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क्या है S-400 मिसाइल सिस्टम डील और भारत के लिए ये क्यों जरूरी है

भारत और रूस के बीच इस मिसाइल सौदे के बारे में 2015 से बातचीत जारी है. यह मिसाइल सिस्टम इतना बेहतरीन है कि दुनिया के कई देश इसे खरीदना चाहते हैं

Updated On: Oct 04, 2018 11:18 AM IST

FP Staff

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क्या है S-400 मिसाइल सिस्टम डील और भारत के लिए ये क्यों जरूरी है

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज यानि गुरुवार से दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं. इस मौके पर रूस के साथ एस-400 मिसाइल सौदा होगा. इस सौदे पर पूरी दुनिया की नजर है. पीएम मोदी से पुतिन की कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी.

पुतिन के सीनियर विदेश नीति सलाहकार ने बताया, 'रूसी राष्ट्रपति 4 अक्टूबर को भारत के लिए रवाना हो रहे हैं. इस दौरान एस-400 मिसाइल सौदे पर दस्तखत होंगे. यह करार पांच अरब डॉलर का होगा.'

एस-400 मिसाइल सिस्टम को नाटो देशों में एसए-21 ग्रोलर के नाम से जानते हैं. इसे रूस ने बनाया है और इसके जरिए लंबी दूरी का निशाना साधा जा सकता है. इसका सबसे पहले प्रयोग 2007 में हुआ था. यह एस-300 को अपडेट करके बनाया गया है.

भारत और रूस के बीच इस मिसाइल सौदे के बारे में 2015 से बातचीत जारी है. यह मिसाइल सिस्टम इतना बेहतरीन है कि दुनिया के कई देश इसे खरीदना चाहते हैं. इसकी सामरिक क्षमता कई सिस्टम अपडेट होने की वजह से बहुत मजबूत है और पूरी दुनिया में इसकी बहुत डिमांड है.

इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ तीन दिशाओं में मिसाइल दाग सकता है और इसकी मारक क्षमता अचूक है. अगर रेंज की बात करें तो 400 किलोमीटर के दायरे में एक साथ कई मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को इसके जरिए ध्वस्त किया जा सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इसके द्वारा 100 हवाई खतरों को एक साथ भांपा जा सकता है. भारत तीसरा देश है जिसके पास यह डील होने के बाद एस 400 मिसाइल सिस्टम होगा. तुर्की और चीन पहले ही रूस के साथ डील कर चुका है. अब सऊदी अरब भी रूस से इस मिसाइल सिस्टम को खरीदना चाहता है.

भारत के पास इस मिसाइल सिस्टम के होने से देश की रक्षा क्षमता बढ़ जाएगी और चीन-पाकिस्तान की मिसाइलों से बचाव का इंतजाम हो सकेगा क्योंकि चीन पहले ही रूस के साथ यह सौदा कर चुका है और पाकिस्तान ने भारत की रूस के साथ होने वाली मिसाइल डील पर आपत्ति जताई थी.

बीजिंग ने मॉस्को के साथ 2015 में एस-400 सिस्टम की 6 बटालियन खरीदने का सौदा किया था जिसकी डिलीवरी जनवरी 2018 से शुरू हो गई थी. इस डील की वजह से चीन गेमचेंजर की भूमिका में आ रहा था लेकिन भारत के पास मिसाइल रेंज के मामले में कोई विकल्प तलाशने की जरूरत थी. क्योंकि युद्ध के मामले में एस-400 एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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