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बिना जनहित के बार-बार आवेदन करना RTI कानून का दुरुपयोग: सूचना आयोग

राजस्थान सूचना आयुक्त आशुतोष शर्मा ने अपने हाल के फैसले में कहा कि भारत की संसद ने आरटीआई के रूप में आम नागरिक के हाथ में एक पवित्र अस्त्र दिया है

Updated On: Oct 21, 2018 05:46 PM IST

Bhasha

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बिना जनहित के बार-बार आवेदन करना RTI कानून का दुरुपयोग: सूचना आयोग
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राजस्थान सूचना आयोग ने बिना किसी जनहित के बार-बार आवेदन करके एक ही सूचना मांगने को सूचना के अधिकार अधिनियम का दुरुपयोग माना है.

आयोग ने आठ अपीलें एक साथ खारिज करते हुए अपीलकर्ता गोपीराम अग्रवाल को चेतावनी दी कि वह आरटीआई कानून के दुरूपयोग की प्रवृत्ति से बचें.

राजस्थान के सूचना आयुक्त आशुतोष शर्मा ने अपने हाल के फैसले में कहा कि भारत की संसद ने आरटीआई के रूप में आम नागरिक के हाथ में एक पवित्र अस्त्र दिया है जिससे शासन-प्रशासन में पारदर्शिता व जवाबदेही की भावना बढ़ी है. परन्तु शासन-प्रशासन के कामकाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए ऐसे पवित्र अस्त्र के दुरूपयोग की इजाजत नहीं दी जा सकती.

उन्होंने कहा कि ऐसा करना सूचना के अधिकार अधिनियम के दुरूपयोग की श्रेणी में आता है और सरकारी कार्यालय में कामकाज प्रभावित होने से अन्ततः आम जनता ही पीड़ित होती है.

दरअसल, गोपीराम अग्रवाल ने ऑटोनोमस गवर्नमेंट डायरेक्टोरेट और मुख्य नगर नियोजक के परिपत्रों की पालना के बारे में बांसवाड़ा नगर परिषद से सूचनाएं मांगी थी. नगर परिषद की ओर से आयोग के समक्ष कहा गया कि अग्रवाल ने परिषद में 1502 आरटीआई आवेदन दाखिल कर रखे हैं जिससे अधिकारी दबाव में हैं और नगर परिषद का सामान्य कामकाज प्रभावित हो रहा है. अपीलकर्ता सिर्फ तारीख बदलकर थोड़े-थोड़े दिन के अंतराल में हूबहू आवेदन पेश करता है, फिर भी अपीलकर्ता को सूचनाएं दी जा रही हैं.

सूचना आयुक्त आशुतोष शर्मा ने गत दिनों गोपीराम अग्रवाल की आठ द्वितीय अपीलें खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि पूर्व में दाखिल सूचना आवेदन की हूबहू प्रति में सिर्फ तारीख बदलकर समान सूचना के लिए एक के बाद एक, आठ सूचना आवेदन दाखिल करना न केवल अनुचित बल्कि आपत्तिजनक ही कहा जा सकता है.

उन्होंने कहा कि एक ही सूचना के लिए बार बार आवेदन करने पर उस सूचना को तलाश करने, दस्तावेजों की गणना करके प्रतिलिपि शुल्क गणना करने आदि पूरी प्रक्रिया ही अनावश्यक रूप से लोक प्राधिकरण के साधन-संसाधनों और रोजमर्रा के कार्यों को आनुपातिक रूप से विचलित करती है.

उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की प्रस्तावना और उद्देश्य के आलोक में शासन-प्रशासन के दक्ष संचालन को ध्यान में रखते हुए एक ही सूचना को बार-बार दिया जाना आरटीआई कानून के तहत भी अपेक्षित नहीं है और खारिज करने योग्य है.

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