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मोदी राज में पत्रकारों की आजादी खतरे में : रिपोर्ट

'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' की वार्षिक रिपोर्ट में भारत 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स' में पिछली बार से नीचे गिरकर 136वें स्थान पर है

IANS Updated On: Apr 27, 2017 11:30 PM IST

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मोदी राज में पत्रकारों की आजादी खतरे में : रिपोर्ट

वर्ल्ड मीडिया पर नजर रखने वाली एजेंसी 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' ने भारत में पत्रकारों की आजादी को खतरे में बताया है. एजेंसी द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पत्रकारों की आजादी 'हिंदू राष्ट्रवादियों' द्वारा दी जाने वाली धमकियों की वजह से घटी है.

रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्र पत्रकारिता वाले इंडेक्स में भारत को 180 देशों में 136वां स्थान मिला है. इसका मतलब है कि दुनिया के 135 देशों में पत्रकारों को भारत से अधिक आजादी हासिल है.

प्रतिष्ठित एजेंसी 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' की वार्षिक रिपोर्ट में भारत 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स' में 136वें स्थान पर है, जबकि पिछले वर्ष उसकी रैंकिंग 133 थी.

रिपोर्ट में हालांकि पूरी दुनिया में मीडिया के लिए चिंताजनक हालात की बात कही गई है.

Reporters Without Borders

(फोटो: फेसबुक से साभार)

रिपोर्ट में कहा गया है, 'हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा हर तरह की 'राष्ट्र-विरोधी' अभिव्यक्तियों को राष्ट्रीय बहस से बाहर करने की कोशिशों के चलते, भारत की मुख्यधारा की मीडिया में सेल्फ सेंसरशिप का रुझान बढ़ा है.'

पत्रकारिता की फ्रीडम घटने को लेकर आगाह

रिपोर्ट में भारत पर केंद्रित अध्याय को 'नरेंद्र मोदी के राष्ट्रवाद से खतरे' शीर्षक दिया गया है. रिपोर्ट में अमेरिका सहित लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देशों में पत्रकारिता की स्वतंत्रता के घटने को लेकर आगाह किया गया है.

इस सूची में अमेरिका को 43वां, कनाडा को 22वां और न्यूजीलैंड को 13वां स्थान दिया गया है. रिपोर्ट की जारी लिस्ट में नॉर्वे को सबसे अधिक फ्री मीडिया वाला देश बताया गया है. सूची में स्वीडन दूसरे और फिनलैंड तीसरे स्थान पर है.

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के महासचिव क्रिस्टोफ डेलोएरे ने बुधवार को पेरिस में कहा, 'लोकतांत्रिक देश जिस गति से नीचे की ओर जा रहे हैं, वह उन लोगों के लिए खतरे का संकेत है जो यह समझते हैं कि अगर मीडिया की स्वतंत्रता सुरक्षित नहीं रही तो अन्य तरह की आजादी भी सुरक्षित नहीं रहेंगी.'

चौंकाने वाली बात यह है कि मीडिया स्वतंत्रता के मामले में अफगानिस्तान, फिलिस्तीन, युगांडा और अल्जीरिया रैंकिंग में भारत से ऊपर हैं. भारत से केवल तीन स्थान नीचे पाकिस्तान 139वें स्थान है. जबकि, बांग्लादेश 146वें, रूस 148वें और चीन 176वें पायदान पर है.

Newspapers

(फोटो: रॉयटर्स)

निशाना बनाए जाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी

भारत के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकारों को सोशल मीडिया पर 'बेहद कट्टरपंथी राष्ट्रवादियों' द्वारा निशाना बनाए जाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. उन्हें बदनाम करने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, बुरा-भला कहा जाता है. यहां तक कि हिंसा और मारपीट की भी धमकी दी जाती है.

रिपोर्ट के अनुसार, 'सरकार की खुलकर आलोचना करने वाले पत्रकारों का मुंह बंद करने के लिए आईपीसी की धारा 124ए के तहत मुकदमा दर्ज कराने की धमकियां तक दी जाती हैं. जिसके तहत देशद्रोह के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है."

रिपोर्ट में जम्मू एवं कश्मीर में पत्रकारिता करने के खतरों का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार जिन क्षेत्रों को संवेदनशील मानती है, जैसे कश्मीर, उन जगहों से पत्रकारिता करना लगातार मुश्किल बना हुआ है. यहां पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोई सिस्टम भी नहीं विकसित की गई है.'

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