S M L

कांची शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का आज अंतिम संस्कार, अंतिम दर्शन को जुटे लाखों श्रद्धालु

कांची शंकराचार्य का अंतिम संस्कार जिसे वैदिक रीति-रिवाजों में बृंदावन प्रवेश कार्यक्रम भी कहते हैं, गुरुवार दोपहर के आसपास संपन्न होने की संभावना है

FP Tech Updated On: Mar 01, 2018 10:30 AM IST

0
कांची शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का आज अंतिम संस्कार, अंतिम दर्शन को जुटे लाखों श्रद्धालु

कांची शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को श्रद्धांजलि देने के लिए तमिलनाडु के कांचीपुरम में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है. जयेंद्र सरस्वती का बुधवार को निधन हो गया था.

कांची शंकर मठ के प्रबंधक सुंदरेशन ने बताया, लोगों की ओर से जयेंद्र सरस्वती के अंतिम दर्शन के बाद उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. गुरुवार 8 बजे से इस प्रक्रिया का विधिवत शुभारंभ होगा.

सुंदरेशन ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि बुधवार से अबतक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने उनका अंतिम दर्शन किया है. आगे के कार्यक्रम के तहत उनके पार्थिव शरीर को सजाया जाएगा और उन्हें पूर्व के कांची शंकराचार्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामीगल की समाधि के बगल में स्थापित किया जाएगा.

82 वर्ष के जयेंद्र सरस्वती का निधन बुधवार को हो गया था. वे डायबिटीज से ग्रसित थे. पिछले महीने सांस लेने में आई दिक्कत के कारण वे मठ में ही गिर गए थे जिसके बाद उन्हें चेन्नई के रामचंद्र हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.

कांची शंकराचार्य का अंतिम संस्कार जिसे वैदिक रीति-रिवाजों में बृंदावन प्रवेश कार्यक्रम भी कहते हैं, गुरुवार दोपहर के आसपास संपन्न होने की संभावना है.

बेंत की टोकरी में बैठाए जाएंगे शंकराचार्य

शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के पार्थिव शरीर को मुख्य हॉल से निकालकर वृंदावन एनेक्सी ले जाया जाएगा जहां श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती को समाधि दी गई थी. बेंत की एक बड़ी टोकरी में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के पार्थिव शरीर को बैठी हुई मुद्रा में डालकर सात फुट लंबे और सात फुट चौड़े गड्ढे में नीचे उतारा जाएगा.

गड्ढे में दी जाएगी समाधि

समाधि देने से जुड़ी व्यवस्था से जुड़े मठ के एक आला पदाधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘समाधि देने के लिए गड्ढा तैयार है और गुरुवार को पार्थिव शरीर को उसमें नीचे उतारकर उसके ऊपर शालिग्राम रखा जाएगा.’ गड्ढे को जड़ी बूटी, नमक और चंदन की लकड़ी से भर दिया जाएगा. बाद में कबालमोक्षम किया जाएगा जिसमें सिर पर नारियल रखकर उसे प्रतिकात्मक रूप से तोड़ा जाता है. समाधि संस्कार ग्यारह बजे पूरा हो जाएगा. मठ परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम, राज्य के शिक्षा मंत्री के ए सेंगोतैयां और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को श्रद्धांजलि अर्पित की.

हत्या के आरोप से बरी हुए थे जयेंद्र सरस्वती

तमिलनाडु में जयललिता के शासन के दौरान शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को साल 2004 में शंकररमण की हत्या के सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार किया गया था. हत्या के इस मामले में पुडुचेरी की सेशन अदालत ने 2003 में उन्हें ने बरी कर दिया था. श्री वरदराजपेरुमल मंदिर के प्रबंधक ए.शंकररमण की तीन सितंबर, 2004 को धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी.

फोटो रॉयटर से

फोटो रॉयटर से

उन्होंने जयेंद्र सरस्वती और उनके कनिष्ठ विजयेंद्र सरस्वती के खिलाफ मठ प्रशासन में वित्तीय धांधली बरतने के आरोप लगाए थे. विजयेंद्र सरस्वती अब उनके उत्तराधिकारी बनेंगे. शंकररमण की हत्या की साजिश रचने के आरोप में जयेंद्र सरस्वती को दीपावली की पूर्व संध्या पर 11 नवंबर 2004 को गिरफ्तार किया गया था.

आदि शंकराचार्य से क्या है नाता?

शंकराचार्य परंपररा में कांचि कामकोटि पीठ शंकराचार्य की ओर से स्थापित चार मूल पीठों में शामिल नहीं है पर आदि शंकराचार्य का निवास स्थल होने के कारण इसे विशेष सम्मान दिया जाता है. आदि शंकराचार्य ने चार पीठ स्थापित की थीं।. इनमें उत्तर में बदिरकाश्रम में ज्योर्तिपीठ, पश्चिम में द्वारका की शारदा पीठ, पूर्व में पुरी की गोवर्धन पीठ और दक्षिण में कर्नाटक की श्रृंगेरी पीठ.

आदि शंकराचार्य ने अपने निवास के लिए कांची कामकोटि पीठ की स्थापना की थी. कुछ विद्वानों का मत है कि आदि शंकर की जीवनयात्रा का अंत भी यहीं हुआ था जबकि कुछ विद्वान मानते हैं कि आदि शंकराचार्य का निधन केदारनाथ में हुआ था.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi