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सबरीमाला: मंदिर में पहली बार दर्शन करने वाली महिलाओं ने ट्विटर पर मचाया धमाल, देखें रिएक्शन

महिलाओं ने मंगलवार को आधी रात से मंदिर की सीढियां चढ़ना शुरू किया और रात 3.45 तक वो दर्शन के लिए पहुंच चुकी थीं

Updated On: Jan 02, 2019 03:07 PM IST

FP Staff

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सबरीमाला: मंदिर में पहली बार दर्शन करने वाली महिलाओं ने ट्विटर पर मचाया धमाल, देखें रिएक्शन

सबरीमाला मंदिर में जिन दो महिला श्रद्धालुओं ने जाकर दर्शन किए, उनके कारनामे ने सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया है. ट्विटर पर इन महिलाओं को खूब तारीफ मिल रही है. दरअसल बुधवार को केरल की दो महिलाओं ने सबरीमाला में भगवान अयप्पा के मंदिर में दर्शन किए.

इन महिलाओं का नाम बिंदु और कनकदुर्गा है. सीपीआई (एमएल) की कार्यकर्ता बिंदु की उम्र 42 साल है और वो कोझीकोड जिले की रहने वाली हैं. जबकि 44 वर्षीय कनकदुर्गा मल्लपुरम जिले की रहने वाली हैं.

महिलाओं ने न्यूज 18 के साथ बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने मंगलवार आधी रात से मंदिर की सीढियां चढ़ना शुरू किया और रात 3.45 तक वो दर्शन के लिए पहुंच चुकी थीं.

कनकदुर्गा ने बताया कि उन्होंने अपनी यात्रा पुलिस सुरक्षा के बगैर पूरी की. इस दौरान किसी भी प्रदर्शनकारी से उनका सामना नहीं हुआ. उन्होंने कहा, 'हम आधी रात तक पंबा पहुंच चुके थे. इसके बाद हम पुलिस स्टेशन भी गए. लेकिन फिर हम बिना पुलिस सुरक्षा के आगे बढ़े.'

इन महिलाओं ने बीते साल भी शनिधनम में जाने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें प्रदर्शन की वजह से वापस जाना पड़ा था. ट्विटर पर इन दोनों महिलाओं के साहस की खूब तारीफ हो रही है.

टी सुधीश नाम के ट्विटर यूजर ने कहा, 'केरल के प्रोगेसिव मूवमेंट के लिए 2019 की बहुत अच्छी शुरुआत हुई है. सबरीमाला में महिलाओं ने प्रवेश किया है, हम कभी भी एकजुट राजनीति में नहीं फंसे और आगे बढ़ते जा रहे हैं.'

रिफत जावेद ने कहा कि बिंदू और कनकदुर्गा को इतिहास रचने के लिए बहुत बहुत बधाई.

प्रियंका ने कहा कि यह भारत के इतिहास के अविश्वसनीय क्षण हैं. 50 साल से कम उम्र की महिलाएं पहली बार अंदर गई हैं. एक छोटे से कदम ने लैंगिग समानता को बढ़ावा दिया है. नारीवादी लोग आनंदित हैं, कितना अच्छा दिन है, कितना अच्छा साल है. जीवित रहने के लिए सब कुछ अच्छा है.

एस आनंदन ने कहा, 'सबरीमाला में जाकर 50 साल से कम उम्र की बिंदू और कनकदुर्गा ने इतिहास रच दिया.

सार्थक धामा ने कहा कि इतिहास रचा जा चुका है. पुरानी धार्मिक रीति-रिवाजों को तोड़ दिया गया. इसी तरह समाज विकास करता है जब वह सिद्धांतों से बाहर आता है.

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