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सबरीमला विवाद: बैठक विफल रही, सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने पर अडिग

विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने सरकार पर अड़ियल होने का आरोप लगाया

Updated On: Nov 15, 2018 10:21 PM IST

Bhasha

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सबरीमला विवाद: बैठक विफल रही, सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने पर अडिग

केरल में गुरुवार को सर्वदलीय बैठक सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जारी गतिरोध को खत्म करने में विफल रही है जिसने सबरीमला मंदिर में माहवारी उम्र की महिलाओं को प्रवेश पर पाबंदी हटा दी है.

अधिकारियों ने बताया कि अदालती फैसले पर फिर से प्रदर्शन की आशंका के बीच गुरुवार की अर्धरात्रि से एक हफ्ते तक सबरीमाला में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू रहेगी.

सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश के बाद मंदिर तीसरी बार शुक्रवार शाम को खुलेगा. शीर्ष अदालत के फैसले के बावजूद कोई भी महिला श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते मंदिर में अब तक नहीं जा पायी हैं.

सर्वदलीय बैठक में केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने पर अड़ी रही जिस पर विपक्ष बैठक से चला गया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कुछ सुझाव रखे जिनमें युवतियों की पूजा अर्चना के लिए सभी दिनों के बजाय कुछ दिन तय कर दिये जाएं. इस पर सभी पक्षों को चर्चा करना है.

पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा ने आधार शिविर निलक्कल में संवाददाताओं से कहा कि तीर्थाटन सीजन के लिए सबरीमला और उसके आसपास पिछले उन मौकों की तुलना में सुरक्षा दोगुणी कर दी गई है जब मंदिर पिछले महीने और इस महीने खुला था.

पुलिस के अनुसार महिला पुलिसकर्मियों समेत 15000 से अधिक पुलिसकर्मी इस सीजन के लिए तैनात किये जायेंगे. इस सीजन में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की आशा है.

तीन घंटे तक चली बैठक के बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि उनकी सरकार भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रार्थना के वास्ते सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर को लागू करने के लिए बाध्य है क्योंकि उस पर कोई स्थगन नहीं लगा है.

विपक्ष ने इस बैठक को ढोंग करार दिया. श्रद्धालुओं के राज्यव्यापी प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने यह बैठक बुलायी थी. उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर वर्षों पुराना निषेध समाप्त कर दिया था.

विजयन ने कहा, ‘सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 28 सितंबर के फैसले पर कोई स्थगन नहीं लगाया गया है. इसका मतलब है कि 10-50 साल उम्र की महिलाओं को सबरीमला मंदिर में जाने का अधिकार है.’

कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और बीजेपी के प्रतिनिधि इस अहम बैठक से चले गये.

विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने सरकार पर अड़ियल होने का आरोप लगाया. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पी एस श्रीधरण पिल्लै ने बैठक को समय की बर्बादी बताया.

इस बीच, मंदिर से संबद्ध पंडलाम राज परिवार ने विजयन से कहा कि मंदिर के रीति-रिवाज और परंपराओं के संबंध में उसके रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है और वह युवतियों के प्रवेश के विरुद्ध है.

परिवार के सदस्य शशिकुमार वर्मा और तांत्री (प्रमुख पुरोहित) कंडारारु राजीवारु ने इस मुद्दे पर अलग से हुई बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री के सामने यह राय रखी.

वर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम युवतियों के प्रवेश के विरुद्ध हैं. इस रुख में कोई बदलाव नहीं आया है.’

राजीवारु ने कहा, ‘हम युवतियों से बस सबरीमला नहीं आने की अपील कर सकते हैं.’

मुख्यमंत्री ने उन्हें अदालत के आदेश के संबंध में सरकार की सीमाओं से अवगत कराया. सर्वदलीय बैठक में विजयन ने इस मांग को खारिज कर दिया कि सरकार अदालत से उसके आदेश को लागू करने के लिए समय मांगे क्योंकि कई समीक्षा याचिकाओं पर 22 जनवरी को सुनवाई होने की संभावना है.

उन्होंने कहा कि सरकार यह नहीं कह सकती है कि धार्मिक विश्वास संविधान से ऊपर है.

चेन्निथला ने कहा, ‘मुख्यमंत्री के जवाब के बाद हमने बैठक से चले जाने का निर्णय लिया. बैठक बस ढोंग थी, सरकार किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं थी.’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीत यूडीएफ श्रद्धालुओं के साथ है और सबरीमला में शांति और सद्भाव चाहती है लेकिन सरकार का लक्ष्य तीर्थाटन को ‘नष्ट’ करना है.

उन्होंने कहा कि यह श्रद्धालुओं पर सरकार द्वार युद्ध की घोषणा है. मुख्यमंत्री और सरकार सबरीमला में किसी भी हिंसा या अप्रिय घटना के लिए जिम्मेदार होंगे.

बीजेपी नेता पिल्लै ने आरोप लगाया कि विजयन माकपा प्रदेश मुख्यालय ए के जी सेंटर द्वारा लिखी पटकथा के साथ आए थे और केरल को ‘स्टालिन का रुस’ बनाने का प्रयास चल रहा है.

इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने कहा है कि वह छह अन्य महिलाओं के साथ 17 नवंबर को मंदिर जाएंगी और उन्होंने राज्य सरकार से सुरक्षा मांगी है. कई संगठनों ने कहा है कि वे मंदिर में प्रवेश की युवतियों की किसी भी कोशिश का गांधीवादी तरीके से विरोध करेंगे. मंदिर का गर्भगृह शुक्रवार को शाम पांच बजे खुलेगा.

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