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गाजियाबाद: आखिर किसकी गलतियों का खामियाजा 127 परिवार भुगत रहे हैं?

उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने इस निर्माणाधीन इमारत से सटे 127 फ्लैटों को आनन-फानन में खाली करवा लिया है. ताज्जुब की बात यह है कि आवास विकास परिषद ने फ्लैटों में रहने वाले लोगों के लिए रहने का कोई इंतजाम नहीं किया है.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jul 27, 2018 09:33 PM IST

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गाजियाबाद: आखिर किसकी गलतियों का खामियाजा 127 परिवार भुगत रहे हैं?

देश भर में हो रही लगातार बारिश लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनती जा रही है. कहीं जलभराव की वजह से लोगों का जीना मुहाल हो रहा है तो कहीं निर्माणाधीन इमारतों की वजह से लोगों को अपना आशियाना खाली करना पड़ रहा है. दिल्ली से सटे गाजियाबाद में तो बारिश ने कई परिवारों को घर से बेघर कर दिया है. बीते गुरुवार को ही लगातार बारिश से वसुंधरा के सेक्टर 4सी स्थित वार्ता लोक और प्रज्ञा कुंज अपार्टमेंट की क्रॉसिंग के पास एक रोड धंस गई. रोड धंसने की वजह था यहां पर सालों बन रही एक निर्माणाधीन बिल्डिंग का गड्डा.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले सात-आठ सालों से इस जगह पर निर्माणाधीन इमारत के मालिक ने गड्डा खोद कर छोड़ रखा था, जिससे निर्माणाधीन बिल्डिंग के चारों तरफ बसे सोसायटियों की मिट्टी खिसकने लगी थी. इस गड्डे के कारण अब यहां रह रहे लोगों को अपना मकान खाली करना पड़ रहा है.

उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने इस निर्माणाधीन इमारत से सटे 127 फ्लैटों को आनन-फानन में खाली करवा लिया है. ताज्जुब की बात यह है कि आवास विकास परिषद ने फ्लैटों में रहने वाले लोगों के लिए रहने का कोई इंतजाम नहीं किया है.

बेघर हुए लोगों का साफ कहना है कि यूपी आवास एवं विकास परिषद इस हादसे के बाद दामन में लगे दाग को किसी तरह धोना चाहती है. स्थानीय लोगों की मानें तो यहां तीन साल पहले भी प्रज्ञा कुंज अपार्टमेंट के सामने रोड धंसी थी. उस समय भी सोसायटी के लोगों ने विकास परिषद को इसकी शिकायत की थी, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. इन लोगों का साफ कहना है कि अगर तीन साल पहले जरूरी कदम उठा लिए गए होते तो इस तरह की घटना आज नहीं होती.

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वार्तालोक सोसायटी के पास का गड्ढा जिसमें पानी भर जाने के कारण सड़क धंस गई.

वसुंधरा के ही सेक्टर 4सी में प्रज्ञा कुंज सोसायटी के फ्लैट नंबर 2023 में रहने वाले अमित राठी फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए मेरा फ्लैट इस निर्माणाधीन बिल्डिंग के बिल्कुल सटा हुआ है. यूपी आवास विकास परिषद ने मेरा भी फ्लैट खाली करवा लिया है. जिस जमीन के कारण यह हादसा हुआ है उस जमीन को आवास विकास परिषद ने पहले पार्क के लिए छोड़ा था. लेकिन, बाद में आवास विकास परिषद ने इस जमीन को एक बिल्डर को बेच दी. इस बिल्डर ने 2011 में यहां पर खुदाई का काम शुरू कर दिया. इस जगह पर कुल 1900 रिहायशी फ्लैट्स के साथ कॉमर्शियल फ्लैट्स भी बनाने थे. यहां पर चार टावर बनने थे. लोगों ने बुकिंग करना भी शुरू कर दिया. लेकिन, साल 2013 में उस बिल्डर ने यह जमीन सचिन दत्ता नाम के एक व्यक्ति को बेच दी. ये वही सचिन दत्ता हैं, जो बाद में महामंडलेश्वर बना था.

राठी आगे कहते हैं, अब इस घटना के बाद आवास विकास परिषद के कुछ अधिकारी कह रहे हैं कि यह जमीन अब यूपी आवास एवं विकास परिषद के पास दोबारा से आ गई है. कुछ दिन पहले तक यही लोग कह रहे थे कि यह जमीन विवादास्पद है. मामला कोर्ट में है. और अब इस हादसे के बाद कुछ और कह रहे हैं.

