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'अपमान' की वजह से राजीव धवन ने किया वकालत छोड़ने का ऐलान

एक केस की सुनवाई के दौरान धवन और चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली बेंच के बीच कहा-सुनी हो गई थी

Updated On: Dec 11, 2017 03:50 PM IST

FP Staff

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'अपमान' की वजह से राजीव धवन ने किया वकालत छोड़ने का ऐलान

चीफ जस्टिस की फटकार के बाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने प्रैक्टिस छोड़ने का फैसला किया है. उन्होंने इस संबंध में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को लेटर लिखकर अवगत कराया है. अपने लेटर में धवन ने गंभीर आरोप लगाया है.

धवन सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार के वकील हैं.  एक केस की सुनवाई के दौरान धवन और चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली बेंच के बीच कहा-सुनी हो गई थी.

इस केस की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने धवन से कहा था कि उन मुद्दों पर फिर से बहस न करें जिन्हें उनके पक्ष के वकील पहले ही उठा चुके हैं. इसके बावजूद धवन जुबानी बहस करने पर अड़े रहे. इन दौरान कई बार अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल हुआ. यह केस दिल्ली सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच शक्तियों के बंटवारे के विवाद पर चल रहा है.

धवन ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कभी भी ऐसी परिस्थिति का सामना नहीं किया था. उन्होंने कहा कि कोर्ट में हुई 'बेइज्जती' के बाद उन्होंने प्रैक्टिस छोड़ने का फैसला किया है.

चीफ जस्टिस को लिखे लेटर में वकील राजीव धवन ने कहा कि दिल्ली बनाम केंद्र सरकार केस के दौरान अपमान के बाद मैंने कोर्ट प्रैक्टिस छोड़ने का फैसला लिया है.

rajiv dhawan

राम मंदिर मुद्दे पर भी हुई थी तीखी बहस

दरअसल, इससे एक दिन पहले भी 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मुद्दे पर सुनवाई हुई थी. इस दौरान वहां कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन और दुष्यंत दवे सहित अनेक वरिष्ठ वकील मौजूद थे. ये वकील केस की सुनवाई जुलाई 2019 तक टालने का अनुरोध करते हुए ऊंची आवाज में दलीलें पेश कर रहे थें. राजीव धवन ने तो वॉकआउट तक की धमकी दे डाली थी.

धवन ने कहा था कि वर्तमान चीफ जस्टिस को राम मंदिर मुद्दे पर अंतिम सुनवाई की कार्रवाई अभी नहीं शुरू करनी चाहिए क्योंकि वे 3 अक्टूबर, 2018 तक ये सुनवाई पूरी नहीं हो पाएगी और चीफ जस्टिस का कार्यकाल खत्म हो जाएगा.

इस टिप्पणी के बाद चीफ जस्टिस समेत सुप्रीम कोर्ट के कई जजों ने वकीलों को अपनी सीमा में रहने को कहते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी.

कोर्ट ने कहा था कि अदालत में सुनवाई के दौरान धौंस जमाने और ऊंची आवाज में बोलने वाले वकीलों के आचरण को शर्मनाक बताया था. साथ ही कहा था कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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