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'रोटोमैक' के मालिक कोठारी को CBI ने किया गिरफ्तार, 800 करोड़ के लोन डिफॉल्ट का मामला

विक्रम कोठारी, उनकी पत्नी और बेटे से कानपुर के उनके आवास में पूछताछ की गई. पूछताछ के बाद कोठारी को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया

Updated On: Feb 19, 2018 01:38 PM IST

FP Staff

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'रोटोमैक' के मालिक कोठारी को CBI ने किया गिरफ्तार, 800 करोड़ के लोन डिफॉल्ट का मामला

रोटोमैक पेन बनाने वाली कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी को 800 करोड़ रुपये के लोन डिफॉल्ट केस में सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है. सीबीआई के आधिकारिक प्रवक्ता ने सोमवार सुबह बताया कि विक्रम कोठारी, उनकी पत्नी और बेटे से कानपुर के उनके आवास में पूछताछ की गई. पूछताछ के बाद सीबीआई ने कोठारी को गिरफ्तार कर लिया.

इसके पहले सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (सीबीआई) ने रोटोमैक पेन कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी व अन्य के खिलाफ सोमवार को एक मामला दर्ज किया था. कानपुर स्थित कोठारी के आवास पर जांच एजेंसी ने छापेमारी की.

एक अधिकारी के मुताबिक, बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर सीबीआई ने कोठारी के खिलाफ 800 करोड़ रुपए के कर्ज का भुगतान नहीं करने का मामला दर्ज किया है.

कई बैंकों को लगाया चूना

इससे पहले पीटीआई-भाषा के हवाले से खबर चली कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी के बाद अब एक और कारोबारी विक्रम कोठारी कई बैंकों को 800 करोड़ रुपए का चूना लगाकर कथित तौर पर विदेश भाग गए हैं. कोठारी रोटोमैक पेन कंपनी के प्रमोटर हैं. सूत्रों के मुताबिक कोठारी पर इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत कई सार्वजनिक बैंकों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है.

कानपुर के कारोबारी कोठारी ने पांच सार्वजनिक बैंकों से 800 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज लिया था. सूत्रों के हवाले से भाषा ने बताया कि कोठारी को कर्ज देने में इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नियमों में ढिलाई की.

विदेश भागने की चली थी खबर

लोकल मीडिया की रपटों में रोटोमैक के मालिक के विदेश भाग जाने की खबरें आई थीं. हालांकि बाद में मीडिया रिपोर्टों में उनके कानपुर में ही मौजूद होने की खबर मिली. भागने की आशंकाओं को बेकार करार देते हुए कोठारी ने कहा, ‘मैं कानपुर का वासी हूं और मैं शहर में ही रहूंगा. हालांकि कारोबारी काम की वजह से मुझे विदेश यात्राएं भी करनी होती हैं.’

न मूलधन चुकाया न ब्याज

कोठारी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 485 करोड़ रुपए और इलाहाबाद बैंक से 352 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था. उन्होंने कर्ज लेने के साल भर बाद कथित तौर पर ना तो मूलधन चुकाया और ना ही उस पर बना ब्याज. पिछले साल कर्ज देने वाले बैंकों में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा ने रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को जानबूझकर जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाला (विलफुल डिफॉल्टर) घोषित किया था.

इस सूची से नाम हटवाने के लिए कंपनी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की शरण ली थी. जहां चीफ जस्टिस डी.बी.भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सूची से बाहर करने का आदेश दिया था.

विलफुल डिफॉल्टर होने का आरोप

कोर्ट ने कहा था कि कर्ज चूक की तारीख के बाद कंपनी ने बैंक को 300 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति की पेशकश की थी, बैंक को गलत तरीके से सूची में डाला गया है. बाद में रिजर्व बैंक की ओर से तय प्रक्रिया के मुताबिक एक समिति ने 27 फरवरी 2017 को पारित आदेश में कंपनी को जानबूझ कर कर्ज नहीं चुकाने वाला घोषित कर दिया.

यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब महज एक सप्ताह पहले पंजाब नेशनल बैंक में करीब 11,400 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है.

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