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तलाक की अर्जी अगर पेंडिंग, तो भी दूसरी शादी मान्य: सुप्रीम कोर्ट

हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 15 की व्याख्या करते हुए बेंच ने कहा कि तलाक के खिलाफ अपील की पेंडेंसी के दौरान दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान तब लागू नहीं होता, जब पक्षकारों ने समझौते के आधार पर केस आगे न चलाने का फैसला कर लिया हो

Updated On: Aug 26, 2018 08:28 PM IST

FP Staff

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तलाक की अर्जी अगर पेंडिंग, तो भी दूसरी शादी मान्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को लेकर बड़ा फैसला दिया है. हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक के खिलाफ दायर अपील के लंबित होने के दौरान महिला या पुरुष में से किसी के भी दूसरी शादी पर रोक है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए फैसले में कहा है कि अगर तलाक की अर्जी लंबित है और दोनों पक्षों में केस को लेकर सहमति है, तो दूसरी शादी मान्य होगी.

अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 15 की व्याख्या करते हुए जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने कहा कि तलाक के खिलाफ अपील की पेंडेंसी के दौरान दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान तब लागू नहीं होता, जब पक्षकारों ने समझौते के आधार पर केस आगे न चलाने का फैसला कर लिया हो.

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया. वर्तमान मामले में तलाक की डिक्री के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान पति ने पहली पत्नी के साथ समझौता करते हुए तलाक वापस लेने की अर्जी वापस दाखिल की थी. इसी दौरान दूसरी शादी कर ली. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी दूसरी शादी को अमान्य करार दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने पति की अर्जी को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया.

दरअसल, दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 31 अगस्त 2009 को पत्नी के पक्ष में फैसला देते हुए में तलाक की डिक्री मंजूर की थी. पति ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी. लेकिन, मामला आगे बढ़ने से पहले ही पति-पत्नी के बीच समझौता हो गया. 15 अक्टूबर, 2011 को पति अपील वापस लेने की अर्जी दाखिल कर दी. लेकिन, जब ये केस पेंडिंग था, उस समय ही पति ने दिसंबर 2011 में दूसरी शादी कर ली.

इस शादी के बाद दूसरी महिला ने शादी को कोर्ट में चुनौती दे दी. उसने अपील में कहा, तलाक की अपील पेंडिंग के दौरान शादी हुई है, इसलिए इसे शून्य करार दिया जाए. निचली कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी. हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे मान लिया और शादी को शून्य घोषित कर दिया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और वहां पर हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया गया.

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