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नोटबंदी पर मनमोहन सिंह का अनुमान कितना सही?

जीडीपी में लगभग दो प्रतिशत की गिरावट आएगी. और ये आंकडा अनुमान से कम ही है.

Updated On: Nov 25, 2016 01:17 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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नोटबंदी पर मनमोहन सिंह का अनुमान कितना सही?

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी. गुरुवार को उन्होंने नोटबंदी पर नरेंद्र मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की. राज्यसभा में बहस के दौरान उन्होंने कहा,‘जो किया गया है, उससे देश की जीडीपी में लगभग दो प्रतिशत की गिरावट आएगी. और ये आंकडा अनुमान से कम ही है, अधिक नहीं.’

पूर्व प्रधानमंत्री खुद एक अर्थशास्त्री हैं. उनकी कही बातों से सहमति जताते हुए विशेषज्ञ कहते हैं कि जीडीपी में गिरावट दो प्रतिशत से ज्यादा ही रह सकती है, शायद तीन से चार प्रतिशत के बीच.

अर्थशास्त्री और द ब्लैक इकॉनमी इन इंडिया  के लेखक प्रोफेसर अरुण कुमार कहते हैं, ‘मुझे नहीं पता कि किस आधार पर मनमोहन सिंह इस दो प्रतिशत के आंकड़े पर पहुंचे हैं, मेरे अनुमान से गिरावट दो प्रतिशत से ज्यादा होगी. यह सच है कि किसान, घर-गृहस्थी, छोटे उद्योग और कारोबारियों पर बुरा असर पड़ना शुरू हो गया है क्योंकि बाजार में नकदी की किल्लत के कारण लेनदेन मुश्किल हो गया है. एक झटके में 500 और 1000 के नोट खत्म करके, लिक्विडिटी का तो बैंड बज गया है. 86 फीसदी नकदी इन्हीं नोटो में थी. तो अर्थव्यवस्था कैसे खड़ी रह सकती है और कब तक? मुझे नहीं लगता है कि ये संकट 50 दिन में खत्म होने वाला है. यह अगले सात से आठ महीने तक चल सकता है और उत्पादन पर इसका बुरा असर होगा. इसका दुष्प्रभाव हमारी जीडीपी पर पड़ेगा.’

संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में सरकार के फैसले पर जोरदार हमला करते हुए मनमोहन सिंह ने इसे

नोटबंदी को लागू करने में सरकार का नायाब कुप्रबंधन
बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह इस योजना को लागू करने के लिए कोई रचनात्मक प्रस्ताव सामने लाएं.

Economy Source: Getty Images

नोटबंदी पर क्या बोले मनमोहन

  • नोटबंदी मुद्रा को कमजोर कर सकती है.
  • इससे मुद्रा और बैंकिंग तंत्र में लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है.
  • इसका सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारों, खेती और सहकारी बैकिंग पर होगा.
  • सहकारी बैंकिंग सेक्टर काम नहीं कर पा रहा है.
  • नोटबंदी को लागू करने में कुप्रबंधन की नायाब मिसाल दिखाई दी.
  • 60-65 लोग अब तक मारे जा चुके हैं.
 

रिपोर्टों के अनुसार 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने के फैसले मद्देनजर रेटिंग एजेंसियों ने भारत की जीडीपी वृद्धि को लेकर अपने अनुमानों में कटौती कर ली है. काले धन पर लगाम लगाने की कोशिश में 1000 और 500 के नोटों को खत्म करने से नकदी की किल्लत हो गई है और बंद हो चुके नोटों को बदलने में बैंकों के छक्के छूटे हुए हैं.

दीर्घकालिक असर

लाइव मिंट ने लिखा है, ‘नोटबंदी से एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में वस्तुओं के उपयोग में कमी आ सकती है. इस साल अच्छे मॉनसून के बाद उसमें बाजार में हलचल बढ़ने की संभावना थी. काले धन से वस्तुओं के उपभोग में जो तेजी होती है वह भी कुछ समय के लिए थम जाएगी.‘

अर्थशास्त्री और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सुरजीत मजूमदार कहते हैं, ‘पूरे साल जो भी आर्थिक गतिविधियां होती हैं, उनसे जीडीपी बनती है. हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री ने जो 2 प्रतिशत का आंकड़ा दिया है, उस पर तो मैं कुछ नहीं कह सकता, लेकिन यह सही है कि जीडीपी में गिरावट आएगी. चूंकि बाजार में मुद्रा का प्रवाह नहीं है, इसलिए आर्थिक गतिविधियां थम सी गई हैं और उत्पादन में भी गिरावट आई है. निश्चित तौर पर अर्थव्यवस्था पर इसका असर होगा.’

SmallIndustry_GDP Source: Getty Images

इस तंत्र को समझाते हुए मजुमदार कहते हैं, ‘कुछ चीजों पर तत्काल असर पड़ता है. एक बार गिरावट आ जाए तो उसके असर उससे भी ज्यादा समय तक रह सकते हैं जितना सोचा हो, ठीक अनौपचारिक क्षेत्र में लिए जाने वाले उधर की तरह. अगर कोई उत्पादक अपना माल बेचकर पैसा नहीं हासिल कर पाता है तो वो अपना कर्जा नहीं चुका पाएगा. वह अपनी साख को बनाए नहीं रख सकता जिसका आगे चलकर उसे नुकसान होता है.’

हालात इतने भी खराब नहीं

जीडीपी को लेकर मनमोहन सिंह की चिंताओं के बावजूद अर्थशास्त्री और सेंटर फॉर रिसर्च पॉलिसी में सीनियर फेलो राजीव कुमार मानते हैं कि हालात इतने भी खराब नहीं हैं. वह तीसरी और चौथी तिमाही में एक से डेढ़ प्रतिशत गिरावट का अनुमान जताते हैं.

SmallIndustry Source: Getty Images

वह कहते हैं, ‘मुझे समझ नहीं आता है कि मनमोहन सिंह को यह दो प्रतिशत का आंकड़ा कहां से मिला और उन्होंने यह क्यों कहा कि ‘नोटबंदी संगठित लूट है.’ यह एक राजनीतिक बयान है. मेरा अंदाजा है कि तीसरी और चौथी तिमाही के दौरान जीडीपी में 1-1.5 प्रतिशत की गिरावट  रहेगी. आखिर में मुझे जीडीपी वृद्धि 6 से 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. मांग और लेनदेन  में गिरावट के कारण, अनौपचारिक क्षेत्र और उसके आपूर्ति  क्षेत्र पर बुरा असर होगा. 30 फीसदी हिस्सा प्रभावित होगा, 70 प्रतिशत सुरक्षित रहेगा.  इसलिए मैं नहीं समझता कि हालात बहुत ज्यादा खराब है.’

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