S M L

राम मंदिर पर संतों के खुलकर सामने आने के बाद क्या करेगी मोदी सरकार

अखिल भारतीय संत समिति की तरफ से दिल्ली में दो दिनों तक चले संतों के सम्मेलन में अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने को लेकर सरकार से मांग की गई है.

Updated On: Nov 05, 2018 02:54 PM IST

Amitesh Amitesh

0
राम मंदिर पर संतों के खुलकर सामने आने के बाद क्या करेगी मोदी सरकार
Loading...

अखिल भारतीय संत समिति की तरफ से दिल्ली में दो दिनों तक चले संतों के सम्मेलन में अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने को लेकर सरकार से मांग की गई है. समिति के अध्यक्ष जगदगुरु रामानांदाचार्य हंसदेवाचार्य ने इस बाबत धर्मादेश पढ़ कर केंद्र और यूपी की बीजेपी की सरकार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने को कहा. अखिल भारतीय संत समिति के कर्ताधर्ता और अध्यक्ष रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य ने सोमनाथ की तर्ज पर सरकार से राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने को कहा.

संतों के भीतर राम मंदिर के मुद्दे को लेकर तेवर तल्ख थे. लेकिन, सरकार के काम-काज को लेकर कई मुद्दों पर वे संतुष्ट भी दिखे. यानी राम मंदिर मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिशों के बावजूद संतों की उम्मीद भी बीजपी की ही सरकार से दिखी. संतों के सम्मेलन में यही बात सबसे महत्वपूर्ण रही.

जब मंदिर के बदले मस्जिद की बात पर भड़के संत

संतों के सम्मेलन में भले ही राम मंदिर के मुद्दे पर कानून बनाने की मांग की गई लेकिन, उनके भीतर भी इस मुद्दे पर कैसे आगे बढ़ा जाए इसको लेकर एक राय नहीं दिखी. रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष राम विलास वेदांती ने जब मंदिर निर्माण का काम दिसंबर में शुरू होने और उसके बदले लखनऊ में एक मस्जिद बनाए जाने की बात कही तो संतों के भीतर से ही उनका विरोध शुरू हो गया. वेदांती ने सदभावना के नाम पर लखनऊ में मस्जिद बनवाने की बात कही थी जिसके बाद उन्हें इस मसले पर रोका गया.

जैन मुनि गुप्तिसागर ने न्यायपालिका पर ही सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा, ‘न्यायपालिका मंदिर नहीं बनाएगी क्योंकि 70 वर्षों से न्यायपालिका में मंदिर विरोधी लोग बैठे हैं.’

जूना अखाड़ा के स्वामी देवानंद सरस्वती ने कहा, ‘धर्मादेश के पूरा होने तक देश के सभी संतों को सक्रिय रहने की जरूरत है.’ इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि अब हम न्यायालय की प्रतीक्षा नहीं कर सकते. बात चीत का भी रास्ता बंद हो चुका है. न्यायालय फैसला लेना नहीं चाहते.’

चिन्मयानंद ने मंदिर मुद्दे पर संघ और बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर मंदिर पर कोई फैसला नहीं होता, तो, आरएसएस और बीजेपी पर समाज का भरोसा संकट में है.

शीतकालीन सत्र में राम मंदिर बनेगा मुद्दा

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

साधु-संतों की तरफ से राम मंदिर के मुद्दे पर किए गए आह्वान और सरकार को मंदिर निर्माण के लिए कानून या अध्यादेश के रास्ते पर बढ़ने को लेकर संत समाज की मांग के बाद तय है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा. अभी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहा है. उसके बाद संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि शीतकालीन सत्र के दौरान इस मुद्दे पर हंगामा तय है.

बीजेपी के सांसद राकेश सिन्हा की तरफ से इस मसले पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने की बात भी कही गई है. ऐसे में संसद के भीतर तो यह मामला गरमाएगा ही. संसद के बाहर साधु-संतों की तरफ से भी इस मामले को गरमाने की तैयारी होगी.

उधर, विश्व हिंदू परिषद के साथ संतों की उच्चाधिकार समिति की अक्टूबर में हुई बैठक में तय फॉर्मूले के तहत भी दिसंबर तक इस मसले पर देशभर में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है. हर सांसद को राम मंदिर निर्माण को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा, उन पर दबाव बनाया जाएगा. हर राज्य की राजधानी में गवर्नर से मिलकर उनके माध्यम से मंदिर निर्माण को लेकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा. कानून बनाने या अध्यादेश की मांग की जाएगी. उसके बाद संत उच्चाधिकार समिति(जो कि संतों की अखिल भारतीय समिति से अलग है) की तरफ से प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें भी ज्ञापन सौंपा जाएगा.

मतलब संतों की अखिल भारतीय संत समिति हो या फिर संत उच्चाधिकार समिति दोनों की तरफ से माहौल को गरमाने की पूरी कोशिश की जाएगी. लेकिन, उनकी तरफ से सरकार के लिए कितनी मुश्किल खड़ी होगी इसको लेकर संदेह है. दूसरे शब्दों में कहें तो संतों की समिति भले ही आक्रामक अंदाज में मंदिर निर्माण को लेकर माहौल बनाए लेकिन, उनकी तरफ से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे सरकार को किसी तरह की परेशानी होगी. इस बात की झलक दो दिन के संतों के सम्मेलन के बाद मोदी सरकार के बारे में जो कहा गया उससे मिल गई.

मोदी सरकार की तारीफ में कसीदे

संतों की तरफ से केंद्र की मोदी सरकार की तारीफ भी की गई. कहा गया कि इस वक्त देश, धर्म-संस्कृति, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वाभिमान के मसले पर सरकार बेहतर काम कर रही है. दो दिनों तक दिल्ली में चले संत सम्मेलन में साधु-संतों की तरफ से कई तरह के सुझाव आए. किसी ने गुस्से में सरकार को कठघड़े में खड़ा किया तो किसी ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर भी नाराजगी जताई. लेकिन, उम्मीद की किरण भी सबको केंद्र की मोदी सरकार से ही दिखी.

मुंबई में हाल ही में हुई संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दौरान भी यह साफ तौर पर दिख गया कि संघ मोदी सरकार से राम मंदिर मुद्दे पर कानून बनाने की मांग तो करता रहेगा, लेकिन, ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे सरकार परेशान हो. संघ के सरकार्यवाह और संगठन में नंबर दो की हैसियत वाले भैयाजी जोशी की तरफ से जो बयान आया उससे यह साफ भी हो गया.

संघ की तरफ से बयान

Bhaiya ji joshi rss

भैया जी जोशी

भैया जी जोशी ने कानून या अध्यादेश के मसले पर कहा था, ‘ये सरकार का अधिकार है कि कब इस पर विचार करे.राम मंदिर के मुद्दे पर हम सरकार पर दबाव नहीं डाल रहे हैं बल्कि आपसी सहमति से हम इसका हल निकालने की बात कर रहे हैं.’ भैयाजी ने कहा था, ‘कोई भी सरकार सहमति और कानून दोनों के संतुलन से चलती है.’

भैया जी जोशी का बयान सरसंघचालक मोहन भागवत के उस बयान से थोड़ा नरम था जिसमें भागवत ने राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की थी.जब संघ की तरफ से ही सरकार को मोहलत दी जा रही हो, तब संघ परिवार के घटक विश्व हिंदू परिषद हों या फिर साधु-संतों की समिति माहौल बनाने के अलावा ज्यादा कुछ करने के हालत में नहीं होंगे.

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi