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पत्नियों और प्रेमिकाओं के नाम पर तूफानों का नामकरण !

महिलाओं को अपने नाम पर तूफान का नाम रखने जाने पर है ऐतराज

Updated On: Dec 14, 2016 06:48 PM IST

Tarun Kumar

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पत्नियों और प्रेमिकाओं के नाम पर तूफानों का नामकरण !

नाम में क्या रखा है? अक्सर हम किसी व्यक्ति या वस्तु की मौलिकता और उसकी खासियत को समझाने के लिए इस वाक्य का सहारा लेते हैं.

शेक्सपियर की कालजयी रचना ‘रोमियो एंड जूलियट’ में भी नायिका अपने प्रेमी के प्रति रूहानी इश्क का इजहार करते हुए कहती है- ' नाम में क्या रखा है?गुलाब को अगर दूसरे नामों से पुकारा जाए तो भी वह उतनी ही खुशबू देगा.'

हम जूलियट की भावना का सम्मान करते हैं, क्योंकि मामला इश्क का है.

पर नामकरण जब किसी वर्ग, समाज, समूह या संस्कृति के सम्मान और पहचान का सवाल बन जाए तो तूफान खड़ा होगा ही!

वह भी तब, जब तूफान का नामकरण ही इस पूरे विवाद के केंद्र में हो!

पाकिस्तान ने दिया 'वरदा' नाम

तूफानों की नाम और कहानी में नारीवादी विमर्श, रोमांस, सांस्कृतिक पहचान के तीखे सवाल सदियों से शामिल रहे हैं.

ऐसे में जब पाकिस्तान के नामकरण वाला ‘वरदा’, अरबी में जिसका मतलब ‘लाल गुलाब’ है, भारत के दक्षिण तट पर कहर बनकर टूटा है. तूफानों और चक्रवातों के नामकरण के रोचक विवादित इतिहास से रूबरू होने का मौसम भी जिंदा हो गया है.

Chennai Cyclone 4

तूफान से चेन्नई की सड़कों पर तबाही का मंजर

कुदरत की इस प्रचंड लीला ने इंसान को न सिर्फ जिंदगी और मौत के खेल में उलझा रखा है. बल्कि बहस, विमर्श, विवादों के चक्रवातों में भी! खासकर नारीवादियों के लिए यह बहस का तल्ख विषय रहा है.

सदियों तक वेस्टइंडीज के निवासी तूफानों और चक्रवातों के नाम अपने किसी संत के नाम पर रखते रहे हैं.

ठीक वैसे ही जैसे हम रेनबो को हिंदू देवताओं के मुखिया इंद्र से जोड़ते हुए इंद्रधनुष कहते रहे हैं.

महिलाओं के नाम रखने का सिलसिला

ईवान आर. तन्नेहिल अपनी किताब ‘हरीकेंस’ में चक्रवात ‘हरीकेन संता अना’ का जिक्र करते हैं. जिसने 26 जुलाई, 1825 को प्यूरटो रिको में भारी तबाही मचाई थी.

इस तूफान का नाम संत अना के नाम पर रखा गया था. सैन फेलिप हरीकेन का नाम संत फेलिप के नाम पर रखा गया.

इसी किताब में आगे जिक्र है कि आस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञानी क्लीमेंट रैगी ने 19वीं सदी के पूर्वाध में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के महिला नाम रखने का सिलसिला शुरू किया.

1941 में रैंडम हाउस से प्रकाशित जाजॅ आर. स्टीवर्ट के चर्चित उपन्यास ‘सटॉर्म’ में एक महिला नामधारी चक्रवात का प्रमुखता से जिक्र है.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान तो तूफानों के महिला नामकरण की अवधारणा इतनी तेज हुई कि इसके खिलाफ नारीवादियों की त्योरियां चढ़ने लगीं.

प्रेमिकाओं और पत्नियों के नाम पर

अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के मौसम विज्ञानियों को मौसम-मानचित्रों के विश्लेषण के लिए हरीकेंस की पहचान की जरूरत महसूस हुई तो उन्हें इनके नामकरण की मजबूरी समझ में आई.

कई बार एक ही इलाके में एक ही समय अलग-अलग तीव्रता के कई चक्रवातों के आने से उनकी उलझनें और बढ़ गईं.

cyclone

ऐसे में उन्होंने एक दिलचस्प रास्ता निकाला. परिवार से महीनों दूर रहने वाले इन अधिकारियों ने अपनी प्रेमिकाओं और पत्नियों के नाम पर चक्रवातों और तूफानों के नाम रखना शुरू कर दिए.

इश्क के इजहार का यह तरीका जल्द ही विवादित हो गया.

कोई महिला तूफान का नाम अपने नाम पर रखे जाने से भला कैसी खुश रह सकती है? कई पत्नियों और प्रेमिकाओं ने इस पर गहरी आपत्ति भी जताई.

पर तब तक यह प्रवृत्ति इतनी गहरी जड़ जमा चुकी थी कि अमेरिका की राष्ट्रीय मौसम सेवा भी इसी पर अमल करने लगी.

इसके खिलाफ नारीवादियों की आवाज तेज होने लगी.

मजबूर होकर 1953 में मौसम सेवा ने मिलिट्री फोनेटिक लिपियों के आधार पर नामकरण शुरू किया. पर अलग-अलग तीव्रता के साथ चक्रवातों के बार-बार आने से उन्हें नामों का घोर अभाव सताने लगा.

