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सीलिंग की वजह से दिल्ली में व्यापारी बेहाल, कर्मचारियों पर गहराया रोजी-रोटी का संकट

दिल्ली में पिछले एक महीने में लगभग 1 हजार से भी ज्यादा दुकानें सील कर दी गई हैं. कई कारोबारियों के यहां काम करने वाले लोगों के घरों में चूल्हा जलना बंद हो गया है.

Updated On: Jan 31, 2018 06:43 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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सीलिंग की वजह से दिल्ली में व्यापारी बेहाल, कर्मचारियों पर गहराया रोजी-रोटी का संकट

दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई से कारोबारी वर्ग बेहद परेशान नजर आ रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के व्यापारी वर्गों में एक डर का माहौल कायम हो गया है. लगातार हो रही सीलिंग की कार्रवाई ने व्यापारी वर्गों को सड़क पर आने के लिए मजबूर कर दिया है. लेकिन, बुधवार को दिल्ली के व्यापारियों के लिए थोड़ी-बहुत राहत देने वाली भी खबर आई. सीलिंग के मुद्दे पर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए ठोस कदम उठाने की बात कही है.

एक तरफ जहां केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने सीलिंग को लेकर एक प्लान तैयार करने की बात कही है वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी डीडीए और कुछ पक्षकारों को ठोस मास्टर प्लान लाने को कहा है. ऐसा भी कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही सीलिंग की कार्रवाई रोकने के लिए एक अध्यादेश लाने जा रही है.

कुल मिलाकर लगभग एक महीने के बाद और हजार से भी ज्यादा दुकानें टूटने के बाद इस मुद्दे को भुनाने की होड़ शुरू हो गई है. इस होड़ में सभी राजनीतिक दल गंगा नहाना चाहते हैं. इसलिए दिल्ली की सभी राजनीतिक पार्टियों ने इस मुद्दे को अपना प्रमुख हथियार बना लिया है.

मंगलवार को देश के शहरी विकास मंत्री हरदीप पूरी और दिल्ली के एलजी अनिल बैजल के बीच सीलिंग के मुद्दे पर एक मीटिंग हुई. मीटिंग के बाद ही यह फैसला लिया गया कि डीडीए से साथ मिल कर एक प्लान तैयार किया जाए. अगर जरूरत होगी तो केंद्र सरकार अध्यादेश भी ला सकती है.

दूसरी तरफ देश की सबसी बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली में सीलिंग को लेकर डीडीए और कुछ पक्षकारों से जवाब-तलब किया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 5 फरवरी तक सीलिंग को लेकर सभी अर्जियों का निपटारा किया जाए.

प्रतीकात्मक तस्वीर

गौरतलब है कि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से हर रोज सीलिंग को लेकर नई-नई राजनीतिक ड्रामेबाजी देखने को मिल रही हैं. एक ओर जहां सीलिंग से हजारों कारोबारी परेशान हो रहे हैं वहीं राजनीतिक सियासत चमकाने वाले अपनी सियासत को भी चमकाने से बाज नहीं आ रहे हैं. राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप और राजनीति करने वालों की महत्वाकांक्षाएं लगातार परवान चढ़ रही हैं.

दिल्ली में राजनीतिक जमीन तलाश रही सभी पार्टियां खासकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी तरह-तरह के हथकंडे अपना रही हैं. पिछले कुछ महीनों से ‘आप’ के ग्राफ काफी कमी आने से पार्टी के अंदर एक अजीब बेचैनी देखने को मिल रही है. सीलिंग के मुद्दे के बीच दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एक नई चाल दी है.

अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट कर कहा है, ‘सीलिंग के जरिए बीजेपी दिल्ली में रिटेल मार्केट में एफडीआई लाना चाह रही है, लेकिन मुझे आशा है कि ऐसा नहीं होगा.’

अरविंद केजरीवाल सीलिंग के मुद्दे को अब अपना प्रमुख राजनीतिक हथियार के तौर पर दिल्ली में इस्तेमाल करना चाह रहे हैं. इसलिए केजरीवाल ऐसे बयान दे रहे हैं जो कारोबारियों के बीच सहानुभूति पैदा कर रहे हैं. अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को भी कहा था कि दिल्ली के एलजी अनिल बैजल अगर चाह लेंगे तो सीलिंग 24 घंटे के भीतर बंद हो सकती है.

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही सीलिंग के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल और बीजेपी नेताओं के बीच बवाल कट चुका है. बीजेपी नेताओं और आप नेताओं के बीच बवाल थाने तक पहुंच गई है. बीजेपी नेताओं ने आप के चार विधायकों पर मारपीट का मामला दर्ज कर दिया है.

दिल्ली में व्यापारी वर्ग सीलिंग के मुद्दे पर लामबंद होना शुरू कर दिए हैं. राजनीतिक पार्टियों के द्वारा भले ही निकटता बनाने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन व्यापारियों ने अब अपना रास्ता अलग कर लिया है. राजनीतिक पार्टियों की इस लड़ाई में कूदने के बाद भी व्यापारी वर्ग को कई राहत मिलती नहीं दिख रही है. ऐसे में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री(सीटीआई) ने बुधवार को एक बार फिर से व्यापारियों की महापंचायत बुलाई है.

दिल्ली में बुधवार हो रही महापंचायत में दिल्ली के लगभग 600 से ज्यादा ट्रेड एसोसिएशनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि हम लोगों ने हर जगह जा कर देख लिया है कुछ नहीं हुआ. अब हमलोग खुद आगे की लड़ाई की रूपरेखा तैयार करेंगे.

सीलिंग का भूत दिल्ली में सभी पार्टियों को अब डराने लगा है. 2006 में भी शीला दीक्षित के कार्यकाल में सीलिंग की शुरुआत हुई थी. जिसे बाद में मास्टर प्लान बनाने तक रोक दिया गया था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देश पर पिछले लगभग एक महीने से दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई चल रही है.

दिल्ली के पॉश इलाकों से शुरू हुई सीलिंग की यह कार्रवाई अब दिल्ली के दूसरे इलाकों में भी शुरू कर दी गई है. दिल्ली की तीन बड़ी राजनीतिक पार्टियां आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी व्यापारियों को लामबंदी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहतीं.

कुल मिलाकर व्यापारियों के लिए अब करो या मरो की स्थिति पैदा हो गई है. दिल्ली में पिछले एक महीने में लगभग 1 हजार से भी ज्यादा दुकानें सील कर दी गई हैं. कई कारोबारियों के यहां काम करने वाले लोगों के घरों में चूल्हा जलना बंद हो गया है.

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