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ISRO जासूसी केसः महिला ने लगाया आरोप, पुलिस के सीनियर अधिकारी ने पैर पर कुर्सी मारी थी....

मरियम ने बताया पूछताछ करने वालों ने मुझे दो लोगों की तस्वीरें दिखाई थीं और कहा कि क्या मैं उन्हें जानती हूं, जब मैंने कहा कि नहीं तो उन्होंने मुझे इनकी पहचान इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन और इंस्पेक्टर जनरल रमन श्रीवास्तव के रूप में करने को कहा

Updated On: Sep 24, 2018 12:12 PM IST

FP Staff

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ISRO जासूसी केसः महिला ने लगाया आरोप, पुलिस के सीनियर अधिकारी ने पैर पर कुर्सी मारी थी....

इसरो जासूसी के चर्चित मामले में गिरफ्तार की गई मालदीव की महिला मरियम रशीदा ने पूर्व गुजरात डीजीपी आरबी श्रीकुमार पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. आपको बता दैं कि आरबी श्रीकुमार उस समय इंटेलिजेंस ब्यूरो में ज्वाइंट डायरेक्टर पद पर थे. उस महिला ने उन पर 1994 में कस्टडी के दौरान प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. इस मामले में 14 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए रिटायर्ड जज के नेतृत्व में गठित कमिटी को दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

तस्वीरें दिखाकर जबरन पहचान बताने को कहा

मरियम ने टाइम्स ऑफ इंडिया से फोन पर बातचीत की और बताया, 'पूछताछ करने वालों ने मुझे दो लोगों की तस्वीरें दिखाई थीं और कहा कि क्या मैं उन्हें जानती हूं. जब मैंने कहा कि नहीं तो उन्होंने मुझे इनकी पहचान इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन और इंस्पेक्टर जनरल रमन श्रीवास्तव के रूप में करने को कहा. मैंने इन्हें पहचानने से इनकार कर दिया क्योंकि मैं इन्हें नहीं जानती थी तभी वहीं पर खड़े एक अधिकारी ने कुर्सी उठाकर मेरे बाएं पैर पर पटक दी. 24 वर्षों बाद, कुछ दिनों पहले ही जब मैंने उसी अधिकारी को टेलिविजन पर 2013 में इसरो जासूसी मामले में आयोजित एक बहस में शामिल होते हुए देखा तब मैं उन्हें श्रीकुमार के रूप में पहचान पाई.'

श्रीकुमार ने कहा थर्ड डिग्री जैसा कोई टॉर्चर नहीं हुआ

वहीं श्रीकुमार बताते हैं कि उन्होंने मरियम से पूछताछ जरूर की थी लेकिन किसी भी तरह से थर्ड डिग्री जैसा टॉर्चर नहीं किया गया था. उन्होंने कहा कि इन आरोपों के पीछे बीजेपी का हाथ है क्योंकि 2002 गुजरात दंगों के समय मुख्यमंत्री पद पर नरेंद्र मोदी काबिज थे और उनके खिलाफ काम करने की वजह से तोहमतें उन पर लगाई जा रही हैं. श्रीकुमार ने कहा, 'सारे आरोप पूरी तरह से गलत हैं. यदि मैंने उन्हें प्रताड़ित किया तो उन्होंने यह बात कोर्ट में क्यों नहीं बताई थी.'

कोर्ट ने मरियम से नहीं पूछा कोई सवाल

दूसरी तरफ मरियम कहती हैं कि कोर्ट ने उनसे कोई भी सवाल नहीं किया था. उन्हें कई अदालतों में पेश किया गया लेकिन वह समझ नहीं पा रही थीं कि यह सब उनके साथ क्या हो रहा था. वह बताती हैं, 'मैं हमेशा पुलिसकर्मियों से घिरी रहती थी. यहां तक कि जब मेरे पास एक वकील को लाया गया था तो मैं उससे भी बात नहीं कर सकती थी. मुझे जिन अधिकारियों ने प्रताड़ित किया उनके बारे में मैं नहीं जानती थी. हालांकि, रिकॉर्डेड प्रोग्राम दोबारा देखने पर मुझे पता चला कि जिस अधिकारी ने मुझ पर कुर्सी से वार किया था वह श्रीकुमार ही था.'

श्रीकुमार के अनुसार बीजेपी उन्हें बना रही निशाना

श्रीकुमार बताते हैं कि वह उन तमाम अफसरों में से एक थे, जिसने मरियम से पूछताछ की थी. वह कहते हैं, 'मैं अधिकारी सीएम रविंद्रन के साथ था जो बाद में सिक्किम के डीजीपी बन गए थे. उन्होंने कहा- मेरे पास ऐसा कोई कारण नहीं है कि कोई भी चीज छिपाई जाए. गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी के लिए मुश्किलें पैदा करने की वजह से बीजेपी मुझे निशाना बना रही है.' श्रीकुमार समेत तत्कालीन केरल पुलिस के अफसर रहे सिबी मैथ्यूज, एस विजयन और थंबी दुर्गादत्त का नाम लेते हुए मरियम ने कहा कि वह जासूसी कांड में सह आरोपी और मालदीव की महिला फौजिया हसन के साथ संपर्क में थीं. वह दोनों सुप्रीम कोर्ट से लेकर मानवाधिकार के इंटरनैशनल फोरम्स तक का दरवाजा खटखटाएंगी.

मरियम हिरासत में कई बार हुई प्रताड़ित

मरियम ने कहा- 'मुझे कई बार हिरासत में प्रताड़ित किया गया, मैंने चार साल जेल में गुजारे हैं. मैं इन अफसरों को बिना सजा दिलाए नहीं छोड़ सकती, मैं नहीं चाहती मेरी तरह किसी और को इस बुरे दौर से गुजरना पड़े.' आपको बता दें कि मरियम उन 6 आरोपियों में से एक थीं, जिनमें इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन भी थे. इन लोगों पर आरोप था कि इन्होंने भारतीय रॉकेट से जुड़ी गुप्त जानकारियां पाकिस्तान को भेजी थीं. इस पूरे मामले में जांच के बाद सीबीआई ने एक रिपोर्ट बनाई और उसे कोर्ट को सौंपा गया था. इस मामले में कार्रवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि यह पूरा मामला गलत था और बाद में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया.

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