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बिहार: तुलार्क महाकुंभ का आगाज, तस्वीरों में देखें मनोरम दृश्य

कहते हैं कि बिहार के सिमरिया में देवता स्वयं आकर स्नान करते हैं

Updated On: Oct 18, 2017 07:06 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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बिहार: तुलार्क महाकुंभ का आगाज, तस्वीरों में देखें मनोरम दृश्य

बिहार के बेगूसराय स्थित सिमरिया में तुलार्क महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक इस बार के कुंभ में तकरीबन दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है.

सिमरिया कुंभ एक महीने तक चलेगा और इस दौरान तीन शाही स्नान भी होंगे. इस कुंभ में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की भी संभावना है.

सिमरिया कुंभ को फिर से शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अखिल भारतीय सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ एवं सिद्धाश्रम मां काली धाम के संस्थापक करपात्री अग्निहोत्री स्वामी चिदात्मन जी महाराज का कहना है, 'सिमरिया से बिहार, मिथिला से श्री अवध का जुड़ाव हुआ है. मिथिला और अवध का संबंध अनादिकाल से रहा है. यहां पहला शाही स्नान 19 अक्टूबर को निर्धारित है.' स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने इस मौके पर कहा कि राजा हर्षवर्द्धन के बाद दूसरा नाम सीएम नीतीश कुमार का ही कालजयी स्वर्णक्षारों में अंकित होगा. लोगों की आस्था बढ़ेगी. सर्वधर्मसम्भाव पनपेगा. करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जगेगी.

देवता स्नान करते हैं यहां

वहीं, निवार्णी अखाड़ा हनुमानगढी अयोध्या के महंथ धर्मदास जी महाराज के मुताबिक, सिमरिया देवकुंभ है. जहां देवता आकर स्नान करते हैं. इसके बाद भक्तगण स्नान करते हैं. देवलोक और पृथ्वी लोक में ही कुंभ लगता है. सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन सहित जो भी परिवर्तन हुआ है वह बिहार से ही हुआ है.

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पीएम मोदी ने भी इस महाकुंभ की शुभकामनाएं दीं हैं.

भारत और दुनिया के कई देशों में कुंभ मेले को आस्था के सबसे बड़े आयोजन के तौर पर देखा जाता है. वैदिक ग्रंथों में देश में चार स्थानों पर ही कुंभ के आयोजन की बात कही गई है. देश में प्रयाग, हरिद्वार, उज्‍जैन और नासिक में पहले से ही कुंभ का आयोजन होता रहा है. लेकिन, धर्म के जानकारों का एक और तर्क दिया जाता रहा है कि वैदिक काल में देश के 12 स्थानों पर कुंभ होते रहे हैं.

बेगूसराय के सिमरिया धाम पर हो रहे कुंभ की शुरुआत भी इसी कड़ी में एक प्रयास है. इस तुलार्क कुंभ की शुरुआत के बाद बिहार से निश्चित ही एक नई परंपरा की शुरुआत होगी. यह परंपरा आगे चल कर आठ लुप्त हो चुके कुंभों को भी एक बार फिर से पुनर्जीवित करने में काफी मदद करेगी.

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