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रेप पीड़ित यदि बयान से पलटे तो उसके खिलाफ भी दायर हो मुकदमा: SC

रेप के किसी भी मामले में पीड़ित, आरोपी को बचाने के लिए उससे समझौता करता है या फिर अपने बयान से मुकर जाता है तो इस स्थिति में पीड़ित पर भी मुकदमा दायर किया जा सकता है

Updated On: Sep 30, 2018 11:43 AM IST

FP Staff

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रेप पीड़ित यदि बयान से पलटे तो उसके खिलाफ भी दायर हो मुकदमा: SC

सुप्रीम कोर्ट ने एक रेप मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया है कि अगर रेप के किसी भी मामले में पीड़ित, आरोपी को बचाने के लिए उससे समझौता करता है या फिर अपने बयान से मुकर जाता है तो इस स्थिति में पीड़ित पर भी मुकदमा दायर किया जा सकता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर अनुसार यह केवल उन्हीं मामलों में लागू होगा जिनमें आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के बावजूद पीड़ित अपने बयान से पलटकर आरोपी को बचाने की कोशिश करता है.

2004 के एक रेप मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कई मुख्य बातों को सामने रखा. कोर्ट ने कहा, क्रिमिनल ट्रायल का उद्देश्य सच को सामने लाना है. जांच कैसी हो यह हर केस और उससे जुड़े तथ्यों पर निर्भर करता है. किसी को निर्दोषी मान लेने और पीड़ित के हक के बीच एक संतुलन जरूरी है. आरोपी या पीड़ित किसी को भी यह हक नहीं कि वो धोखे या झूठ से क्रिमिनल ट्रायल को पलट दे. कोर्ट कोई मजाक का विषय नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

कोई पीड़ित किसी भी दबाव या अन्य किसी कारण से अपने बयान से मुकरता है तो कोर्ट चुप नहीं बैठेगा

2004 के जिस रेप मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी, उसकी कहानी इसी से मिलती-जुलती है. नौ साल की रेप पीड़िता लड़की ने अपनी मां के साथ मिलकर पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया था. पीड़िता का मेडिकल चेकअप भी कराया गया और उसने आरोपी की पहचान भी कर ली लेकिन छह महीने बाद ऐन मौके पर कोर्ट के सामने वह पलट गई.ऐसे में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया.

बाद में गुजरात हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटा और रेप पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के मद्देनजर आरोपी को दोषी करार दे दिया. फिर आरोपी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई.

गुजरात हाईकोर्ट द्वारा फॉर्वर्ड किए गए सबूतों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, रेप पीड़िता गरीब परिवार से ताल्लुक रखती थी. यही वजह है कि दवाब बनाए जाने के कारण वह अपने बयान से मुकर गई.

इसी संदर्भ में बोलते हुए कोर्ट ने कहा, अगर कोई पीड़ित किसी भी दबाव या अन्य किसी कारण से अपने बयान से मुकरता है तो कोर्ट चुप नहीं बैठेगा. सच को सामने लाया ही जाएगा.

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