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गाजियाबाद-नोएडा में प्रदूषण कम करने के सरकारी दावों में कितना दम?

नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर कम करने को लेकर परिवहन विभाग सक्रिय होने का दावा कर रहा है.

Updated On: Nov 01, 2018 08:32 PM IST

Pankaj Kumar Pankaj Kumar

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गाजियाबाद-नोएडा में प्रदूषण कम करने के सरकारी दावों में कितना दम?
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नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर कम करने को लेकर परिवहन विभाग सक्रिय होने का दावा कर रहा है. इस बाबत गाजियाबाद 3 एकड़ की जमीन भी खोजी जा रही है जहां 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी और पंद्रह साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को डंप किया जा सके. गाजियाबाद में बुधबार को आधा दर्जन से अधिक पुरानी गाड़ियों को सीज किया जा चुका है वहीं नोएडा में ये संख्या 4 बताई जा रही है.

ट्रांसपोर्ट विभाग के आंकड़ों के मुताबिक गाजियाबाद में प्राइवेट गाड़ियां जो 10 और पंद्रह साल की समय सीमा को पार कर चुकी हैं उन चार पहियों प्राइवेट गाड़ियों की संख्या 18,174 है वहीं 2 व्हीलर की संख्या 98,272 है. नोएडा में चार पहियों वाली ऐसी प्राइवेट गाडियों की संख्या 20,074 है वहीं टू व्हीलर की संख्या 28,159 है.

अगर कॉमर्शियल गाड़ियों को भी जोड़ा जाए तो 10 और पंद्रह साल की अवधि को पार करने वाली गाड़ियों की कुल संख्या गाजियाबाद में 1,23,195 है जबकि नोएडा में कॉमर्शियल और प्राइवेट गाड़ी की संख्या जो डेडलाइन क्रॉस कर चुकी हैं उनकी संख्या 53,680 है. बुलंदशहर में ये संख्या 92,623 है वहीं हापुड़ में रजिस्टर्ड गाड़ियों की संख्या, जो 10 और पंद्रह साल की सीमा पार कर चुकी हैं, संख्या 1329 है.

आंकड़ों के मुताबिक गाजियाबाद में 10 साल पुरानी डीजल चालित गाडियों में 176 का चालान काटा जा चुका है. वहीं 164 को बंद किया गया है. इनमें 1493 गाड़ियों के पंजीयन चिह्न निरस्त किए जा चुके हैं जबकि 10 हजार 4 सौ 73 गाड़ियों को अन्य जनपद या प्रदेश के लिए अनापत्ति पत्र जारी किया जा चुका है ये सारी कवायद एनजीटी द्वारा आदेश पारित करने के बाद किया गया है. 15 साल पुरानी पेट्रोल की गाड़ियों की कुल संख्या में 8 बंद की गई हैं जबकि 142 का पंजीयन चिह्न समाप्त किया गया है और 12,312 गाड़ियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र देकर दूसरे जनपद या राज्यों में भेज दिया गया है.

गाजियाबाद के एआरटीओ बीपी सिंह ने कहा कि दस और पंद्रह साल की सीमा पार चुकी गाड़ियों पर हमारी नजर है. इसके लिए तीन एकड़ जमीन की मांग सरकार के पास विचाराधीन है. हमारी योजना है कि बड़े पैमाने पर ऐसी गाड़ियों का पंजीयन रद्द कर इस तीन एकड़ में जमीन में डंप किया जाए. साथ ही दस से पंद्रह साल पुरानी गाड़ियों पर भी हमारी कार्रवाई जारी है.

प्रतीकात्मक

प्रतीकात्मक

नोएडा में फिलहाल तमाम समय सीमा पार कर चुकी गाड़ियों के मालिकों के लिए सूचना जारी किया जा चुकी है. 3 महीने के भीतर ट्रांसपोर्ट विभाग को सूचित नहीं करने पर उनका आर सी पेपर कैंसिल कर दिया जाएगा और 6 महीने बीत जाने पर उनका पंजीयन भी रद्द कर दिया जाएगा.

ट्रांसपोर्ट विभाग ने लोगों से अपील की है कि वो लोग जिन्होंने अपनी गाड़ी नष्ट कर दी हों या दूसरे जनपद या प्रदेश भेज चुके हैं ,वो ट्रांसपोर्ट विभाग को सूचित करें. जिससे गाड़ी का प्रॉपर रजिस्ट्रेशन और उसके सही पते की जानकारी विभाग को प्राप्त हो सके.

नोएडा के एआरटीओ ए.के. पांडे के मुताबिक सिटी मजिस्ट्रेट और विभाग के लोग सड़क पर एनजीटी के आदेश के तहत गाड़ियों की जांच पड़ताल कर रहे हैं. और इस बाबत हमने 4 गाड़ियों को सीज भी किया है.

ए.के. पांडे के मुताबिक बहूत सारी रजिस्टर्ड गाड़ियां, जो 10 और पंद्रह साल की सीमा पार कर चुकी हैं, ऑफ रोड हो चुकी हैं. उन्हें या तो नष्ट किया जा चुका है या दूसरे प्रदेश या जनपद में बेचा जा चुका है. इसलिए मोपेड, पुरानी स्कूटर या जीप या एम्बेस्डर सड़क पर दिखाई नहीं पड़ती हैं. लेकिन एनओसी या नष्ट की गाड़ियों के बारे में सूचना नहीं देने की वजह से उचित रिकॉर्ड रख पाने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. फिलहाल ट्रांसपोर्ट विभाग एनओसी के लिए आवेदन कर चुकी गाड़ियों का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के बगैर एनओसी मंजूर करने में बिल्कुल सख्त हो चुकी है.

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