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खिलौनों से खेलने की उम्र में बच्चे शरीर से खेलने लगे, कहीं आप जिम्मेदार तो नहीं!

पिछले कुछ वक्त में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां सात साल, नौ साल से लेकर 13-14 साल के बच्चों ने रेप या गैंगरेप जैसा अपराध किया है

Tulika Kushwaha Tulika Kushwaha Updated On: Jul 18, 2018 08:36 AM IST

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खिलौनों से खेलने की उम्र में बच्चे शरीर से खेलने लगे, कहीं आप जिम्मेदार तो नहीं!

हर रोज रेप की पचासों घटनाओं की खबरें सुनकर मन गुस्से और दुख से भर जाता है, आपके साथ भी होता होगा. लेकिन पिछले कुछ समय में एक-दो ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिन्हें सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. 9 साल की उम्र में कोई बच्चा रेप कर सकता है या सात साल की उम्र में कोई बच्चा अपनी किसी क्लासमेट के साथ गंदी हरकत कर सकता है, ये सोचना भी असंभव लगता है. लेकिन पिछले कुछ वक्त में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां सात साल, नौ साल से लेकर 13-14 साल के बच्चों ने रेप या गैंगरेप जैसा अपराध किया है.

बच्चों ने किए हैं ये अपराध

ताजा मामला देहरादून का है. देहरादून के सहरपुर इलाके में 9-14 साल के पांच बच्चों ने एक आठ साल की बच्ची के साथ रेप किया. जो बात गौर करने वाली है, वो ये कि उन्होंने ये अपराध करने का निश्चय पॉर्न देखने के बाद किया. इन लड़कों ने उनमें से ही किसी लड़के के मोबाइल पर दो दिन पहले पॉर्न देखा था. इसके बाद अपने ही मुहल्ले की एक लड़की के साथ गैंगरेप किया.

इसके पहले भी 3 जुलाई को कानपुर में बिल्कुल ऐसा ही एक मामला सामने आया था. यहां भी 6 से 12 साल के 4 बच्चों ने एक चार साल की बच्ची के साथ रेप करने की कोशिश की थी. इस केस में भी इन लड़कों ने मोबाइल पर पॉर्न देखा था.

दिल्ली में भी नवंबर 2017 में एक घटना हुई थी, जिसमें पांच साल के एक बच्चे ने चार साल की अपने क्लासमेट के प्राइवेट पार्ट में पेंसिल घुसा दी थी. 4 जुलाई को नोएडा में भी ऐसी ही एक घटना सामने आई. एक छह साल के बच्चे ने तीन साल की बच्ची के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी और उसके प्राइवेट पार्ट में कोई ऑब्जेक्ट घुसाने की कोशिश की थी. इतनी वीभत्स हरकत की उम्मीद आप एक पांच-छह साल के बच्चे से नहीं करते हैं. वैसे तो ऊपर जितनी घटनाओं का जिक्र किया गया है, इनमें से कोई भी संभव नहीं लगती है. लेकिन यही सच्चाई है.

ऐसा वक्त आ गया है, जब एक पांच-छह साल का बच्चा भी रेपिस्ट हो सकता है. कैसा लगता है, जब आपकी आंखों के सामने सोसाइटी इस कदर खतरनाक और गिरी हुई हो जाती है. हमारे सामने ये सवाल खड़ा हो जाता है कि ऐसा संभव कैसे हो गया है? मोबाइल पर पॉर्न देख रहे बच्चों में ये हिम्मत कहां से आ जाती है कि वो रेप के लिए प्रेरित हो सकते हैं? एक पांच साल के बच्चे में एक लड़की के शरीर को लेकर इतना भान कैसे है कि कौन सा हिस्सा प्राइवेट है और वो इस तक पहुंचने के बारे में कैसे सोच सकता है?

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

बच्चों की इंटरनेट हैबिट पर नजर रखना मुमकिन नहीं

जवाब हमारी सोसाइटी में ही है. टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी जितनी आसान की है, उससे ज्यादा हराम ही की है. पूरा वक्त टीवी और स्मार्टफोन्स के जरिए बाहरी दुनिया और न जाने किन-किन चीजों के प्रति एक्सपोज होते रहते हैं बच्चे. और वो बच्चे हैं, किस चीज को कैसे लें, इसको लेकर कभी आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता. स्मार्टफोन्स और इंटरनेट के इस जमाने पर इस दुनिया में बच्चों के लिए भी बहुत कुछ है, लेकिन बहुत कुछ ऐसा है, जिनसे उन्हें बचाकर रखने की जरूरत है. लेकिन लाख एहतियात बरतने और पैरेंट ऑबजर्वेशन के बावजूद भी आप बच्चे की इंटरनेट हैबिट पर नजर नहीं रख सकते.

