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि हिंसा स्थानीय मुद्दे को लेकर हुई थी और यह सांप्रदायिक हिंसा नहीं थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक खबर में बताया कि रविवार को कर्फ्यू लगने के कुछ ही देर बाद पंजाबी लेन के आसपास के इलाकों में दंगाइयों ने पुलिस और सेना पर हमला किया. एक कैमरामैन पर भी हमला हुआ जिसमें वह घायल हो गया.

पंजाबी लेन में रहने वाले लोगों और खासी समुदाय के सरकारी बस कर्मियों के बीच हुई झड़पों के मद्देनजर शिरोमणि अकाली दल के नेताओं की एक टीम दिल्ली से शिलॉन्ग पहुंची है. अधिकारियों ने बताया कि पूर्वी खासी हिल्स जिले के अधिकारियों ने सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजे तक कर्फ्यू में ढील दी ताकि चर्च जाने वाले लोग रविवार की प्रार्थना में हिस्सा ले सकें.

शिलॉन्ग हिंसा के शिकार एक ट्रक ड्राइवर सतपाल सिंह (50 वर्ष) ने फर्स्टपोस्ट को आपबीती सुनाते हुए कहा, मेरे ट्रक पर पेट्रोल बम फेंका गया और मेरी आंखों के सामने ट्रक जलने लगा. नजदीक के एक ढाबा पर काम करने वाले लोगों की मदद से फायर ब्रिगेड को फोन कर बुलाया. सिंह ने फर्स्टपोस्ट से कहा, यहां मेरा कोई दुश्मन नहीं है. मैं रोज की तरह उस दिन भी काम पर था. पता नहीं मेरे ट्रक पर क्यों हमला किया गया.

शिलॉन्ग के ही एक गैर-जनजातीय व्यक्ति ने कहा, कई मौकों पर खासकर दिवाली और काली पूजा के वक्त, पंडालों पर पेट्रोल बम फेंके जाते हैं. गैर-जनजातीय लोगों और उनके बिजनेस को अक्सर निशाना बनाया जाता है.

इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री संगमा ने रविवार को कहा कि पुलिस को ऐसी सूचना मिली है कि कुछ लोग पत्थरबाजों को फंड दे रहे हैं. इस बीच, यहां के कुछ सिख नेताओं ने उन खबरों को खारिज किया है जिसमें कहा गया कि हिंसा के दौरान गुरुद्वारा पर हमला किया गया या नुकसान पहुंचाया गया.

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री संगमा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि ‘समस्या एक खास इलाके में एक खास मुद्दे को लेकर हुई. दो समुदाय इसमें शामिल थे लेकिन यह घटना सांप्रदायिक नहीं थी.’ उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी संगठनों और राज्य से बाहर के मीडिया ने झड़पों को सांप्रदायिक रंग दिया.

संगमा ने कहा कि हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए ज्यादातर लोग पूर्वी खासी हिल्स जिले से बाहर के थे. शिलांग पूर्वी खासी हिल्स जिले में ही है. उन्होंने कहा कि हिंसा की फंडिंग कर रहे लोगों का पता लगाया जा रहा है.

कैसे भड़का मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को थेम ल्यू मावलोंग इलाके में एक खासी लड़के और एक पंजाबी महिला के बीच झगड़े के बाद मामला गंभीर हो गया. मावलोंग में तकरीबन 350 पंजाबी परिवार रहते हैं.

'पंजाबी लेन' में रहने वाले सन्नी सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पिछली रात वे नहीं सो पाए क्योंकि कुछ ही दूरी पर एक पंजाबी परिवार के घर को आग के हवाले कर दिया गया.

इस इलाके के खासी लोग पंजाबी समुदाय को हटाने की लंबे दिनों से मांग कर रहे हैं. पंजाबी लेन के गुरुद्वारा कमेटी के महासचिव गुरजीत सिंह ने कहा कि हालिया हिंसा एक बड़े एजेंडे का हिस्सा है. सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 1980 से वो (खासी) हमें अवैध निवासी बता रहे हैं और हमें यहां से चले जाने को कह रहे हैं. यहां कई साल से रह रहे हैं और रहेंगे. हमारा यही स्टैंड है. कई नेता किसी और सुरक्षित जगह पर पुनर्वास कराने की बात करते हैं लेकिन हुआ कुछ नहीं. सारी बातें खोखली साबित हो रही हैं.

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