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श्रद्धालुओं और पत्रकारों को सबरीमाला मंदिर में जाने से नहीं रोका जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा कि एक विभागीय जांच उन पुलिस वालों के खिलाफ होनी चाहिए जिन्होंने श्रद्धालुओं की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया है

Updated On: Nov 05, 2018 04:46 PM IST

FP Staff

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श्रद्धालुओं और पत्रकारों को सबरीमाला मंदिर में जाने से नहीं रोका जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
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सबरीमाला मंदिर मामले में केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि श्रद्धलुओं को और पत्रकारों को मंदिर में जाने से नहीं रोका जाना चाहिए. इसी के साथ कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार को मंदिर की रोज की गतिविधियों में दखल अंदाजी नहीं करनी चाहिए.

कोर्ट का ये आदेश ऐसे समय में सामने आया है जब सोमवार को शाम 5 बजे से भगवान अयप्पा के मंदिर के कपाट विशेष पूजा के लिए एक बार फिर खोले जाएंगे.सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दूसरी बार भगवान अयप्पा के मंदिर के कपाट खोल जा रहे हैं.

सबरीमाला मंदिर में 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ पिछले महीने हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एक विभागीय जांच उन पुलिस वालों के खिलाफ होनी चाहिए जिन्होंने श्रद्धालुओं की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया है.

श्रद्धालुओं ने शुरू किया विरोध प्रदर्शन

इस बीच, भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए रविवार शाम को एरुमेली पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. श्रद्धालुओं का आरोप है कि उन्हें पंबा और सनीधनम नहीं जाने दिया जा रहा है.

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक एक श्रद्धालु ने सोमवार को कहा कि हम कल शाम से इंतजार कर रहे हैं. हमें बताया गया था कि हम सुबह 6 बजे यहां से जा सकते हैं. लेकिन अब हमें कहा जा रहा है कि केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट की बसों को रात 12 बजे के बाद ही जाने दिया जाएगा.' श्रद्धालुओं ने कहा कि हम भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए आएं है, कृप्या हमें जाने दें.

हिंदू संगठनों ने लिखी मीडिया संस्थानों को पत्र

इससे पहले हिंदू संगठनों ने तमाम मीडिया संगठनों से इस मामले को कवर करने के लिए महिला पत्रकारों को नहीं भेजने की अपील की थी.

पिछले महीने जब सबरीमला मंदिर 5 दिन के लिए मासिक पूजा के लिए खुला था तो इसकी रिपोर्टिंग करने के लिए आई महिला पत्रकारों से मारपीट और बदसलूकी की गई थी. साथ ही उनकी गड़ियों को भी निशाना बनाया गया और प्रदर्शनकारियों के उपद्रव के कारण उन्हें वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा था.

मीडिया संस्थानों के संपादकों को लिखे पत्र में समिति ने कहा कि 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने से स्थिति और बिगड़ सकती है. इसमें कहा गया है, ‘इस मुद्दे पर श्रद्धालुओं के रुख का समर्थन या विरोध करने के आपके अधिकार को पहचानते हुए हम उम्मीद करते हैं कि आप ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे स्थिति और बिगड़े.’

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