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रायन मर्डर केस: CBI जांच में कैसे बदल गई प्रद्युम्न हत्याकांड की कहानी

सीबीआई ने वह सीसीटीवी फुटेज भी हासिल कर लिया है, जिसमें आखिरी बार आरोपी छात्र मृतक छात्र प्रद्युम्न के साथ दिखाई दिया था

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Nov 08, 2017 01:38 PM IST

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रायन मर्डर केस: CBI जांच में कैसे बदल गई प्रद्युम्न हत्याकांड की कहानी

गुरुग्राम के रायन स्कूल के छात्र प्रद्युम्न मर्डर केस में सीबीआई को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. सीबीआई ने रायन स्कूल के ही 11वीं के एक छात्र को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए छात्र पर धारा 302 का केस दर्ज किया गया है.

सीबीआई ने वह सीसीटीवी फुटेज भी हासिल कर लिया है, जिसमें आखिरी बार आरोपी छात्र मृतक छात्र प्रद्युम्न के साथ दिखाई दिया था.

गौरतलब है कि आरोपी छात्र ने ही सबसे पहले रायन स्कूल के माली को प्रद्युम्न के बारे में सूचना दी थी. बाद में माली ही वह पहला शख्स था, जो सबसे पहले प्रद्युम्न के पास गया था.

दूसरी तरफ सीबीआई की इस गिरफ्तारी पर सवाल भी उठने लगे हैं. न्यूज 18 से बात करते हुए गिरफ्तार किए गए छात्र के पिता ने कहा है, ‘सीबीआई मेरे बेटे को फंसा रही है. मंगलवार 11 बजे हमलोगों को सीबीआई मुख्यालय में बुलाया गया था. रात 11 बजे तक सीबीआई ने मेरे बेटे से पूछताछ की और रात 12 बजे मुझे बताया जाता है कि आपका बेटा हत्यारा है. आपके बेटे पर हत्या का केस चलेगा. जबकि, उस दिन मेरे बेटे का एग्जाम था. मेरे बेटे ने अच्छे से एग्जाम दिया और उसके कमीज पर भी खून के कहीं कोई निशान नहीं थे.’

गौरतलब है कि इस छात्र से पहले भी सीबीआई लगभग दर्जनों बार पूछ-ताछ कर चुकी है. दो-तीन बार रायन स्कूल में भी बुला कर आरोपी छात्र से पूछताछ किया जा चुका है.

जिस छात्र की गिरफ्तारी हुई है उसकी भूमिका पर सीबीआई को शुरू से ही संदेह था. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक इस छात्र ने हत्या की बात स्वीकार ली है.

बुधवार को ही गिरफ्तार छात्र को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया जाएगा. अब जुवेनाइल कोर्ट तय करेगा कि आरोपी छात्र पर नाबालिग के तहत मामला चले या फिर बालिग के तौर पर. क्योंकि, जुवेनाइल कोर्ट के नियम कायदे में भी अब काफी बदलाव हुए हैं. अगर कोई आपराधिक मामला ज्यादा संगीन हो तो उसे बालिग के तौर पर मानकर भी आगे की कार्रवाई की जा सकती है.

हरियाणा पुलिस ने इस हत्याकांड में उस वक्त एक बस कंडक्टर अशोक को गिरफ्तार किया था. बस कंडक्टर अशोक अभी भी सीबीआई की गिरफ्त में है. सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि मामले में अभी भी सीबीआई ने बस कंडक्टर को क्लीन चिट नहीं दी है.

गौरतलब है कि जब से इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई, उसके बाद जांच की दिशा बिल्कुल बदल गई. लगभग दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की मौत पर सख्त रुख अख्तियार किया था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सीबीआई और सीबीएसई और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था.

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गुड़गांव स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल

हम आपको बता दें कि हरियाणा के गुरग्राम स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल के शौचालय में 8 सितंबर को सात साल के प्रद्युम्न की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी. प्रद्युम्न इस स्कूल में दूसरी कक्षा का छात्र था. प्रद्युम्न की मौत के बाद से ही उसके माता-पिता हत्या की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे थे.