इसमें सबसे बड़ी गलती पैरेंट्स की है. वो बच्चों को बस इसलिए स्मार्टफोन्स पकड़ा देते हैं ताकि उनके काम में खलल न पड़े. गोद के बच्चे भी जिन्हें किसी बात का पता नहीं लेकिन स्मार्टफोन की लाइट और आवाज सुनते ही रोते-रोते चुप हो जाते हैं. फिर थोड़ा बड़े होने पर स्मार्टफोन के लिए रोने लगते हैं और फिर कुछ और वक्त के बाद वो गलत आदतें सीख लेते हैं और फिर इस बारे में कुछ करना संभव नहीं रह पाता. इंटरनेट पर सबकुछ बस एक क्लिक पर उपलब्ध है और सबकुछ मॉनिटर करना मुमकिन नहीं है. अगर आपने ये सारे सेफ्टी मेजर्स ले रखे हैं और आपको लगता है कि बच्चा एजुकेशन और गेम्स से जुड़े प्लेटफॉर्म्स ही देख रहा है, उसमें कोई बुराई नहीं तो आप गलत भी हो सकते हैं. ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें ऑनलाइन गेम्स खेलते हुए बच्चों के साथ ऑनलाइन सेक्सुल असॉल्ट की घटनाएं हुई हैं.

और इससे भी बड़ा डर तो ये है कि खुद आपका बच्चा गलत चीजें कर रहा हो. आज टीवी और फिल्मों में हर दूसरी चीज सेक्सुअलाइज कर दी गई है. स्मार्टफोन पर पॉर्न की वेबसाइट चेक करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है. आपकी नजरों से छुपकर पॉर्न देख रहा बच्चा पॉर्न एडिक्ट भी बन सकता है. इसलिए बहुत जरूरी है कि आप अपने बच्चे पर सख्ती बरतें और अपने बच्चे को खुश रखने की कोशिश में अंधे न हो जाएं. अपने बच्चे को ना कहना सीखें.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

इन तरीकों से अपने बच्चे को गलत बनने से रोक सकते हैं

यहां कुछ बातें हैं, जिनको ध्यान में रखकर आप अपने बच्चे को स्मार्टफोन और पॉर्न एडिक्ट बनने से रोक सकते हैं-

- पहली बात बहुत जरूरी न हो तो अपने बच्चे को 15-16 साल तक की उम्र तक स्मार्टफोन न दें. अगर पढ़ाई करनी है, तो आप अपने फोन को कुछ सेफ्टी मेजर्स ऑन कर बच्चे को इस्तेमाल के लिए दे सकते हैं.

- अगर आपने बच्चे को स्मार्टफोन दिया भी है तो उसके इस्तेमाल के लिए एक टाइम लिमिट तय कर दीजिए, जैसे कि वो बस पढ़ाई के वक्त इसका इस्तेमाल कर सकता है.

- रात में या तो बच्चे का फोन ऑफ कर दीजिए या बच्चे से फोन ले लीजिए. बेडरूम में स्मार्टफोन या कोई इलेक्ट्रॉनिक अलाऊ मत करिए.

- बच्चे को गलती होने या काम न पूरा करने पर स्मार्टफोन मत दीजिए. बच्चे को सजा देना सीखिए, लेकिन थप्पड़-घूंसे का सहारा मत लीजिए.

- सॉफ्टवेयर ब्लॉक लगाइए.

- सारे पासवर्ड्स खुद रखिए.

- इनके सबसे बड़ी बात. अपने बच्चे को खुद सेक्स एजुकेशन दीजिए. कोई भी चीज जिसके बारे में दबी जुबान से बात की जाए और अधकचरी जानकारी मिले, वो खतरनाक ही होती है. इसलिए जरूरी है कि अपने बच्चे को पॉर्न या सेक्सुल असॉल्ट जैसी चीजों से बचाने के लिए खुद उनसे बात करें और उन्हें बताएं कि वो अच्छी और बुरी चीजों में अंतर करना कैसे सीखें. उनको खुद में विश्वास करना सिखाएं और उन्हें बताएं कि आप भी उनमें विश्वास करते हैं.

ये सभी बुराइयां सहीं पैरेंटिंग सही गाइडेंस की कमी के चलते आती हैं और आप खुद कदम उठाकर अपने बच्चों को सही रास्ते पर ला सकते हैं.

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