नारी अपमान से जोड़कर देखा गया

एक बार फिर चक्रवातों के महिला नामकरण का ये सिलसिला जिंदा हो गया! 50, 60 और 70 के दशक में इस मसले को घोर लैगिंक पूर्वाग्रह और नारी अपमान से जोड़कर प्रमुखता से उठाया गया.

उस समय की प्रखर नारीवादी रॉक्सी बोल्टन ने मौसम सेवा को एक आपत्तिनामा भेजकर पूछा, ‘क्या महिलाएं जीवन और समाज के लिए नाशक हैं? क्या महिलाएं तूफान की तरह ही तबाही लाती हैं?’

बोल्टन ने अमेरिकी संसद के पुरुष सदस्यों और मंत्रियों के नाम पर चक्रवातों के नामकरण की वकालत की. ताकि पुरुषों को महिला समाज का अपमान समझ में आए!

यहां तक कि उन्होंने ‘हरीकेन’ को ‘हिमकेन’ नाम देने की वकालत की, क्योंकि उनका तर्क था कि हरीकेन में अंग्रेजी का ‘हर’ शब्द जुड़ा है. जो चक्रवात के महिला होने का संकेत देता है!

उनकी आवाज में जब हजारों लोगों की आवाज मिली तो 1979 में पुरुष तूफानों का जन्म हुआ! यानि पुरुषों के नाम से भी तूफानों के नाम रखे जाने लगे. पर अभी भी महिला तूफानों के नाम कहीं ज्यादा है।

महिला तूफान पुरुषों से तीन गुना खतरनाक !

यही नहीं, हाल ही में इलिनॉय यूनिवर्सिटी के एक शोध में यहां तक बता दिया गया कि महिला तूफान पुरुष तूफानों से तीन गुना खतरनाक होते हैं!

नारीवादियों ने इस पर घोर आपत्ति जताई. सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर तूफानों और चक्रवातों के महिला नामों की फिलॉसफी क्या है?

Cyclone Vardah in Chennai

मरीना बीच पर समंदर में ऊंची उठती लहरें

‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ हरीकेन, टायफून एंड साइक्लोन’ में लिखा गया है, ‘तूफानों के अप्रत्याषित व्यवहार और चरित्र के कारण उनका नामकरण महिलाओं के नाम पर किया जाता रहा है’.

नारीवादियों का तर्क है कि जो पैनल ऐसे नाम रखते हैं, उनमें मर्दों का वर्चस्व है.

तूफानों और चक्रवातों के नामकरण के चलन पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन का नियंत्रण रहा है.

सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता वाला भारतीय उप-महाद्वीप विवादों से बचने के लिए तूफानों के नामकरण की परिपाटी से बचता रहा.

8 देशों के समूह ने नामकरण का निर्णय लिया

2004 में संगठन ने नामकरण से संबंधित अपने अंतरराष्ट्रीय पैनल को भंग कर संबंधित देशों को अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले तूफानों के नाम रखने को कहा.

उत्तरी हिंद महासागर के दायरे में आने वाले आठ देशों भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड ने एक बैठक कर तूफानों के नामकरण का निर्णय लिया.

Rains in Chennai

चेन्नई में तूफान के बाद सड़क पर उखड़ा पेड़

क्षेत्र की जातीय, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखकर तूफानों के नाम तय करने का फैसला हुआ.

सभी देशों ने आठ-आठ नाम सुझाए पर विवाद यहां भी नहीं थमा!

2013 में श्रीलंका सरकार एक तूफान का नाम ‘महासेन’ रखकर खुद विवादों में घिर गई. महासेन श्रीलंका के इतिहास में समृद्धि और शांति लाने वाले राजा के तौर पर दर्ज हैं.

देश के राष्ट्रवादियों ने पूछा कि ऐसे राजा के नाम पर किसी तूफान का नाम कैसे रखा जा सकता है? नाम लेने का फैसला वापस लेना पड़ा.

2014 में इस इलाके में आए तूफान का नाम ‘नानुक’ म्यांमार ने रखा था. वहीं नीलम, नीलोफर जैसे नाम पाकिस्तान ने दिए.

लैंगिक अवतार का विवाद मिट नहीं सका

तूफानों के नाम पर चलने वाला विवाद तो कभी खत्म नहीं होगा पर यह दिलचस्प तथ्य है कि अप्रत्याशित तबाही लाने वाले तूफान हमेशा के लिए या तो रिटायर हो जाते हैं या उनके नामों में बदलाव कर दिया जाता है. जिससे लोग विनाश की उस पीड़ा को दोबारा उसके नाम से महसूस न करें!

1954 में कहर बरपाने वाली महिला हरीकेन कैरोल हेजेल से लेकर 1960 में तबाही लाने वाली डोना.1970 में विनाश का कारण बनी सीलिया सबका यही हश्र हुआ. दोबारा इन्हें तूफानों की सूची में जगह नहीं मिली.

Katrina 2005 Cyclone

2005 में आए कटरीना तूफान से तबाही का मंजर

2005 में कहर बरपाने वाले कैटरीना, रीटा और विलमा भी नामों के इतिहास में दफन हो गए. यही हाल 2015 में आए जुआकिन और एरिक तूफान का हुआ.

तूफानों के नामों की सूची को छह-छह साल के लिए जारी करने की हालिया परिपाटी भी तूफानों के लैंगिक अवतार पर जारी विवाद को मिटा नहीं पाई है.

आज भी मादा तूफानों के नाम लोगों की जुबां पर ज्यादा हैं. पुरुष तूफानों के नाम कितने लोग जानते हैं?

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