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क्यों नहीं सुरक्षित है इस देश की बेटी? उसकी 'आजादी' का क्या?

क्यों न एक बार लड़कियों को ताने मारने और घर में बंद करने की जगह लड़कों को बंद किया जाए?

mohini Bhadoria mohini Bhadoria Updated On: Aug 25, 2017 06:00 PM IST

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क्यों नहीं सुरक्षित है इस देश की बेटी? उसकी 'आजादी' का क्या?

अगर आप एक बेटी के पिता हैं और जब आपकी बेटी घर से बाहर जाती है तो क्या आप निश्चिंत रहते हैं कि वो घर सलामत वापस आएगी? इस देश में लड़कियों की सुरक्षा की गारंटी कोई नहीं दे सकता क्योंकि हर रोज कभी उनके साथ रेप, कभी यौन शोषण तो कभी गैंगरेप और हत्या की खबरें आती हैं.

लड़की के साथ ऐसा कोई हादसा हुआ, तो उसमें सोसाइटी ये ढूंढने की जरूर कोशिश करती है कि लड़की की जरूर कोई गलती रही होगी. क्या उन्हें ये नहीं पता कि कुछ मनचले अपनी भड़ास और चिढ़ की वजह से लड़कियों को तंग करते हैं. 'बात कर वरना उठवा लेंगे', 'तूने उस लड़के से बात भी कैसे की', 'मैडम कितने लोगी' इन घटिया जुमलों के साथ लड़कियों को धमकाया और छेड़ा जाता है. नहीं मानीं तो पीछा किया जाता है और विरोध करती हैं तो हमला कर दिया जाता है.

कब तक लड़कियां ऐसे ही खुलेआम बेइज्जत होती रहेंगी? वो खुलकर जीने की कहां से सोचेंगी, जब उन्हें अपनी सुरक्षा का ही कोई भरोसा नहीं है? इस देश में रोज-ब-रोज ऐसी रेप, ईवटीजिंग और हत्या की घटनाएं होती हैं, जिसने लड़कियों की जिंदगी को नर्क बना रखा है. क्या खुलकर जीने के नए नियम भी लड़कियों को खुद बनाने पड़ेंगे या सरकार मुंह ताकती रहेगी?

आखिर कब सुरक्षित महसूस करेंगी लड़कियां?

आजाद देश की तो लोग बहुत बातें करते हैं लेकिन सवाल अब ये खड़ा होता है कि लड़कियां कब आजाद होंगी? उन्हें असली आजादी कब मिलेगी? दिन पर दिन मासूम बच्चियां मनचलों के हवस का शिकार होती जा रही हैं.

देश ने 10 दिन पहले आजादी का जश्न मनाया था. उसी आजादी के जश्न से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने लोगों को हिलाकर रख दिया. 15 अगस्त को चंडीगढ़ के सेक्टर 23 में आठवीं क्लास की एक बच्ची से रेप हुआ. वो स्कूल के मनाए गए 15 अगस्त समारोह से वापस लौट रही थी. मामले में अभी तक कुछ नहीं हुआ है.

और अब, आप सोच भी नहीं सकते उतनी बर्बरता हुई है उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की घटना में एक 15 साल की मासूम लड़की के साथ. लड़की ने छेड़खानी का विरोध किया तो तंग कर रहे लड़के ने उसका दायां हाथ काट दिया. इस हमले में उसके सिर और दूसरे हाथ में भी गंभीर चोटें आईं. पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उस लड़के को गिरफ्तार तो कर लिया. लेकिन इससे ये तो सुनिश्चित नहीं हुआ आगे ऐसी कोई घटना नहीं होगी.

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मेरी बेटी के साथ रेप हुआ है...समाज क्या कहेगा?

अगर किसी भी लड़की का रेप हो जाता है, या छेड़खानी की घटना हो जाती है तो उसे सबसे पहले अपने ही बारे में बुरी बातें सुनने को मिलती हैं. सबसे पहले सोसाइटी अपनी दकियानूसी सोच ही दिखाती है, ये कहते हुए कि लड़कियों को तो रात में घर से बाहर निकलना ही नहीं चाहिए. अब एक-एक को तो समझाना बेकार है, क्या उन्हें ये नहीं पता कि लड़कियों को ये मनचले दिनदहाड़े भी नहीं छोड़ते.

दरअसल सोसाइटी मिनटों में बहाने बना लेती है. उनका काम लड़की के साथ हो रही घटनाओं पर चार तरह की बातें बनानी हैं. वहीं देश-प्रदेश की सरकारें महिलाओं को सुरक्षा देने में भी नाकाम हो रही हैं.

लेकिन ये सिलसिला कब तक चलेगा? क्या लड़कियों को सरकार पर भरोसा करना छोड़ देना चाहिए? या फिर सरकार को सुरक्षा देने के लिए कोई नया कानून बनाना चाहिए, जिसके बाद किसी लड़के में हिम्मत ना हो किसी भी लड़की को आंख उठाकर देखने की.

सोसाइटी कहती है कि लड़कियों को देर रात घर से नहीं निकलना चाहिए. घटना को अंजाम तो लड़के देते हैं ना. तो क्यों न उन्हें ही घर में बंद करके रखा जाए. अगर ऐसा होगा तो शायद ये घटनाएं कम हो जाएं और लड़कियों को हर बात पर गलत ठहराने वालों का मुंह भी बंद हो जाएगा. कुछ दिन पहले हुई चंडीगढ़ में आईएएस की बेटी वर्णिका कुंडू के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना भी नहीं घटती.

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दरअसल 4 अगस्त को चंडीगढ़ में देर रात बीजेपी के हरियाणा अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला और उसके दोस्त ने एक आईएएस की बेटी वर्णिका कुंडू का पीछा कर उसके साथ छेड़खानी की थी. इसका विरोध वर्णिका ने खुलकर किया था.

लेकिन सारी लड़कियां वर्णिका जितनी बहादुर नहीं होतीं और उनमें उतनी हिम्मत नहीं बंधाई गई होतीं कि वो खुलकर विरोध कर सकें. कुछ के केस तो वहीं दब जाते हैं. वो सुरक्षा की हकदार क्यों नहीं हैं?

आंकडे़ें हैं तो सही लेकिन कितने सही हैं या कितने पूरे, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. दिल्ली में रेप के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2016 के जनवरी महीने में दिल्ली पुलिस के पास 140 रेप केस दर्ज किए गए थे. वहीं 238 यौन-शोषण के दर्ज किए गए थे, जिसमें से 43 रेप के और 133 यौन-शोषण के केस अभी तक सुलझाए नहीं जा सके हैं.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डाटा के मुताबिक, 2016 में 34,600 रेप केस दर्ज किए गए थे. इसमें से मध्य प्रदेश और दिल्ली सबसे पहले स्थान पर हैं. वहीं 2015 में 34,651 रेप केस फाइल किए गए थे.

लेकिन एक और बात ये कि ऐसी कितनी ही घटनाएं होती हैं जो सामने नहीं आ पातीं और दर्ज नहीं हो पातीं.

अब सरकार जवाब दे... लड़कियों को स्कूल जाना, ऑफिस जाना या बाहर निकलना बंद कर देना चाहिए क्या? या फिर दिन दहाड़े इसी तरह वो शिकार होती रहेंगी?

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