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तीन तलाक के अध्यादेश को खारिज करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

कोर्ट ने कहा कि अध्यादेश को लाए हुए दो महीने हो चुके हैं और अध्यादेश सिर्फ 6 महीने के लिए लागू होता तो इसकी कोई जरूरत नहीं

Updated On: Nov 02, 2018 04:44 PM IST

FP Staff

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तीन तलाक के अध्यादेश को खारिज करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में सरकार द्वारा लाए गए तीन तलाक अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि इसमें हस्तक्षेप करना उन्हें जरूरी नहीं लगा. सीजेआई के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने कहा कि अध्यादेश को दो महीने हो चुके हैं और ये छह महीने तक ही चलता है. साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र जल्दी ही होने वाला है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक समस्त केरल जमायत उलेमा नाम के एक मुस्लिम समूह ने याचिका दायर की थी. इसमें तर्क दिया गया था कि अध्यादेश 'संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21' का उल्लंघन करता है और इस कारण से इसे खत्म करने की जरुरत है. उन्होंने कहा था कि यह 'संविधान के अनुच्छेद 123 की अनिवार्य आवश्यकताओं को भी पूरा करने में ये विफल है. इसलिए असंवैधानिक है.' अनुच्छेद 123 केवल 'तत्काल कार्रवाई' की आवश्यकता वाले मामलों में अध्यादेश लाने की बात कहता है.

19 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास करने के कुछ घंटे बाद ही मुस्लिम महिलाएं (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अध्यादेश 2018, को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उस पर हस्ताक्षर कर दिए थे. केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद तीन तलाक बिना किसी रोक टोक के चला आ रहा था. ऐसे में अध्यादेश लाना 'अनिवार्य' था.

अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने 3-2 के मत से तीन तलाक या तालक-ए-बिदत की सदियों पुरानी प्रथा को खत्म करने का आदेश दिया था.

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