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पानी की बोतल पर छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूले तो होगी जेल

अब रेस्टोरेंट, होटल और मल्टीप्लेक्सों में मिनरल वॉटर की बोतल पर छपी कीमत से ज्यादा रकम वसूलने पर मैनेजमेंट प्रशासन को जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है

Updated On: Dec 12, 2017 12:22 PM IST

FP Staff

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पानी की बोतल पर छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूले तो होगी जेल

आपने भी कभी रेलवे स्टेशनों, होटलों या दुकानों पर पानी के बोतल पर छपी कीमत से ज्यादा पैसे देने को लेकर जरूर झिक-झिक की होगी, लेकिन आप इससे ज्यादा कुछ नहीं कर पाए होंगे. अब सरकार ने दुकानदारों की इस मुनाफाखोरी को गैरकानूनी घोषित कर दिया है. अब इसके लिए दुकानदारों को जेल की सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अब रेस्टोरेंट, होटल और मल्टीप्लेक्सों में मिनरल वॉटर की बोतल पर छपी कीमत से ज्यादा रकम वसूलने पर मैनेजमेंट प्रशासन को जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है.

सरकार का कहना है कि छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूल करना उपभोक्ता के अधिकारों का हनन है, यहां तक कि ये टैक्स चोरी को बढ़ावा देता है. सरकार ने कहा कि बोतलों पर छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूलने के चलन से सरकार को भी सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी में नुकसान झेलना पड़ता है.

बता दें कि, फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया ने एक याचिका दाखिल की थी, जिसके जवाब में उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने कहा है कि प्री-पैक्ड या प्री-पैकेज्ड प्रॉडक्ट्स पर छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूलना लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत अपराध है.

लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट की धारा-36 में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति को प्री-पैकेज्ड प्रॉडक्ट पर छपी हुई कीमत से ज्यादा की कीमत पर बेचते, बांटते या डिलीवर करते पाया गया, तो उसके इस पहले अपराध के लिए उसपर 25,000 का जुर्माना लगेगा. अगर उसने दोबारा ये अपराध किया तो उसे 50,000 के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन अगर उसने ऐसा करना जारी रखा तो उसे 1 लाख का जुर्माना या एक साल जेल या दोनों हो सकता है.

2015 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कीमत से ज्यादा पैसे वसूल रहे विक्रेताओं पर कार्रवाई करने के सरकार के अधिकार को सही ठहराया था. होटल एसोसिएशन की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी, जिसके जवाब में उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने एफिडेविट में ये जवाब दर्ज कराया है. मंगलवार को जस्टिस रोहिंगटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच इस पर सुनवाई करेगी.

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