S M L

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स: असम में बढ़ सकता है सांप्रदायिक तनाव

सुरक्षाबलों का कहना है कि किसी भी स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम हैं

Updated On: Dec 31, 2017 11:28 AM IST

Rishiraj Bhagawati

0
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स: असम में बढ़ सकता है सांप्रदायिक तनाव

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के शुरुआती रिलीज से पहले असम में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. इसका मकसद राज्य में कानून-व्यवस्था को बिगड़ने से रोकना है. राज्य सरकार ने 60 हजार पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया है. भारत के रजिस्ट्रार जनरल 31 दिसंबर की आधी रात को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स को जारी करेंगे. इसकी मदद से असम में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर के उनको देश से बाहर निकाला जाएगा.

फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सहाय ने कहा कि किसी भी हालात से निपटने के लिए असम में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं. ताकि रजिस्टर जारी होने के बाद किसी भी स्थिति से निपटा जा सके.

सहाय ने कहा कि, 'हम सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा कर रहे हैं. बदलते हालात के मुताबिक लगातार इंतजाम में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं. हमने संवेदनशील इलाकों को कई हिस्सों में बांटा है. इसी हिसाब से हालात से निपटने की व्यवस्था की गई है'.

जब हमने मुकेश सहाय से पूछा कि कौन से इलाके संवेदनशील माने जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि ये तो रजिस्टर के ड्राफ्ट के जारी होने के बाद तय होगा. मुकेश सहाय ने कहा कि हालात के बनने-बिगड़ने में सोशल मीडिया का अहम रोल रहता है. इसी के जरिए ज्यादातर गलत बातें फैलाई जाती हैं. अफवाहों को हवा दी जाती है. इसीलिए सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगाह रखी जा रही है.

पिछले हफ़्ते केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा ने असम का दौरा किया था. उन्होंने हालात और तैयारियों का जायज़ा लिया था. मुकेश सहाय ने दावा किया कि राजीव गाबा असम सरकार की तैयारियों से पूरी तरह से संतुष्ट थे. उन्होंने केंद्र की तरफ से जरूरी मदद का वादा भी किया.

भारी सुरक्षा इंतजाम

रोहिंग्या शरणार्थी बॉर्डर पार करने के बाद नाफ नदी पार करने के लिए नावों का इंतजार करते हुए.

सहाय ने बताया कि केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों की 85 कंपनियां असम में तैनात करने के लिए भेजी हैं. साथ ही वो असम की सरकार को खुफिया निगरानी में भी मदद कर रही है. सोशल मीडिया की निगरानी में भी केंद्र सरकार असम की मदद कर रही है.

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स का ड्राफ्ट तमाम सरकारी वेबसाइट पर जारी होगा. इसके अलावा इसे प्रकाशित किया जाएगा. साथ ही एसएमएस के जरिए भी उन लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी, जिन्होंने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स में शामिल करने के लिए अपनी अर्ज़ी के साथ अपना मोबाइल नंबर भी दिया था.

असम में 2500-3000 सरकारी सेवा केंद्र इस नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स की कॉपी को लोगों को देंगे. हर सरकारी सेवा केंद्र से दस गांवों तक ड्राफ्ट पहुंचाने की कोशिश होगी. इन सेवा केंद्रों की भी सुरक्षा के काफी सख्त इंतजाम किए गए हैं. इन पर भीड़ जमा होने की इजाजत नहीं होगी. साथ ही हालात से निपटने के लिए फौरी कार्रवाई बल और मोबाइल सुरक्षा टुकड़ियां भी जगह-जगह तैनात की जाएंगी. असम के डीजीपी मुकेश सहाय ने कहा कि हम इस नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स के ड्राफ्ट के जारी होने को चुनाव की तरह ले रहे हैं.

अंग्रेजी अखबार द हिंदू के मुताबिक शुरुआती लिस्ट में करीब दो करोड़ लोगों के नाम होंगे. फिलहाल नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स में नाम दर्ज करने के लिए 3.28 करोड़ लोगों ने अर्जी दे रखी है.

जैसा कि हम ने पहले भी बताया था कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स के जारी होने से सांप्रदायिक तनाव फैलने का खतरा है. असम मुस्लिम आबादी के लिहाज से देश का दूसरा बड़ा राज्य है. असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा था कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स को तैयार करने का मकसद असम में रह रहे अवैध बांग्लादेशियों की शिनाख्त करना है. शर्मा की अगुवाई में ही ये रजिस्टर तैयार किया जा रहा है.

हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि जिसका भी नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स में नहीं होगा, उसे देश से बाहर निकाला जाएगा. हम कोई जोखिम नहीं ले रहे हैं. इसीलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं.

हालांकि सरकारी अधिकारी ये भरोसा दे रहे हैं कि अगर किसी का नाम पहले ड्राफ्ट में नहीं होता, तो उसे ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है.

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि ये शुरुआती ड्राफ्ट होगा. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 31 दिसंबर तक जिन लोगों के दस्तावेज उन्हें नागरिक साबित करेंगे, उनके नाम की लिस्ट जारी करना जरूरी है.

इस सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बाद में दूसरा ड्राफ्ट भी जारी किया जाएगा. ये ड्राफ्ट सभी नामों के वेरिफिकेशन के बाद ही जारी होगा. जिन लोगों के नाम रविवार को जारी होने वाली लिस्ट में नहीं होंगे, वो दावे और ऐतराज के मुताबिक अपनी अर्जी वेबसाइट पर दे सकेंगे.

बाद में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन्स का जो ड्राफ्ट अगले कुछ महीनों में जारी होना है. लेकिन उसकी कोई तारीख तय नहीं की गई है.

सरकारी सूत्रों ने कहा कि पूरी प्रक्रिया वैधानिक रूप से जरूरी है. इसे कानून के दायरे में रहकर ही पूरा किया जा रहा है. ये काम देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया जा रहा है. खुद सुप्रीम कोर्ट पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है. ऐसे में लोगों को डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं.

डीजीपी मुकेश सहाय ने चेतावनी भी दी है. उन्होंने कहा कि जो लोग भी हालात बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा.

मुकेश सहाय ने कहा कि, 'हम इस साल का आखिरी दिन सरकारी सेवा केंद्रों में बिताने वाले हैं. हमारे सारे जवान तैनात और चौकस रहेंगे. किसी को घबराने की जरूरत नहीं है'.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi