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एक गलती भी शशिकला को पड़ सकती है बहुत भारी

शशिकला के पास सिर्फ एक मौका है अगर वह चूक गईं तो पार्टी से उनकी राजनीतिक करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा

Updated On: Feb 06, 2017 08:25 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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एक गलती भी शशिकला को पड़ सकती है बहुत भारी

भ्रष्टाचार के मामले में जब जयललिता को 6 महीनों के लिए जेल जाना पड़ा था तो उन्होंने ओ पन्नीरसेल्वम को अपना उत्तराधिकारी बनाया था.

जयललिता की मौत के बाद भी दोबारा उन्हें ही यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. लेकिन अब एआईएडीएमके के सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से शशिकला को अपना नेता चुन लिया है.

मुमकिन है कि इस घटना से पार्टी के वे लोग असहज होंगे जो शशिकला को पसंद नहीं करते थे . लेकिन इस घटना का एक दूरगामी राजनीतिक संकेत भी हैं.

जयललिता की मौत के बाद जब ओ पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया गया तो सियासी गलियारों में यह अटकलें तेज हो गईं कि बीजेपी इस मौके का फायदा उठा सकती है.

पन्नीरसेल्वम एक ऐसे नेता थे जिनकी भूमिका स्टेपनी से ज्यादा नहीं रही है. ऐसे में बीजेपी उम्मीद कर रही थी कि वे एआईएडीएम को आसानी से अपने पाले में कर सकती है.

शशिकला के मुख्यमंत्री बनने से बीजेपी का यह समीकरण निश्चित तौर पर गड़बड़ा गया है.

वरिष्ठ पत्रकार माधवन नारायणन कहते हैं, 'जयललिता की मौत के बाद जब बीजेपी नेता वेंकैया नायडू तमिलनाडु गए थे तो उन्होंने पन्नीरसेल्वम के नाम पर सहमति जताई थी. ऐसे में शशिकला का सीएम पद पर कब्जा कर लेना बीजेपी के लिए खुली चुनौती है.'

राजनीतिक महत्वाकांक्षा बड़ी लेकिन अनुभव बिल्कुल नहीं

नारायणन ने कहा, 'जयललिता एक मंजी हुई नेता थीं. एक तरफ वे अपने भाषणों से आम जनता का मन मोह लेती थीं तो दूसरी तरफ उनकी प्रशासकीय काबिलियत सरकारी कामकाज में साफ नजर आता था.'

'कॉन्वेंट में पढ़ी लिखी जयललिता बखूबी दोनों पक्षों को संभाल रहीं थीं. लेकिन यह खूबी शशिकला में नजर नहीं आती है.'

शशिकला और जयललिता

शशिकला और जयललिता

शशिकला को भले ही एआईएडीएमके के सभी विधायकों का साथ मिल गया हो लेकिन उनके राजनीतिक सफर में कई अड़चनें भी हैं.

शशिकला ने इससे पहले कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा. यहां तक कि एक बार जयललिता ने सार्वजनिक मंच पर यह कहा था कि जयललिता के साथ उनके संबंध राजनीतिक नहीं बल्कि निजी हैं.

ऐसे में जयललिता का पार्टी पर किया गया यह कब्जा अनौपचारिक है.

चौतरफा चुनौतियों से घिरी हैं शशिकला

राजनीति से सीधे तौर पर कोई नाता नहीं रखने वाली शशिकला के अचानक एआईएडीएमके की मुखिया बन जाने से निश्चित तौर पर पार्टी के भीतर कुछ लोग नाराज होंगे.

लेकिन उन्हें यह पता है कि फिलहाल शशिकला के खिलाफ सिर उठाने का सही वक्त नहीं आया है.

वहीं दूसरी तरफ शशिकला को डीएमके के वर्किंग प्रेसिडेंट एम के स्टालिन से कड़ी टक्कर मिलेगी. स्टालिन का कहना है कि शशिकला लोगों की इच्छाओं के विरुद्ध सीएम बन रही हैं.

शशिकला के सामने तीसरी चुनौती बीजेपी की तरफ से है. पन्नीरसेल्वम के सीएम बनने तक बात ठीक थी लेकिन शशिकला का सीएम बनना बीजेपी को चुनौती लग सकती है.

ऐसे में बीजेपी शशिकला को परेशान करने की हर मुमकिन कोशिश कर सकती है. ऐसे में कुछ पुरानी फाइलें खुल जाएं तो हैरानी की कोई बात नहीं होगी.

तमिलनाडु के मौजूदा हालात पर नजर डालें तो जल्लीकट्टू के समर्थन में जो जनसैलाब उमड़ा है बीजेपी उसे अपने पाले में कर सकती है.

इस मामले में नारायणन का कहना है, 'फिलहाल जल्लीकट्टू एक सांस्कृतिक आंदोलन है. अगर इस आंदोलन को बीजेपी राजनीतिक मोड़ दे पाती है तो राज्य में उसका दबदबा निश्चित तौर पर बढ़ जाएगा.'

शशिकला के पास पार्टी पर कब्जा करने का कोई नैतिक आधार नहीं है. ऐसे में तीसरी चुनौती उन्हें जयललिता की भतीजी दीपा जयकुमार से मिल सकती है.

दीपा को जयललिता की पुरानी सहयोगी शशिकला प्रभा का सहयोग मिल रहा है. इसके अलावा कई छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियां हैं जो शशिकला के राजनीतिक सफर में मुश्किलें पैदा कर सकते हैं.

एक चूक भी पड़ेगी भारी

जयललिता की मौत के बाद जिस तरह शशिकला उनकी जगह ले रही हैं, ठीक इसी तरह जयललिता ने भी एमजीरामचंद्रन की मौत के बाद उनकी जगह लेने की कोशिश की थी.

उस वक्त पार्टी के ज्यादातर लोग एमजीआर की पत्नी वी एन जानकी के पक्ष में थे. लेकिन जयललिता ने चुनाव जीतकर सबको चुप करा दिया और पार्टी पर पूरी तरह कब्जा कर लिया.

लेकिन अब देखने यह है कि कभी किसी चुनाव में शामिल नहीं होने वाली शशिकला क्या जयललिता की तरह धमाकेदार ढंग से अपनी जगह हमेशा के लिए पक्की कर पाती हैं या नहीं.

शशिकला के पास सिर्फ एक मौका है अगर वह चूक गईं तो पार्टी से उनकी राजनीतिक करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा.

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