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'जो महात्मा गांधी, अंबेडकर और विवेकानंद ने कहा है, वही हिंदुत्व है'

मोहन भागवत ने कहा है कि किसी के देखने के नजरिए से आप हिंदुत्व का प्रकार अलग नहीं कर सकते है. या तो आपके लिए ईश्वर सबसे ऊपर होगा या सत्य. यही हिंदुत्व है

FP Staff Updated On: Mar 20, 2018 04:27 PM IST

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'जो महात्मा गांधी, अंबेडकर और विवेकानंद ने कहा है, वही हिंदुत्व है'

मोहन भागवत ने कहा है कि किसी के देखने के नजरिए से आप हिंदुत्व का प्रकार अलग नहीं कर सकते है. या तो आपके लिए ईश्वर सबसे ऊपर होगा या सत्य. यही हिंदुत्व है.

मोहन भागवत ने पान्चजन्य को दिए एक इंटरव्यू में फिलहाल हिंदुत्व और आक्रामक हिंदुत्व की बहस पर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा है कि जो लोग सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य, तप, शौच, स्वाध्याय, संतोष और जो ईश्वर को मानते हैं उनके लिए ‘ईश्वर प्रणिधान’. जो ईश्वर को नहीं मानते हैं उनके लिए ‘सत्य प्रणिधान’. यानी जो ईश्वर में विश्वास करते हैं, उनके लिए ईश्वर और जो नहीं मानते, उनके लिए सत्य ऊपर है.

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी कहते थे कि सत्य का नाम ही हिंदुत्व है. हिन्दुत्व के बारे में जो गांधीजी ने कहा है, जो विवेकानंद जी ने कहा है, जो सुभाष बाबू ने कहा है, जो कविवर रविन्द्रनाथ ने कहा है, जो डॉ. आंबेडकर ने कहा है, वही हिंदुत्व है.

भागवत ने कहा कि मैं सत्य को भी मानता हूं और अहिंसा को भी. और मुझे ही खत्म करने के लिए कोई आए और मेरे मरने से वह सत्य भी मरने वाला है और अहिंसा भी मरने वाली है, उसका नाम लेने वाला कोई बचेगा नहीं तो उसको बचाने के लिए मुझे लड़ना पड़ेगा. लड़ना या नहीं लड़ना, यह हिंदुत्व नहीं है. सत्य, अहिंसा के लिए जीना या मरना, सत्य, अहिंसा के लिए लड़ना अथवा सहन करना, यह हिंदुत्व है.

कट्टर हिंदुत्व पर भागवत ने कहा कि ये जो बातें चलती हैं कि स्वामी विवेकानंद का हिन्दुत्व और संघ वालों का हिन्दुत्व, कट्टर हिन्दुत्व और सरल हिन्दुत्व, तत्व का नहीं, स्वभाव आदमी का होता है. ये भ्रम पैदा करने के लिए की जाने वाली तोड़-मरोड़ है, क्योंकि हिन्दुत्व की ओर आकर्षण बढ़ रहा है. ऐसा न हो इसलिए लोग उसमें मतभेद उत्पन्न करना चाहते हैं. हम हिंदू के नाते किसी को अपना दुश्मन नहीं मानते. किसी को पराया नहीं मानते. लेकिन उस हिंदुत्व की रक्षा के लिए हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति, हिंदू समाज का संरक्षण हमको करना ही पड़ेगा.

उनसे सवाल पूछा गया कि युवाओं में संघ के प्रति दिलचस्पी बढ़ रही है. इस पर उनका क्या कहना है को उन्होंने जवाब दिया कि अगर युवा संघ की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तो हम उनको साथ लाएंगे और उनको तैयार करेंगे. उनकी रुचि-क्षमता के अनुसार उनको देशहित में लगाएंगे. वे संघ में आएंगे, संघ से परिचित होंगे, संघ से अनुभव लेंगे. अनुभव लेने के बाद उनको लगेगा कि यह ठीक है. यह होने वाला है.

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