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पक्की खबरों से ज्यादा असरदार होती हैं झूठी और फर्जी खबरें: अध्ययन

अध्ययन के मुताबिक सूचना के ज्यादा साझा होने पर उसमें से सच्चाई गायब होने लगती है

Updated On: Jun 10, 2018 04:37 PM IST

Bhasha

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पक्की खबरों से ज्यादा असरदार होती हैं झूठी और फर्जी खबरें: अध्ययन

हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि आतंकवाद, बीमारियों का प्रकोप, प्राकृतिक आपदा और ऐसी ही संभावित खतरों पर आधारित खबरें, जब फैलती हैं तो ये नकारात्मकता और उन्माद का प्रसार करती हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार इन खबरों से मची दहशत को निष्पक्ष सच्चाई पर आधारित खबरें भी कम नहीं कर पातीं. नकारात्मक खबरों के सामाजिक प्रभाव की पड़ताल करने वाला यह अपनी तरह का पहला अध्यन है.

ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय के थॉमस हिल्स ने कहा कि समाज में जोखिम बढ़ते जा रहे हैं. यह शोध बताती है कि वास्तविक दुनिया में खतरों में लगातार कमी आने के बाद भी विश्व में खतरे क्यों बढ़ते जा रहे हैं. हिल्स ने कहा कि सूचना के ज्यादा साझा होने पर उसमें से सच्चाई गायब होने लगती है. उनका स्वरूप इतना बिगड़ जाता है कि उसमें सुधार करना मुश्किल हो जाता है.

झूठी खबरें फैलाने में सोशल मीडिया का अहम योगदान

सोशल मीडिया पर ठीक और फर्जी दोनों तरह की खबरों और अफवाहों का रिट्वीटों और मैसेजों के जरिये प्रसार से समाज पर अहम प्रभाव पड़ता है. इस शोध के अंदर शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर 154 लोगों का विश्लेषण किया. उन्हें आठ-आठ लोगों के 14 समूहों में बांटा गया. इसके बाद हर समूह के एक व्यक्ति को संतुलित और तथ्यात्मक समाचार पढ़वाए गए. साथ ही खबर पर दूसरे व्यक्ति को एक संदेश लिखने को कहा गया. इसी तरह से तीसरे ने चौथे व्यक्ति के लिए संदेश लिखा और आगे भी यही सिलसिला रहा.

हर समूह में, डरावने विषयों पर खबरें जैसे-जैसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास गईं वैसी ही सूचना तेजी से नकारात्मक, पक्षपातपूर्ण और दहशत भरी हो गईं. इसके बाद जब असली निष्पक्ष खबर फिर से सामने रखी गई तो भी यह डर दूर नहीं हो पाया.

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