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भाई को मलाईदार पद दे विवादों में फंसी मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती

महबूबा मुफ्ती के मामा सरताज मदनी के बेटे सैयद अरुत मदनी का 37 साल की उम्र में खादी ग्राम उद्योग में चयन हो गया है

Updated On: Feb 25, 2018 06:14 PM IST

FP Staff

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भाई को मलाईदार पद दे विवादों में फंसी मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती

जम्मू कश्मीर के खादी ग्राम और उद्योग बोर्ड में अपने चचेरे भाई सैयद अरुत मदनी की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती विवादों में घिरती जा रही हैं. दरअसल इस मामले में केवीआईबी भर्ती परिक्षा के नियंत्रक और राज्य के विधि सचिव अब्दुल माजिद भट की एक चिट्ठी सामने आई है. सीआईडी को लिखी इस चिट्ठी में भट ने केवीआईबी भर्ती परिक्षा में धांधली के संकेत दिए थे.

न्यूज़18 को मिली चिट्ठी में भट ने सीआईडी से केवीआईबी भर्ती परिक्षा की गहनता से जांच की मांग की है. उन्होंने परिक्षा में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की बात करते हुए किसी खास शख्स को फायदा न पहुंच जाने की बात कही है. भट ने परिक्षा के दौरान कुछ अनुचित साधन अपनाए जाने का भी जिक्र किया है.

महबूबा मुफ्ती के भाई 37 साल की उम्र में बने एक्जिक्यूटिव ऑफिसर

भट की यह चिट्ठी ऐसे वक्त पर सामने आई है जब महबूबा मुफ्ती के मामा सरताज मदनी के बेटे सैयद अरुत मदनी का 37 साल की उम्र में खादी ग्राम उद्योग में चयन हो गया है. महबूबा के भाई केवीआईबी की परीक्षा के बाद सैयद अरुत मदनी बतौर एक्जिक्यूटिव ऑफिसर अप्वॉइंट हुए हैं. इसके बाद कई परीक्षार्थियों ने परीक्षा में धांधली होने का शक जाहिर किया है. और अंक जानने के लिए उन्होंने आरटीआई भी दायर की है.

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एक परिक्षार्थी ने तो परिक्षा में भाई-भतीजावाद के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तक चिट्ठी लिख दी है. हालांकि केवीआईबी के वाइस चेयरमैन पीर मंसूर ने बताया कि भर्ती परिक्षा और नियुक्ती प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया गया है.

सीएम मुफ्ती के करीबी पीर मंसूर ने कहा 'केवीआईबी की परीक्षा के बाद सैयद अरुत मदनी बतौर एक्जिक्यूटिव ऑफिसर अप्वॉइंट हुए हैं. इसके बाद परीक्षा में धांधली होने के शक में कई परीक्षार्थियों ने लिखित परीक्षा और और इंटरव्यू में अपने अंक जानने के लिए आरटीआई फाइल की है.'

उम्मीदवारों की नियुक्ती प्राइवेट रिक्रूटमेंट एजेंसी से करवाई : परिक्षार्थी

साथ ही केवीआईबी परिक्षा देने वाले अन्य परिक्षार्थियों ने कहा कि उम्मीदवारों की नियुक्ति का काम जम्मू कश्मीर सेवा चयन और भर्ती बोर्ड या जम्मू कश्मीर पब्लिक सर्विसेज कमीशन के बजाय एक प्राइवेट रिक्रूटमेंट एजेंसी को दे दिया गया. उनका कहना है कि नॉन गजेटेड पोस्ट की परिक्षाएं और नियुक्ति का अधिकार भी इन्ही संस्थाओं को है लेकिन भर्ती परिक्षाओं में नियमों की अनदेखी की गई है.

इस मामले में केवीआईबी के सचिव राशिद कादरी का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में उनके विभाग की कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने कहा, 'उद्योग मंत्री जो केवीआईबी के चेयरमैन भी हैं, उन्होंने विधि सचिव को परीक्षा नियंत्रण नियुक्त किया था. परीक्षा नियंत्रक ने परीक्षा कराने के लिए एक प्राइवेट एजेंसी से आउटसोर्सिंग की थी.

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