प्रज्ञा कुंज सोसायटी के फ्लैट नंबर 4023 में रहने वाले नंदन बिष्ट फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'यहां मिट्टी का कटान साल 2013 से ही चालू हो गया था. 2013 में यहां पर मिट्टी इतना कट गई थी कि प्रज्ञा कुंज सोसायटी वाली सड़क भी नहीं दिख रही थी. लोगों ने इसकी शिकायत आवास बोर्ड से की लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. यहां पर रहने वाले सोसायटी के लोगों ने पैसे इकट्ठे कर बाउंड्री वॉल लगवाई ताकि बच्चे खेलने के दौरान इसमें गिर न जाएं. साल 2014 से लेकर घटना के दो दिन पहले तक हमलोग जिला प्रशासन से इसकी शिकायत करते रहे लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला.'

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खाली कराए गए फ्लैट्स की तस्वीर

प्रज्ञा कुंज सोसायटी के ही फ्लैट नंबर 4025 में रहने वाले पीयूष वर्मा को भी अपना मकान खाली करना पड़ा है. पीयूष वर्मा फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'देखिए इस गड्डे से सबसे ज्यादा नुकसान प्रज्ञा कुंज सोसायटी में रहने वाले लोगों को हुआ है. इस सोसायटी की बिल्डिंग के नींव के नीचे पानी जाने लगा है. बिल्डिंग कब गिर जाएगी, यह हमलोग को मालूम नहीं है. हमलोग इतना पैसा इन्वेस्ट कर के बैठे हैं और अब हमलोग होटल और रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं. कब तक रहेंगे यह हमलोगों को नहीं बताया गया है.'

इस निर्माणाधीन इमारत के गिरने से वार्ता लोक, प्रज्ञा कुंज, मेवाड़ कॉलेज का पिछला हिस्सा और सेक्टर 4बी शिव गंगा अपार्टमेंट का पिछला हिस्सा प्रभावित हो सकता है. यूपी आवास एवं विकास परिषद की तरफ से अभी तक कोई भी आश्वासन नहीं मिला है कि यह हालात कितने दिनों तक बने रहेंगे.

यूपी प्रशासन की तरफ से लगातार गड्डे भरने और रोड ठीक करने का काम जारी है. यहां रह रहे लोगों का शिफ्ट करने का काम भी चल रहा है. सोसायटी के लोग परेशान हैं कि घर के बुजुर्ग और बच्चों को लेकर इस समय कहां जाएं. जबकि, कुछ लोगों को अपने घर गिरने का भी डर सता रहा है. बता दें कि प्रज्ञा कुंज सोसायटी में लगभग 600 और वार्ता लोक सोसायटी में लगभग 400 फ्लैट्स हैं.

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वार्तालोक सोसायटी में रहने वाले एक निजी चैनल के पत्रकार अमिताभ फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए पिछले आठ साल से इस जगह पर गड्डा खुदा हुआ है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां के लोगों के द्वारा प्रशासन को लगातार खतरों से आगाह करने की शिकायत होती रही. इसके बावजूद जिला प्रशासन सोता रहा. जिस समय यह घटना घटी उससे कुछ ही समय पहले एक स्कूली बस वहां से गुजरी थी. एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया. प्रशासन को चाहिए कि जल्द ही बिल्डर पर एफआईआर दर्ज करे.’

गुरुवार सुबह से ही इस घटना के घटने के बाद लोगों में नारजगी देखी जा रही है. लोगों का कहना है कि वसुंधरा का सबसे पॉश इलाका होने के बावजूद आवास विकास परिषद ने इस इलाके की अनदेखी की और बिल्डर पर कार्रवाई नहीं की.

गाजियाबाद की डीएम ऋतु माहेश्वरी ने इस घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. मौके पर मौजूद आवास विकास परिषद के कुछ अधिकारियों का कहना है कि सेंट्ल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट (सीआरआरआई) की टीम आस-पास की इमारतों की मजबूती जांचने बहुत जल्द ही आने वाली है. उसके बाद ही लोगों को दोबारा से शिफ्ट करने की अनुमति दी जाएगी.

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