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संत समिति ने राम मंदिर पर सरकार को कानून या अध्यादेश लाने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने कहा था कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की सुनवाई की तारीख पर 'उपयुक्त पीठ' जनवरी के पहले हफ्ते में निर्णय करेगी

Updated On: Nov 04, 2018 08:34 PM IST

FP Staff

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संत समिति ने राम मंदिर पर सरकार को कानून या अध्यादेश लाने का दिया निर्देश

हिंदू संतों के शीर्ष संगठन अखिल भारतीय संत समिति ने रविवार को सरकार को 'निर्देश' दिया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए कानून या अध्यादेश लाया जाए.

समिति के दो दिवसीय सम्मेलन में देश भर से तीन हजार से अधिक संतों ने हिस्सा लिया जिसमें गोरक्षा, गंगा नदी की सफाई और राम मंदिर के निर्माण सहित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया.

संगठन के संरक्षक रामानंद हंसदेवाचार्य ने सम्मेलन के समापन बयान में कहा, 'हम सरकार को निर्देश देते हैं कि वह या तो कानून लाए या अध्यादेश (राम मंदिर निर्माण के लिए).'

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने कहा था कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की सुनवाई की तारीख पर 'उपयुक्त पीठ' जनवरी के पहले हफ्ते में निर्णय करेगी जिसके बाद से राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग तेज होती जा रही है.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को मंदिर निर्माण के लिए दबाव बनाते हुए कहा था कि इससे देश में 'सद्भावना और सौहार्दता' का माहौल बनेगा. राम मंदिर मुद्दे के अलावा अखिल भारतीय संत समिति ने अगले वर्ष आम चुनावों में भाजपा के फिर से जीतने का पक्ष लिया.

अखिल भारतीय संत समिति की ओर से जारी 'निर्देशों' की सूची में कहा गया है, 'हम काफी दुखी हैं कि राम मंदिर मुद्दे पर कोई प्रस्ताव नहीं है लेकिन देश, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के कार्यों से हम संतुष्ट हैं.'

इसने कहा कि लोगों को उन्हें वोट देना चाहिए जो 'गाय, गंगा और गोविंद (भगवान)' की रक्षा करते हैं. संगठन ने गोरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की भी मांग की.

इलाहाबाद का नाम प्रयाग करने को उचित ठहराते हुए संत समिति ने दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करने की भी मांग की. इसने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को जल्द पूरा करने की भी मांग की.

इसने कहा कि भारत में रह रहे अवैध प्रवासियों को वापस बांग्लादेश भेजने के लिए केंद्र सरकार को उस देश पर कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए.

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