विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

नोटबंदी के मारे ट्रेडर्स, अब बजट के सहारे

नोटबंदी से कैश कम होने से खरीददार कम हुए हैं और सब्जियों और फलों के दामों में गिरावट आई है.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jan 24, 2017 08:22 PM IST

0
नोटबंदी के मारे ट्रेडर्स, अब बजट के सहारे

नोटबंदी के बाद से देश के थोक बाजार मंदी के दौर से गुजर रहे हैं. एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर में सब्जियों की आवक घट गई है. व्यापारियों का मानना है कि नोटबंदी से उनका कारोबार अस्त-व्यस्त हो गया है.

नोटबंदी के असर के बारे में मेरठ के एक बुजुर्ग किसान नेतराम कहते हैं, ‘ मैंने पांच एकड़ जमीन में टमाटर की खेती की थी. नवंबर के महीने से लेकर अभी तक लगभग 4 लाख का नुकसान हो गया है.'

आम बजट 2017 की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें 

उन्होंने कहा, 'नोटबंदी के बाद टमाटर की कीमतों में काफी गिरावट आई है. बाजार में मांग घटने से सप्लाई बढ़ गई है. जिससे औने-पौने दामों में टमाटर बेचना पड़ा और लाखों का नुकसान हो गया.’

फल और सब्जियों का कारोबार, नोटबंदी के चलते हुआ बर्बाद

tomatoes 

जानकार मानते हैं कि नोटबंदी ने नई फसल को बर्बाद कर दिया है. आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है लेकिन किसानों का बुरा हाल हुआ है. थोक बाजारों में किसानों को उपयुक्त पैसे नहीं मिल रहे हैं.

नोटबंदी से कैश कम होने से खरीददार कम हुए हैं. सब्जियों और फलों के दामों में गिरावट आई है.

यह भी पढ़ें: बजट 2017: किसानों को सूखे वादे नहीं, कमाई की हरियाली चाहिए

नेतराम आगे कहते हैं, ‘बजट में क्या कुछ होने वाला है इससे मुझको कोई लेना-देना नहीं है पर मेरे जो नुकसान हुए हैं उसकी भरपाई सरकार करे. किसान ही हर जुल्म क्यों सहे. कभी कुदरत तो कभी नोटबंदी की मार झेलनी पड़ती है.’

नेतराम की तीन बेटियां हैं. नेतराम का कहना है, 'इस बार टमाटर की खेती इसलिए किया था कि इससे अच्छी-खासी आमदनी होने पर बड़ी बेटी की शादी करेंगे. पर हालत यह हो गई है कि हमने जो खेती में लगाया उसका 30 प्रतिशत भी रिटर्न नहीं आ पाया.'

नोटबंदी से प्याज के किसानों के भी निकले आंसू 

onion market

उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ के किसान जहां टमाटर की गिरती कीमत से परेशान रहे, वहीं महाराष्ट्र और गुजरात के किसान प्याज के दाम में आई कमी के शिकार हुए.

देश में लगभग 94 हेक्टेयर जमीन में सब्जियों की खेती होती है. यह भारत में कुल खेती का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है.

जानकार मानते हैं कि सब्जियों का काम ज्यादातर नकदी होता है. सब्जियां लगाने से किसान को पैसे के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता है.

यह भी पढ़ें: बजट 2017: छोटे रोजगार बढ़ाने के लिए लेने होंगे बड़े फैसले

चैंबर ऑफ आजादपुर फूड्स एंड वेजिटेवल ट्रेडर्स के जेनरल सेक्रेटरी राजकुमार भाटिया कहते हैं, इसको हम फेज वाइज आपको बताते हैं. उन्होंने कहा, 'नोटबंदी के शुरुआती दिनों में व्यापार पर 75 प्रतिशत तक प्रभाव पड़ा था. 50 प्रतिशत से थोड़ा कम का प्रभाव अभी भी है. लोगों की खरीदारी घट गई है.'

राजकुमार भाटिया आगे कहते हैं, मान लीजिए कि हमने एक ट्रक माल मुरादाबाद भेजा. मुरादाबाद वाले ने पीलीभीत भेजा. पहले पीलीभीत वाला हमारे अकाउंट में पैसा जमा करा देता था. वो चेन टूट गई. बैंकों ने कैश डिपोजीट लेने से उस दौरान मना कर दिया. क्योंकि उनके पास छोटे नोट नहीं थे. ट्रक ड्राइवर को भाड़ा नहीं मिल पाया मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पाई. ये सब दिक्कतें रहीं.

बजट से ट्रेडर्स की मांग 

राजकुमार भाटिया बजट को लेकर कहते हैं, मेरा सरकार से अनुरोध है कि सरकार जो भी व्यवस्था बनाए लेकिन साग, सब्जी, दूध और दवाइयों को इससे अलग रखे. इससे हर आदमी की बुनियादी जरूरतें पूरी होती है.

उन्होंने कहा, 'सप्लाई चेन अगर बनी रही तो उसी से किसान और लोगों का भला होगा. नोटबंदी का असर मार्च-अप्रैल महीने से शुरू होगा. जब शादियों का सीजन आएगा. पैसे नहीं होने के कारण जो साग-सब्जियों और फलों की खेती नहीं हो पाई है. उसका असर अर्थ व्यवस्था पर बाद में देखा जाएगा.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi