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रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 8 और 9 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल

यूनियन ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह निजिकरण और ठेका प्रथा को बढ़ावा देती है

Updated On: Dec 19, 2018 12:07 PM IST

FP Staff

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रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 8 और 9 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल

हरियाणा में रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है. इसके लिए वे 8 और 9 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होगी. दरअसल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने अपनी मांगे पूरी न होने के बाद ये फैसला लिया है. मगंलवार को युनियन हेडक्वाटर में हरियाणा कर्मचारी महासंघ की बैठक हुई थी. इसी बैठक में ये फैसला लिया गया था. यूनियन ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह निजिकरण और ठेका प्रथा को बढ़ावा देती है.

वहीं इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र सह धनखड़ ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतिया कर्मचारियों के हित में नहीं है, इसलिए आज कर्मचारी आंदोलन करने पर मजबूर है. दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि सरकार अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए ठेका प्रथा बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार बनने से पहले पार्टी ने कर्मचारियों से कई वादे किए लेकिन सत्ता आने के बाद सब वादे भूल गए. इस के साथ ही धनखड़ ने चेतावनी भी दी कि अगर समय रहते उनकी मांगों को पूका नहीं किया गया तो कर्मचारी आंदोलन करेंगे.

क्या हैं यूनियन की मांगे?

- पुरानी पेंशन नीति बहाल करना - जनवरी 2016 से एचआरए समेत सभी भत्ते लागू करना - स्टेट ट्रांसपोर्ट में 700 बसें ठेके पर लेने के फैसले को रद्द करना - राज्य में चल रही अवैध गाड़ियों पर पूर्ण रोक लगाना - सरकारी बसों की संख्या बढ़ती आबादी के अनुसार 14 हजार करवाना

- विभाग में खाली सभी पदों को नियम के मुताबिक पक्की भर्ती से भरना

- ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य श्रेणी के सभी कर्मचारियों को समय पर अवकाश और आराम देना.

किसानों ने कि किया भारत बंद का ऐलान

वहीं दूसरी तरफ भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) ने मंगलवार को कृषि कर्ज की माफी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'टालमटोल' के विरोध में 8 और 9 जनवरी को 'ग्रामीण भारत बंद' का ऐलान किया है.

एआईकेएस के अध्यक्ष अशोक धावले ने बताया कि केंद्रीय किसान परिषद की दो दिवसीय बैठक में 8 और 9 जनवरी को ग्रामीण भारत बंद का प्रस्ताव पारित किया गया. एआईकेएस सीपीएम से संबद्ध किसान संगठन है.

उन्होंने कहा, 'यह बंद कृषि कर्ज माफी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टालमटोल वाले रवैये के विरोध में आयोजित किया जा रहा है.'

एआईकेएस के ग्रामीण भारत बंद का भूमि अधिकार सभा (बीएएस) ने समर्थन किया है. यह संगठन गरीब किसानों को खेती के लिए जमीन मुहैया कराने की मांग कर रहा है.

एआईकेएस के महासचिव हन्नान मोल्ला ने कहा कि सरकार को न केवल किसानों की कृषि कर्ज माफी बल्कि गरीब किसानों के भूमिहीन होने के मुद्दे को भी हल करना चाहिए. बीएएस ने हमारे बंद का समर्थन किया है.'

(भाषा से इनपुट)

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