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मौनी अमावस्या पर प्रयागराज कुंभ में शाही स्नान का आयोजन, करोड़ों श्रद्धालु घाट पर कर रहे पूजा

15 जनवरी से शुरू हुए कुंभ में मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान है, पहला शाही स्नान कुंभ के शुरुआती दिन मकर संक्रांति पर हुआ था.

Updated On: Feb 04, 2019 09:01 AM IST

FP Staff

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मौनी अमावस्या पर प्रयागराज कुंभ में शाही स्नान का आयोजन, करोड़ों श्रद्धालु घाट पर कर रहे पूजा

आज 'मौनी अमावस्या' का दिन है और कुंभ में ये दिन शाही स्नान के तौर पर मनाया जाता है. प्रयागराज में सोमवार को 'मौनी अमावस्या' पर कुंभ में शाही स्नान का आयोजन किया गया. इस मौके पर तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के दिनभर में स्नान करने की उम्मीद है. 15 जनवरी से शुरू हुए कुंभ में मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान है. पहला शाही स्नान कुंभ के शुरुआती दिन मकर संक्रांति पर हुआ था.

बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मेला क्षेत्र में डटे हुए हैं

आईसीसीसी के एक अधिकारी के मुताबिक रविवार शाम 6 बजे तक एक करोड़ से अधिक लोगों ने स्नान किया था और रविवार रात 12 बजे से सोमवार सुबह 7 बजे तक एक करोड़ से ज्यादा लोग स्नान कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या होने की वजह से स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मेला क्षेत्र में डटे हुए हैं. अधिकारी ने बताया कि सोमवार शाम तक 3 से 4 करोड़ लोगों के स्नान करने की उम्मीद है.

महिलाएं पीपल के पेड़ पर सूत के धागे लपेटते हुए 108 परिक्रमा करती हैं

माघ मास में पड़ने वाली मौनी सोमवती अमावस्या पर देश के विभिन्न राज्यों से आए लाखों श्रद्धालु गंगा में स्नान करते हैं. इसके बाद महिलाएं पीपल के पेड़ पर सूत के धागे लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करती हैं. स्नान के लिए एक दिन पहले ही श्रद्धालुओं का महासंगम कुंभ में पहुंचना शुरू हो गया था. विभिन्न घाटों पर गंगा स्नान सूर्योदय से पूर्व शुरू हो चुका है और सायंकाल सूर्यास्त तक चलता रहेगा. तीर्थ यात्री दिनभर मौन साधना भी करेंगे. तिल पर्वों का यह आखिरी दिन है. तिल पर्व मकर संक्रांति से प्रारंभ होते हैं और मौनी अमावस्या पर खत्म होते हैं.

सोमवार को चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र विद्यमान है

27 वर्षों के बाद मौनी अमावस्या पर सोमवती और अर्द्धकुंभ का स्नान एकसाथ पड़ रहा है. इससे पहले 3 फरवरी 1992 को ऐसा संयोग हुआ था. मौनी अमावस्या पर सिद्धि और महोदय योग बन रहे हैं. इन योगों का प्रभाव इस लिए भी बढ़ गया हैं क्योंकि सोमवार को चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र विद्यमान है. सोमवार चंद्रमा का दिन होता है. इस दिन भगवान भास्कर भी चंद्रमा के नक्षत्र श्रवण में ही विराजमान रहेंगे. मौनी अमावस्या के दिन सिद्धि योग है, अत: स्नान का कोई विशेष मुहूर्त नहीं है. सिद्धि योग में सूर्योदय से सूर्यास्त से संपूर्ण मुहूर्त और पर्वकाल बने रहेंगे.

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