विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

बंगाली हुआ रसगुल्ला, मिला जियोग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन टैग

सितंबर, 2015 में ओडिशा ने अपने त्योहार उल्टो रथ के दिन ही रसगुल्ला दिवस मनाने का फैसला किया था, तबसे ये विवाद चल रहा है.

FP Staff Updated On: Nov 14, 2017 05:11 PM IST

0
बंगाली हुआ रसगुल्ला, मिला जियोग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन टैग

रसगुल्लों की लड़ाई काफी पुरानी है. पूर्व के दो राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच 'रसगुल्ला हमारा है', 'रसगुल्ला हमारा है', वाली लड़ाई काफी दिनों से चल रही थी, अब इस लड़ाई में बंगाल की जीत हो गई है. बंगाल ने रसगुल्ले के आविष्कार को अपने नाम से रजिस्टर करा लिया है. ये टैग उसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स ऑफ गुड्स रजिस्ट्रेशन की ओर से मिल गया है, इसके बाद रसगुल्ला बंगाली हो गया है.

अब बंगाल को जियोग्राफिकल आईडेंटिफिकेशन मिल जाने के बाद कोई भी अनऑथराईज्ड व्यक्ति इसका इस्तेमाल ब्रांड के तौर पर नहीं कर सकता.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने इस मौके पर ट्वीट कर बधाई दी.

सितंबर, 2015 में ओडिशा ने अपने त्योहार उल्टो रथ के दिन ही रसगुल्ला दिवस मनाने का फैसला किया था. साफ तौर पर बंगाल को ये बात अच्छी नहीं लगी थी. बंगाल का ये कहना है कि रसगुल्लों का आविष्कार उन्होंने किया है, तबसे ही ये विवाद चल रहा था.

ओडिशा के पास अपने दावे को मजबूत करने के लिए एक दंतकथा भी है. इस कहानी के मुताबिक, रथ यात्रा के दौरान लक्ष्मी जी को भगवान जगन्नाथ अकेले घर छोड़ जाते हैं, तो वो बहुत परेशान होती हैं फिर वापस आने पर वो उन्हें घर में नहीं घुसने देतीं, इसपर भगवान उन्हें रसगुल्ले का एक पात्र भेंट कर प्रसन्न करते हैं.

हालांकि, बंगाल के पास इसका भी तर्क था. उनकी तरफ से कहा गया कि रसगुसल्ले को फटे दूध से बनाया जाता है, जिसे अशुद्ध माना जाता है, तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि भगवान ने देवी को ये रसगुल्ला चढ़ाया होगा.

वैसे, अगर आप इंटरनेट पर 'रसगुल्ला किसका' सवाल का जवाब ढूंढेंगे तो यही जवाब मिलेगा कि ये बात कि कलकत्ता के के. सी. दास, जिन्होंने रसगुल्ले का आविष्कार किया था, गलत है. जबकि, ओडिशा में लक्ष्मी मां को रथ यात्रा में आखिरी दिन इसे भोग के रूप में चढ़ाया जाता है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi