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सबरीमाला के पुजारी बोले- निराश हूं लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर

मंदिर के पुजारी कंडारारू राजीवारू ने कहा कि सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निराशजनक बताया है

Updated On: Sep 28, 2018 12:22 PM IST

FP Staff

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सबरीमाला के पुजारी बोले- निराश हूं लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर

सबरीमाला पर महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने पर  सबरीमाला के प्रमुख पुजारी ने निराशा जताई है. लेकिन उन्होंने कहा है कि इसके बावजूद वो ये फैसला स्वीकार करेंगे.

मंदिर के पुजारी कंडारारू राजीवारू ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला ‘निराशजनक’ है लेकिन मंदिर बोर्ड इसे स्वीकार करेगा.

वहीं, त्रावणकोर देवोस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष ए पद्मकुमार ने भी कहा कि कोर्ट के फैसले का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया जाएगा. हालांकि उन्होंने ये भी कहा है कि वो धार्मिक गुरुओं से समर्थन जुटाकर इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पेटीशन दाखिल करेंगे

पद्मकुमार ने कहा कि बोर्ड ने कोर्ट को सूचित किया था कि वे मौजूदा नियम को जारी रखना चाहते हैं लेकिन अब इस फैसले को लागू करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि बोर्ड सुप्रीम के आदेश को लागू करने के लिए कदम उठाएगा लेकिन उन्होंने रिव्यू पेटीशन दाखिल करने की भी बात कही है.

वहीं, अयप्पा धर्म सेना के अध्यक्ष राहुल ईश्वर ने भी कहा कि वे पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे. ईश्वर सबरीमाला के पुजारी दिवंगत कंडारारू महेश्वरारू के पोते हैं. महेश्वरारू का इस साल मई में निधन हो गया था.

महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि अब महिलाएं ये तय कर सकती हैं कि वो जाना चाहती हैं या नहीं. पहले ये धर्म के नाम पर उनपर थोपा गया था. अगर बात समानता और धर्म के अधिकार की आती है, तो समानता की जीत होनी चाहिए.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि केरल के सबरीमाला मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव है और यह परिपाटी हिंदू महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है.

जस्टिस आर. एफ. नरीमन और जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ अपने फैसलों में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस ए. एम. खानविलकर के फैसले से सहमत हुए. न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ने बहुमत से अलग अपना फैसला पढ़ा.

(एजेंसी से इनपुट के साथ)

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