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दिल्ली पुलिस आंकड़ों में चाहे कितना ही उलझा दे, लेकिन हकीकत से मुंह कैसे मोड़ेगी?

दिल्ली पुलिस ने आंकड़ों में भले ही अपनी पीठ थपथपा ली हो लेकिन वास्तविक स्थिति उतनी सुखद नहीं है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jan 12, 2018 10:11 PM IST

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दिल्ली पुलिस आंकड़ों में चाहे कितना ही उलझा दे, लेकिन हकीकत से मुंह कैसे मोड़ेगी?

दिल्ली में साल 2016 की तुलना में साल 2017 में संगीन अपराध सहित कुछ और मामलों में कमी आई है. दिल्ली में साल 2016 के मुकाबले साल 2017 में हत्या, डकैती और लूट जैसे मामलों में जहां कमी देखने को मिली है, वहीं औसत अपराध में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को सालाना प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली में अपराध सहित कई मामलों के आंकड़े जारी किए. दिल्ली पुलिस के कमिश्नर सहित कई बड़े अधिकारियों ने साल 2017 का आंकड़ा जारी करते हुए कहा है कि दिल्ली में अपराध पर काफी हद तक अंकूश लगा दिया गया है.

लेकिन, जमीनी स्तर पर या यूं कहें कि आम जनता के लिए यह आंकड़े सुकून देने वाले नहीं हैं. सतही स्तर पर हालात इसके उलट हैं. साल 2017 में दिल्ली में क्राइम के ग्राफ में कोई कमी नहीं आई है. पिछले साल यानी साल 2016 की तुलना में साल 2017 के दौरान अपराध में 12 प्रतिशत की तेजी आई है.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक संगीन अपराध (हीनियस क्राइम) में थोड़ी बहुत कमी जरूर आई है, लेकिन मारपीट, चोरी, वाहन चोरी, सेंधमारी और झपटमारी के मामलों में अभी भी दिल्ली पुलिस को काफी काम करना होगा. इन आंकड़ों में काफी तेजी देखने को मिल रही है.

दिल्ली पुलिस के ही दिए आंकड़ों की बात करें तो देश की राजधानी में अपराध के ग्राफ में साल दर साल इजाफा होता जा रहा है. इसके कई कारण बताए जा रहे हैं. दिल्ली की जनता के द्वारा ऑनलाइन शिकायतें भी अब पहले की तुलना में ज्यादा होने लगी हैं. कुछ मामलों में तो कोर्ट के आदेश के बाद ऑनलाइन मामले दर्ज कराए जा रहे हैं. ऐसा दिल्ली पुलिस के द्वारा एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करने के बाद कोर्ट के द्वारा करवाया जा रहा है.

पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक

पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक

रिपोर्ट से जो अहम सवाल निकल कर आ रहे हैं उनमें बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में काफी तेजी आना प्रमुख है. हालांकि, महिला अपराध में थोड़ी बहुत कमी आने पर ही दिल्ली पुलिस पीठ थपथपा रही है.

आंकड़ों की मानें तो पिछले कुछ सालों के बाद साल 2017 में महिला अपराध खासकर रेप के मामलों में थोड़ी कमी आई है. साल 2017 में रेप के लगभग 2050 केस दर्ज किए गए हैं. दिल्ली पुलिस के मुताबिक 38 प्रतिशत केस में रेप करने वाले लोग ही रेप पीड़िता के करीबी निकले हैं. दिल्ली पुलिस ने महिला अपराध और रेप से जुड़े जो मामले जारी किए हैं वह भी कम चौकाने वाले नहीं हैं. साल 2017 में दिल्ली पुलिस के जारी आंकड़े के मुताबिक ही दिल्ली में रोजाना पांच महिलाओं के साथ रेप हुआ.

आंकड़ों की बाजीगरी में यह दिखाया गया है कि साल 2016 की तुलना में 2017 में रेप और छेड़छाड़ के मामले कम हुए हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले दो सालों की तुलना में रेप के सिर्फ 15 मामले ही कम हुए हैं. साल 2016 में जहां दिल्ली में 2 हजार 64 रेप के मामले सामने आए थे वहीं साल 2017 में 2 हजार 49 महिलाओं के साथ रेप की घटनाएं हुईं.

साल 2016 में मोलेस्टेसन के 4 हजार 35 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि साल 2017 में 3 हजार दो सौ मामले दर्ज किए गए. साल 2016 में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ के 894 मामले दर्ज किए वहीं पिछले साल 621 मामले ही सामने आए.

गुरुवार को दिल्ली पुलिस की सालाना प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली पुलिस के कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने कई मुद्दों पर खुलकर राय रखी. सालाना बैठक में कमिश्नर के साथ दिल्ली पुलिस के कई आलाधिकारी मौजूद थे. बारी-बारी से पुलिस के यह आलाधिकारी यह कहने की कोशिश कर रहे थे कि दिल्ली का लॉ एंड ऑर्डर सही दिशा में चल रहा है. दिल्ली की जनता को किसी भी बात से घबराने की जरूरत नहीं है.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, साल 2016 में जहां 1 लाख 99 हजार 110 मामले दर्ज किए थे वहीं साल 2017 में 2 लाख 23 हजार 75 मामले दर्ज किए गए. साल 2016 में हत्या, लूट और अपहरण के 7 हजार 629 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2017 में हत्या, लूट और अपहरण से जुड़े कुल 5 हजार 811 मामले दर्ज किए गए हैं.

दिल्ली पुलिस को करीब से जानने वाले कुछ पत्रकारों और कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने आंकड़ों के साथ बाजीगरी की है. एक तरफ बताया जा रहा है कि संगीन अपराध में कमी आई है तो दूसरी तरफ सेंधमारी, छीनाझपटी और चोरी के मामलों में पहले की तुलना में तेजी की बात कही गई है. अब चोरी, झपटमारी ऐसे मामले हैं, जिनका ताल्लूक सीधे आम जनता से होता है.

Delhi police press conference

दिल्ली पुलिस की सालाना रिपोर्ट में दिल्ली में प्रति लाख आबादी पर अपराध का ग्राफ काफी बढ़ा है. साल 2016 में प्रति लाख लोगों के खिलाफ जहां लगभग 1137 लोगों पर अपराध के मामले दर्ज हुए थे वहीं 2017 में यह प्रति लाख पर लगभग 1263 हो गया है.

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि अभी भी दिल्ली पुलिस को काफी काम करना बाकी है. अभी हाल ही में दिल्ली पुलिस के ही एक सब इंस्पेक्टर के गायब होने के 33 महीने के बाद एफआईआर दर्ज की गई. वह भी तब जब गायब सब इंस्पेक्टर के पिता ने देश के गृहमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक इस मामले को लेकर गुहार लगाई थी. बिहार का रहने वाला दिल्ली पुलिस में एक सब इंस्पेक्टर का पिता को जब 2 साल 9 महीने लग गए तो दिल्ली के आम जनता का क्या कहना.

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