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Casting Couch: सरोज जी! मजबूरी का फायदा उठाना सही कब से हो गया?

कास्टिंग काउच लड़कियों के कन्सेंट से होता है, कहकर उन्होंने रेप जैसी स्थिति को नॉर्मलाइज करने की कोशिश की है

Tulika Kushwaha Tulika Kushwaha Updated On: Apr 24, 2018 05:33 PM IST

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Casting Couch: सरोज जी! मजबूरी का फायदा उठाना सही कब से हो गया?

एक सीधा सा सवाल- अगर आपको पैसे या नौकरी का लालच देकर आपसे गलत काम करवाया जाए या आपका फायदा उठाया जाए, तो ये कितना जायज है? अगर ये जायज नहीं है तो फिल्में दिलाने के लिए कास्टिंग काउच को सही कैसे ठहराया जा सकता है? कोरियोग्राफर सरोज खान ने यही किया है. आज तक बॉलीवुड में कास्टिंग काउच दबी जुबान विरोध की चीज थी लेकिन अब सरोज खान ने 'फिल्म इंडस्ट्री रेप करके छोड़ तो नहीं देती है न' का तर्क देकर लोगों का अपने काम से काम रखने की सलाह दी है.

सरोज खान ने जो कहा है वो हैरान करने वाला है. गले से नीचे न उतर पाने वाले उनके इस बयान में कई स्तरों पर गड़बड़ियां है लेकिन पहले आपको ये जरूर जानना चाहिए कि उन्होंने कहा क्या है.

बॉलीवुड की टॉप की कोरियोग्राफर और तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं सरोज खान ने मंगलवार को एक प्रोग्राम में फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के साथ होने वाले यौन शोषण और कास्टिंग काउच के मुद्दे पर कहा, 'ये बाबा आदम के जमाने से हो रहा है. हर लड़की के ऊपर कोई न कोई हाथ साफ करने की कोशिश करता है. सरकार के लोग भी करते हैं. तुम फिल्म इंडस्ट्री के पीछे क्यों पड़े हो? वो कम से कम रोटी तो देती है. रेप करके छोड़ तो नहीं देती.'

इसके बाद उन्होंने कहा कि 'ये लड़की के ऊपर है कि तुम क्या करना चाहती हो. तुम उसके हाथ में नहीं आना चाहती तो नहीं आओगी. तुम्हारे पास आर्ट है तो तुम क्यों बेचोगी अपने आप को? फिल्म इंडस्ट्री को कुछ मत कहना, वो हमारा माई-बाप है.'

रोजी-रोटी के बदले शरीर?

मतलब आपने किसी को इस हद तक निराश कर दिया कि उसके सामने अपने सपनों को सच करने का बस एक ही रास्ता दिखाई दे और वो ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो तो उसे इस बात से बिल्कुल शिकायत नहीं होनी चाहिए, उसे एहसान मानना चाहिए कि कम से कम आपने उसे रोजी-रोटी तो दी. वैसे ऐसे कई पेशे हैं जहां देह के बदले में रोजी-रोटी मिलती है, लेकिन क्या हम मान लें कि यही आदर्श स्थिति है? या उन्हें अच्छी जिंदगी का हक नहीं है? या ये मान लें कि ये जायज है?

ऐसे वक्त में जब हर फील्ड से महिलाएं अपने साथ होने वाले यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठा रही हैं, ऐसे में बॉलीवुड की एक जानी-मानी कलाकार से इतनी घटिया बात सुनना गुस्से से भर देता है. सरोज खान ने बॉलीवुड में अपना करियर बनाने का सपना देखने वाली हजारों लड़कियों को फरमान सुना दिया है कि अगर इंडस्ट्री में एंट्री दिलाने के नाम पर उन्हें कास्टिंग काउच का सामना करना पड़े तो वो इसके लिए तैयार रहें क्योंकि उनका रेप करके उन्हें छोड़ नहीं दिया जाएगा, उन्हें रोजी रोटी दी जाएगी.

(फोटो: फेसबुक से साभार)

(फोटो: फेसबुक से साभार)

कास्टिंग काउच और रेप में कितना फर्क?

कास्टिंग काउच लड़कियों के कन्सेंट, उनकी सहमति से होता है, कहकर उन्होंने रेप जैसी स्थिति को नॉर्मलाइज करने की कोशिश की है. फर्क बस इतना है कि यहां जबरदस्ती नहीं की जाती, बल्कि सामने वाले को मजबूर किया जाता है.

वैसे हर रोज फिल्म इंडस्ट्री में अपने सपनों को बोझ लेकर पहुंच रही कितनी लड़कियों को कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ता होता होगा, कितने 'डायरेक्टरों', 'प्रोड्यूसरों' के साथ उन्हें समझौता करना पड़ता होगा, और इनमें कितनी लड़कियों को सच में रोजी-रोटी मिल पाती होगी, ये भी अलग ही कहानी है.

आर्ट का तो आपने पहले ही गला घोंट दिया

सरोज खान के बातों से ही निराशा होती है. उनकी बात से ये आशय भी निकलता है कि रोजी-रोटी के लिए अपनी इज्जत के साथ समझौता करने में कुछ गलत नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर तुममें आर्ट है तो तुम क्यों बेचोगी खुद को. मतलब अगर किसी में आर्ट नहीं है तो उसके पास ये एक रास्ता बचता है कि समझौता कर लें लेकिन अगर उसके पास आर्ट नहीं है, तो फिल्म इंडस्ट्री उसे रखेगी ही क्यों? और अगर उसमें आर्ट है तो क्या आप उसे समझौता करने पर मजबूर नहीं करेंगे?

इसके पहले कास्टिंग काउच के कई मामले उठाए जा चुके हैं. और ये बस औरतों के साथ ही नहीं आदमियों के साथ भी होता है. लेकिन इसे जायज ठहरा देना हद दर्जे की असंवेदनशीलता और गैर जिम्मेदाराना रवैया है.

सरोज खान के इस बयान के बाद तो लगता है कि मान लेना चाहिए कि कास्टिंग काउच एक नॉर्मल प्रैक्टिस है और एक्टर बनने की चाह रखने वाले हर शख्स को समझौते करने को तैयार रहना चाहिए.

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