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'जेएनयू में प्रोफेसर बनना है तो जाएं गौशाला'

जेएनयू में प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए जानवरों और बच्चों के नीतिशास्त्र और गौशाला जाने के बारे में सवाल पूछा गया

FP Staff Updated On: Jan 05, 2018 05:19 PM IST

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'जेएनयू में प्रोफेसर बनना है तो जाएं गौशाला'

‘क्या आप कभी गौशाला गए हैं’, ‘क्या आपको जानवरों और बच्चों के नीतिशास्त्र (इथिक्स) के बारे में पता है’, ‘आपने भारतीय चिंतकों के ऊपर विचार क्यों नहीं किया.’

ये कुछ ऐसे अजीबोगरीब सवाल हैं जो जेएनयू में प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति के लिए पूछे गए हैं.

न्यूज18 में छपी खबर के मुताबिक इस तरह के पूछे जाने वाले सवालों का खुलासा दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर द्वारा अपने सहयोगियों को भेजे गए ईमेल से हुआ है. यह ईमेल डीयू के अंग्रेजी विभाग के एक अस्सिटेंट प्रोफेसर द्वारा पिछले साल अक्टूबर में भेजा गया था.

इस ईमेल में प्रोफेसर ने दावा किया है कि ये अजीबोगरीब सवाल उनसे तब पूछे गए जब वे इंटरव्यू के लिए सेलेक्शन कमिटि के सामने पेश हुए, जिसमें जेएनयू के वाइस चांसलर एम. जगदेश कुमार भी थे. इस इंटरव्यू में उन्होंने फ्रांसीसी दार्शनिक जैक्स रैनसिंयर के ‘सौंदर्यवादी शासन’ (एस्थेटिक रिजिम) के विचार के ऊपर अपने शोध के बारे में एक प्रजेंटेशन दिया.

प्रोफेसर ने अपने सहयोगियों को बताया कि 8 मिनट तक चले इस प्रजेंटेशन के दौरान वाइस चांसलर लगातार उन्हें टोकते रहे और बाद में ‘सिर हिलाते हुए’ कहा कि ‘आपको बच्चों और जानवरों के नीतिशास्त्र पर फोकस करना चाहिए.’

'बंकिम नहीं हैं भारतीय चिंतक'

प्रोफेसर के अनुसार जब उन्होंने कहा कि उनका रिसर्च ‘न्यू लिटरेरी हिस्ट्री’ के ऊपर है तो सेलेक्शन कमिटि ने उनसे कहा कि ‘विदेशी विचारकों’ की जगह आपको ‘अपनी परंपरा’ पर ध्यान देना चाहिए. प्रोफेसर के अनुसार जब उन्होंने यह कहा कि उन्होंने बंकिम चंद्र के बांगला उपन्यासों पर भी काम किया है तो सेलेक्शन कमिटि ने उनकी बात को काटते हुए कहा कि उनका मतलब पाणिनी और भर्तृहरि से था. प्रोफेसर ने ईमेल में लिखा है कि बंकिम उनके लिए भारतीय नहीं हैं.

कुछ इसी तरह का अनुभव दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर देवेश बीरवाल का भी है. उन्होंने कहा कि जब वे जेएनयू में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पद के लिए इंटरव्यू देने गए तो सेलेक्शन कमिटि को यह जानने में ज्यादा दिलचस्पी थी कि वे गौशाला गए हैं कि नहीं. इसकी वजह यह थी कि बीरवाल का रिसर्च 'किसान और उनके पास मवेशियों' की स्थिति पर था.

इंटरव्यू में पूछे गए इन सवालों के बारे में जब सेलेक्शन कमिटि के सदस्यों और वाइस चांसलर से स्पष्टीकरण मांगा गया तो किसी ने कोई जवाब नहीं दिया.

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