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भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष के भाई की मौत के बाद ठाकुरों-दलितों में फिर से टकराव की आशंका

बुधवार को सहारनपुर के रामनगर में महाराणा प्रताप जयंती के दौरान गोली लगने से सचिन वालिया की मौत हो गई

Updated On: May 10, 2018 12:27 PM IST

Vivek Anand Vivek Anand
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष के भाई की मौत के बाद ठाकुरों-दलितों में फिर से टकराव की आशंका

सहारनपुर में भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया की संदिग्ध मौत के बाद पूरे इलाके में तनाव पसरा है. बुधवार को सहारनपुर के रामनगर में महाराणा प्रताप जयंती के दौरान गोली लगने से सचिन वालिया की मौत हो गई. सचिन वालिया की मौत की खबर फैलते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल हो गया. सचिन वालिया के शव को जिला अस्पताल के मोर्चरी में रखा गया है, जहां भीम आर्मी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कब्जा जमा रखा है. भीम आर्मी के कार्यकर्ता शव तक पुलिस को पहुंचने नहीं दे रहे हैं. पूरे इलाके में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं की नारेबाजी, विरोध प्रदर्शन और संदिग्ध मौत को लेकर चल रही अफवाहों की वजह से तनाव पसरा है.

संदिग्ध मौत पर अलग-अलग कहानी

बताया जा रहा है कि बुधवार को रामनगर में मल्हीपुर रोड के राजपूत भवन में महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जा रही थी. इसी दौरान खबर आई कि भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया को गोली लग गई. गोली लगने की घटना के बारे में अलग-अलग जानकारी आ रही है. स्थानीय मीडिया को पुलिस ने जानकारी दी है कि पिस्टल साफ करते वक्त गलती से सचिन वालिया से गोली चल गई और उनकी मौत हो गई. जबकि भीम आर्मी की तरफ से मीडिया को जानकारी दी गई है कि चार बाइकों पर सवार सात-आठ लोगों ने सचिन वालिया को गोली मारी है. ये लोग गोली मारने के बाद नारे लगाते हुए राजपूत भवन की ओर निकल गए.

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पुलिस इस मामले को संदिग्ध मानकर जांच कर रही है. कमल वालिया के परिवार की तरफ से चार लोगों को नामजद किया गया है. इनमें दीपक राणा, शेर सिंह राणा, उपदेश राणा और नागेंद्र राणा के नाम शामिल हैं.

क्या है पूरा मामला?

सहारनपुर के शब्बीरपुर में पिछले साल 5 मई को ठाकुरों और दलितों के बीच हुए जातीय दंगे के बाद से ही इन दोनोंं समुदायों के बीच तनाव है. पिछले साल ये दंगे महाराणा प्रताप जयंती के दौरान निकाले जा रहे जुलूस में हंगामे की वजह से ही हुआ था. जिसके बाद कुछ दलितों के घरों में आग लगा दी गई. घटना में एक ठाकुर और एक दलित समुदाय के युवक की मौत हो गई. घटना के विरोध में हुए दलितों के प्रदर्शन में भीम आर्मी का नाम उछला था.

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इसके बाद अंबेडकर जयंती और महाराणा प्रताप जयंती मनाने को लेकर भीम आर्मी और ठाकुर जाति के लोगों के बीच तनातनी चल रही थी. पिछले दिनों फ़र्स्टपोस्ट से बात करते हुए भीम आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत नौटियाल ने आरोप लगाए थे कि 'स्थानीय प्रशासन ठाकुर जाति के प्रभाव में एकतरफा कार्रवाई करती है. हमें अंबेडकर जयंती मनाने से रोक लिया जाता है लेकिन ठाकुर जाति के लोगों को महाराणा प्रताप जयंती मनाने पर पाबंदी नहीं लगाई जाती. उन्होंने बताया था कि सहारनपुर के देवबंद में प्रशासन ने तनाव की आशंका के चलते अंबेडकर जयंती मनाने पर रोक लगा दी थी. भीम आर्मी ने शांति कायम रखने के लिए प्रशासन की बात मान ली और अंबेडकर जयंती नहीं मनाई. अब हम सहारनपुर में महाराणा प्रताप जयंती मनाने पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन नहीं सुन रहा.'

कमल वालिया ने महाराणा प्रताप जयंती मनाने पर रोक लगाने की मांग की थी

पिछले दिनों भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया ने रामनगर में महाराणा प्रताप जयंती मनाए जाने पर रोक लगाने की मांग को लेकर जिला प्रशासन से मिले थे. उन्होंने तनाव की आशंका के मद्देनजर जयंती पर पाबंदी की मांग का ज्ञापन दिया था. हालांकि इसके बाद भी प्रशासन ने जयंती मनाए जाने की इजाजत दे दी थी. भीम आर्मी इसका विरोध कर रही थी.

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कमल वालिया अपने भाई की मौत के लिए प्रशासन को जिम्मेदार मान रहे हैं. उनका कहना है कि अगर जिला प्रशासन ने उनकी मांग को मानकर महाराणा प्रताप जयंती मनाने की इजाजत नहीं दी होती तो ये घटना नहीं होती.

अब सचिन वालिया की मौत के बाद ठाकुर और दलित समुदायों के बीच टकराव की आशंका बन गई है. सहारनपुर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. शहर के हर इलाके से गुजरने वाली गाड़ियों की चेकिंग की जा रही है. किसी तरह की अफवाह न फैले इसलिए इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई है.

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