प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर की तरफ से केस की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए उस समय कहा था, ‘प्रद्युम्न की हत्या की जांच के लिए एक आयोग के गठन की मांग की गई है, जिससे स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी फिक्स की जा सके. हमलोगों ने कोर्ट से सीबीआई जांच की भी मांग की थी.’

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने भी फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए पहले कहा था, 'मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा है. इसलिए हम यहां आए हैं. जिस तरह से कोर्ट ने एक्शन लिया है उससे हम खुश हैं.'

प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग लगातार कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने की थी. इस पीठ में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चन्द्रचूड़ भी शामिल थे.

गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में स्कूल के एक कंडक्टर अशोक कुमार को गिरफ्तार किया था. प्रद्युम्न के माता-पिता स्कूल प्रशासन पर मुख्य आरोपी को बचाने का लगातार आरोप लगा रहे थे.

प्रद्युम्न के माता-पिता और रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ रहे कुछ बच्चों के माता-पिता भी बस कंडक्टर अशोक कुमार के कथित इकबालिया बयान को संदेह की नजर से देख रहे थे.

घटना के वक्त फ़र्स्टपोस्ट हिंदी ने बताया था कि प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ गलत काम करते किसी को देख लिया था या फिर उसके साथ कुछ गलत करने की कोशिश की गई हो. इसके बाद ही उसकी हत्या की गई. मृतक बच्चे के माता-पिता और परिजनों का भी उस समय कहना था कि स्कूल का तर्क समझ से परे है कि कंडक्टर ने हत्या कर दी.

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प्रद्युम्न की मां

जिस वक्त प्रद्युम्न की हत्या की गई है, उस वक्त स्कूल में छात्रों का शौचालय में आना-जाना ज्यादा होता है. क्योंकि, उसी वक्त सभी क्लास के बच्चों की टाइमिंग शुरू होने वाली होती है. कुछ बच्चे घर से जाने के बाद स्कूल के शौचालय में जरूर जाते हैं. ऐसे में कंडक्टर के द्वारा चाकू मारने के बाद किसी ने नहीं देखा होगा या आवाज नहीं सुनी होगी, समझ से परे है.

घटना के बाद ही हरियाणा पुलिस ने रायन स्कूल के दो सीनियर अधिकारी को गिरफ्तार किया था. रायन स्कूल के रिजिनल हेड और एचआर हेड अभी भी जेल में बंद हैं.

दूसरी तरफ प्रद्युम्न मर्डर केस में गिरफ्तारी से बचने से के लिए रायन स्कूल मैनेजमेंट के मालिकों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी.

पहले भी फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर के वकील सुशील टेकरीवाल ने सीबीआई जांच में देरी पर सवाल खड़ा किया था. सुशील टेकरीवाल ने फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा था, ‘हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है. इसके बावजूद सीबीआई इस केस में रुचि नहीं ले रही है. हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट में पिंटो फैमिली की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील क्यों नहीं उपस्थित थे? मुझे लगता है कि पिंटो फैमिली को बचाने के लिए हरियाणा सरकार प्रयास कर रही है. हरियाणा सरकार चाहती है कि पहले पिंटो फैमिली को जमानत मिल जाए उसके बाद केस को सीबीआई को सौंप देंगे.ऐसा मेरा मानना है.’

राजनीतिक नजर में हरियाणा के सीएम खट्टर पीड़ित परिवार की सीबीआई मांग की बात को मान गए थे. लेकिन, दूरदर्शी नजर में वो हरियाणा पुलिस की एफआईआर की पटकथा को जान भी गए थे. शायद इसी वजह से सीबीआई जांच में होने वाली फजीहत से बचने के लिए हरियाणा सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही थी.

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